सामाजिक परिवर्तन दिवस के मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राजनीति और समाज में बदलाव को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि राजनीति में सिर्फ चाहने से कोई कुछ नहीं देता. जितना भी चाह लिया जाए, उससे अपने आप कुछ नहीं होने वाला. जब तक विचारों के लिए लड़ाई नहीं लड़ी जाएगी, तब तक कोई बदलाव संभव नहीं है.
राहुल गांधी ने कहा कि राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे सुनकर अच्छा लगता है, लेकिन उससे कोई वास्तविक बदलाव नहीं होता. उनका कहना था कि समाज में परिवर्तन के लिए सिर्फ नारे नहीं बल्कि संघर्ष और विचारों की लड़ाई जरूरी है. उन्होंने कहा कि बदलाव तब आता है जब कोई व्यक्ति यह तय कर ले कि जो हो रहा है उसे वह स्वीकार नहीं करेगा.
नारे नहीं, विचारों की लड़ाई से आता है सामाजिक परिवर्तन
साथ ही उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर हमेशा शिक्षा और संगठित होने की बात करते थे. उनके अनुसार समाज को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा हासिल करना और संगठित रहना सबसे जरूरी है. राहुल गांधी ने कहा कि अगर समाज इन बातों को अपनाएगा तभी सही मायनों में सामाजिक परिवर्तन संभव हो पाएगा.
राहुल गांधी ने कांशीराम का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे उत्तर प्रदेश में घूमते थे तो अपने साथ पेन लेकर चलते थे. उनका कहना था कि समाज में जो भी फायदा हो, उसका लाभ आम जनता को भी मिलना चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि पहले जो रास्ता था, जिस पर समाज आगे बढ़ रहा था, उसी पर और तेजी से चलना चाहिए था.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि उस रास्ते पर आगे बढ़ने में कांग्रेस पार्टी की भी कुछ कमियां रहीं. राहुल गांधी के अनुसार यही वजह रही कि कांशीराम सफल हुए. उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस अपना काम सही तरीके से करती तो कांशीराम इतने सफल नहीं हो पाते. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी से कहा था कि पता नहीं यह बात सही है या गलत, लेकिन अगर आज जवाहरलाल नेहरू जिंदा होते तो शायद कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते.
देश की तरक्की में हर गरीब बच्चे की भागीदारी जरूरी
राहुल गांधी ने समाज में बराबरी के सवाल पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि इस देश में विकास का फायदा सिर्फ 15 फीसदी लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. समाज के 85 फीसदी लोगों को भी उस विकास का लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीति में दो तरह के लोग होते हैं. एक वो जो चाहते हैं कि सबको फायदा मिले, सबकी प्रगति हो और देश आगे बढ़े. उनके अनुसार भारत में तरक्की तभी मानी जाएगी जब हर गरीब बच्चा भी उस प्रगति में शामिल हो सके.
संतोष शर्मा