रोहित करता था बेहोश, दिल्ली का अली खोल देता था पेट... कानपुर में किडनी निकालने वालों की मिल गई 'कुंडली'

कानपुर के किडनी ट्रांसप्लांट कांड में एक-एक बड़े चौंकाने वाले खुलासे होते जा रहे हैं. ओटी टेक्नीशियन ने बताया कि डॉक्टरों का पूरा 'गैंग' होता है, इसमें सभी तरह के लोग शामिल होते हैं. पता चला है कि बेहोश करने वाले डॉक्टर से लेकर सर्जन तक बाहर से आते थे. गुपचुप ऑपरेशन कर सभी वापस चले जाते थे. ऑपरेशन से पहले CCTV बंद कर दिए जाते थे.

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कानपुर के किडनी कांड में गिरफ्तार लोग नई-नई बातें बता रहे हैं (Photo:ITG) कानपुर के किडनी कांड में गिरफ्तार लोग नई-नई बातें बता रहे हैं (Photo:ITG)

सिमर चावला

  • कानपुर ,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

कानपुर में सामने आए  किडनी ट्रांसप्लांट कांड में अब एक-एक कर ऐसे राज खुलने शुरू हो गए, जो हैरान कर रहे हैं. गाजियाबाद से गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और उसके साथी कुलदीप से हुई पूछताछ में पुलिस को इस पूरे नेटवर्क की परतें समझ आने लगी हैं. दोनों ने बताया कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं था, बल्कि पूरी तरह संगठित टीम इसमें शामिल थी.

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पूछताछ में सामने आया कि एक डॉक्टर, जिसे वे ‘डॉ. रोहित’ के नाम से जानते थे, एनेस्थीसिया का काम संभालता था. यानी मरीज को बेहोश करना उसकी जिम्मेदारी थी. इसके बाद दिल्ली के द्वारका से आने वाला एक अन्य डॉक्टर ‘डॉ. अली’ सर्जरी करता था. किडनी निकालने से लेकर प्रत्यारोपण तक की पूरी प्रक्रिया वही अंजाम देता था.

 दिल्ली से आती थी सर्जरी टीम, ऑपरेशन के बाद गायब

राजेश के मुताबिक, डॉ. अली कभी अकेले नहीं आता था. उसके साथ एक और डॉक्टर और दो सहायक होते थे. यह पूरी टीम तय समय पर पहुंचती, ऑपरेशन करती और फिर बिना कोई निशान छोड़े निकल जाती. ऑपरेशन खत्म होने के बाद टीम अलग-अलग गाड़ियों में बंटकर रवाना होती थी. एक गाड़ी गाजियाबाद की ओर जाती, तो दूसरी लखनऊ के लिए निकलती. इस तरीके से उनकी ट्रैकिंग करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता था. राजेश कुमार ने पुलिस को बताया कि करीब तीन साल पहले उसकी मुलाकात डॉ. रोहित से एक मेडिकल सेमिनार के दौरान हुई थी. वहीं से इस नेटवर्क की शुरुआत मानी जा रही है. राजेश की तकनीकी समझ और काम करने के तरीके से प्रभावित होकर रोहित ने उसे अपने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया. धीरे-धीरे कुलदीप सिंह राघव भी इस चेन में जुड़ गया और फिर यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो गया. राजेश के मुताबिक, जनवरी से अब तक पांच किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके थे.

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 ऑपरेशन से पहले बंद कर दिए जाते थे CCTV

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा उस अस्पताल को लेकर हुआ, जहां ऑपरेशन किए जाते थे. जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे. यानी पूरे ऑपरेशन के दौरान कोई भी फुटेज रिकॉर्ड नहीं होती थी. इससे यह साफ है कि इस नेटवर्क ने पहले से ही हर कदम की प्लानिंग कर रखी थी, ताकि कोई सबूत न बचे. पुलिस ने जब उन टैक्सी ड्राइवरों से पूछताछ की, जो डॉक्टरों को लाते-ले जाते थे, तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई. ड्राइवरों ने बताया कि डॉक्टर अपने चेहरे को इस तरह ढक लेते थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टरों और अन्य लोगों को भुगतान करने का तरीका भी बेहद सोच-समझकर तय किया गया था. गाजियाबाद जाने वाली गाड़ी का किराया नकद में दिया जाता था, जिससे उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी. वहीं लखनऊ जाने वाली गाड़ी का भुगतान ऑनलाइन किया गया था, जिससे पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं. इन्हीं सुरागों के आधार पर अब जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

बड़े अस्पतालों से जुड़ाव की आशंका

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जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े डॉक्टर किसी बड़े और नामी अस्पतालों से जुड़े हो सकते हैं. पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही है कि कहीं यह सिर्फ एक लोकल गैंग नहीं, बल्कि कई शहरों में फैला बड़ा रैकेट तो नहीं. फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती फरार डॉक्टरों तक पहुंचना है. पुलिस ने लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ और देहरादून में अपनी टीमें भेजी हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. चार मुख्य डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है. पुलिस को आशंका है कि ये आरोपी देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकते हैं.

रोहित की तलाश में अटकी जांच

पूरे मामले की कड़ी फिलहाल ‘डॉ. रोहित’ पर आकर टिक गई है. वही इस नेटवर्क का मुख्य कड़ी माना जा रहा है, जिसने बाकी डॉक्टरों और टेक्नीशियनों को जोड़ा. लेकिन रोहित अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. जब तक वह गिरफ्तार नहीं होता, तब तक इस पूरे नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आना मुश्किल माना जा रहा है. डीसीपी पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी के मुताबिक, पुलिस लगातार दबिश दे रही है और जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है. उन्होंने बताया कि कई अहम सुराग हाथ लगे हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. 

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