उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में बीते 23 सितंबर को डॉक्टर घनश्याम तिवारी की निर्मम हत्या हुई थी. इस मामले में प्रशासन ने परिजनों को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया था. परिजनों के मुताबिक, जब हम लोग अपनी मांगों को लेकर मृतक घनश्याम का अंतिम संस्कार नहीं कर रहे थे. तब अधिकारियों ने 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का वादा किया था. लेकिन अब प्रशासन की ओर 10 लाख का चेक भिजवाया गया है. इसलिए हमने उस चेक को लेने से मना कर दिया है. मृतक के परिजन जिला प्रशासन की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं.
दरअसल, सुल्तानपुर के लंभुआ में डॉक्टर घनश्याम तिवारी की पीट-पीट कर निर्मम हत्या कर दी गई थी. इस मामले में मुख्य आरोपी अजय नारायण सिंह फरार चल रहा है. जिला प्रशासन ने उसपर 50 हजार का इनाम घोषित कर रखा है. वहीं अवैध रूप से बनवाई गई उसकी कुछ संपत्तियों पर बुलडोजर भी चलवाया गया है.
परिजनों ने ठुकराई सरकारी मदद
इस बीच शासन के निर्देश पर आज तहसीलदार लंभुआ पीड़ित परिजनों के घर पहुंचे और सरकार द्वारा 10 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपना चाहा. लेकिन मृतक डॉक्टर की पत्नी निशा तिवारी ने 10 लाख का चेक ठुकरा दिया.
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निशा ने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार से पहले जिलाधिकारी समेत तमाम जनप्रतिनिधियों ने एक करोड़ की सहायता राशि, मृतक डॉक्टर की पत्नी को सरकारी नौकरी, अपराधियो पर कार्रवाई के साथ-साथ कड़ी सुरक्षा का आश्वासन दिया था. लेकिन अब तक की कार्यवाही से वो असंतुष्ट हैं. निशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की मांग कर रही हैं.
उधर, घनश्याम तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने अजय नारायण सिंह के चचेरे भाई विजय नारायण सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय के सामने पेश किया है. जहां से उसे जेल भेज दिया गया है. इसपर विजय नारायण की पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा है कि मेरे पति को इस हत्याकांड में फर्जी रूप से फंसाया जा रहा है.
विजय की पत्नी खुशबू सिंह की माने तो उनका पति राजस्थान में बाला जी के दर्शन करने गया था. जहां से पुलिस उसे पकड़ कर लाई और उसे कई दिनों तक हिरासत में रखे रखा. जब पूछा जाता तो पुलिस कहती कि पूछताछ के लिए लाए हैं, छोड़ देंगे.
लेकिन अब उसे जेल भेज दिया गया है. विजय के वकील का कहना है पहले घनशयाम तिवारी हत्या मामले में अजय व 2 अज्ञात की बात सामने आई थी. जहां तक विजय नारायण का सवाल है तो वह बिल्कुल निर्दोष है. उसे पुलिस ने 7 दिनों तक थाने में बैठा कर रखा और जबरन जेल भेज दिया.
महेश शर्मा