रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी ने संसद को बताया कि पिछले 5 सालों में गड्ढों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. एक एजेंसी के मुताबिक 2020 और 2024 के बीच देश भर में 9438 लोगों की मौत हुई. इनमें से 54 प्रतिशत से ज़्यादा मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में हुईं, जो सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य बनकर उभरा है.
रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी द्वारा एक लिखित जवाब में शेयर किए गए डेटा से पता चला है कि 2021 में मौतों में थोड़ी कमी आई थी. लेकिन उसके बाद से ये आंकड़े लगातार बढ़े हैं. आलम यह है कि 2024 में 2385 मौतों के साथ ये आंकड़ा पीक पर गया. हालांकि सालाना मौतों की संख्या 2020 में 1555 से 2021 में 1481 तक थोड़ी कम हुई. लेकिन तब से यह हर साल बढ़ी है. 2022 में मौतें बढ़कर 1856 हो गईं. वहीं 2023 में 2161 और 2024 में 2385 पर पहुंच गईं.
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यूपी में हुई सबसे ज्यादा मौतें
उत्तर प्रदेश में लगातार सबसे ज़्यादा मौतें हुईं. यहां 2020 और 2024 के बीच 5,127 मौतें हुईं. अकेले 2024 में राज्य में गड्ढों से जुड़ी 1369 मौतें हुईं. जो देश भर में हुई कुल मौतों के आधे से ज़्यादा हैं. जबकि 2023 में यह संख्या 1320 और 2022 में 1030 थी. मध्य प्रदेश में पांच सालों में कुल 969 मौतें हुईं, जिसमें 2024 में 277 मौतें शामिल हैं. इसी समय में तमिलनाडु में 612 मौतें हुईं, जबकि पंजाब में 414 मौतें हुईं.
इन राज्यों ने नहीं दिया 5 सालों का डाटा
मंत्रालय को सौंपी गई राज्य पुलिस रिपोर्ट से लिए गए डेटा से पता चला कि आंध्र प्रदेश, बिहार और गोवा जैसे कुछ राज्यों ने पांच साल के समय में गड्ढों से जुड़ी कोई दुर्घटना या मौत की सूचना नहीं दी. इस दौरान देश भर में गड्ढों से जुड़े 23056 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 19,956 लोग घायल हुए. इनमें से 9670 को "गंभीर चोटें" बताई गईं.
गडकरी ने कहा कि नेशनल हाईवे के डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के लिए केंद्र ज़िम्मेदार है. जबकि संबंधित राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सड़कों के लिए ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने मौजूदा NH नेटवर्क के मेंटेनेंस को प्राथमिकता दी है.
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