प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के दौरान शंकराचार्य को लेकर उपजे विवाद पर अब सियासत तेज होती जा रही है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है और शंकराचार्य के पक्ष में खुलकर बयान दिया है.
अजय राय ने कहा कि शंकराचार्य केवल किसी व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि वो सनातन परंपरा और संस्कृति के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा, 'शंकराचार्य हमारे शंकर के रूप हैं, ऐसे संतों का सम्मान करना हर सरकार और हर व्यक्ति का कर्तव्य है.'
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें स्वयं शंकराचार्य के पास जाकर उनसे दंडवत प्रणाम करना चाहिए. अजय राय ने कहा, 'योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वो शंकराचार्य के चरणों में जाकर माफी मांगें. शंकराचार्य बड़े दिल वाले हैं, वो उन्हें अवश्य माफ कर देंगे.' उन्होंने यह भी जोड़ा कि संत समाज के साथ सम्मानजनक व्यवहार ही भारतीय परंपरा की पहचान है.
क्या है पूरा विवाद
दरअसल प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ बदसलूकी का मामला सामने आया था. उनके शिष्यों ने आरोप लगाया था कि संगम स्नान के दौरान पुलिसकर्मियों ने न केवल शंकराचार्य का राजदंड छीन लिया, बल्कि बटुकों (शिष्यों) को शिखा पकड़कर घसीटा गया और उन्हें एक कमरे में बंद कर बुरी तरह पीटा गया.
इस घटना के सामने आने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग भी लेने लगा है. संत संगठनों ने कार्रवाई की मांग की, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं. शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि यह सनातन परंपरा और गुरु-शिष्य मर्यादा का अपमान है.
सीएम योगी ने किया था कालनेमि का जिक्र
यह विवाद सामने आने के बाद इस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए संबोधन में रामचरितमानस के पात्र ‘कालनेमि’ का जिक्र किया था. पौराणिक कथाओं में कालनेमि वह राक्षस था जिसने साधु का वेश धरकर हनुमान जी का रास्ता रोकने की कोशिश की थी. सीएम योगी माघ मेले को एक ‘यज्ञ’ के समान मानते हैं. उनके इस बयान को इस संदर्भ में देखा जा रहा है.कि जो भी इस आयोजन में बाधा डालता है, वह कालनेमि के समान है.
सिमर चावला