सेक्टर-150 के पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से जान गंवाने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता का आखिरी वीडियो सामने आने के बाद इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है. इसमें युवराज अपनी जिंदगी के लिए आखिरी जंग लड़ते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में युवराज अपनी कार की छत पर बैठा दिखाई देता है, मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर बार-बार इशारे करता है और मदद की गुहार लगाता है. सामने दमकल विभाग के कर्मचारी मौजूद हैं, लेकिन घनी झाड़ियों, गहरे पानी और अंधेरे के कारण रेस्क्यू में देरी होती रही.
इस पूरी घटना का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि युवराज के पिता राजकुमार मेहता मौके पर मौजूद थे और अपनी आंखों के सामने बेटे को तड़पता देख रहे थे. वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि एक व्यक्ति दमकलकर्मियों से बार-बार युवराज तक पहुंचने की गुहार लगा रहा है. रेस्क्यू टीम से कहा जाता है कि अंदर जाने की कोशिश तो करो. बताया जा रहा है कि ये युवराज के पिता थे, लेकिन कर्मचारी यह कहते नजर आते हैं कि पानी में उतरने में झाड़ियां और गहराई बड़ी बाधा बन रही है.
बता दें कि 16-17 जनवरी की रात युवराज गुरुग्राम से अपने घर लौट रहे थे. घने कोहरे के बीच सेक्टर-150 में एक तीखे मोड़ पर उनकी कार सड़क से सीधे एक गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. यह गड्ढा एक निर्माणाधीन साइट के पास कई सालों से खुला और बिना बैरिकेडिंग के पड़ा था. हादसे के बाद युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए संघर्ष करते रहे.
वीडियो में कैद हुआ मौत से संघर्ष
आखिरी वीडियो से साफ है कि युवराज उस वक्त ज़िंदा थे और खुद को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे. वह कार के ऊपर बैठकर मोबाइल की फ्लैश लाइट से रेस्क्यू टीम को सिग्नल दे रहे थे. बचावकर्मी युवराज की तरफ रस्सी भी फेंकते हैं, लेकिन वह उस तक नहीं पहुंच पाती. बचावकर्मियों के पास संसाधनों की कमी के चलते युवराज को समय पर सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका. और देखते ही देखते कार गहरे पानी में समा गई और इसे ऊपर बैठे युवराज की डूबकर मौत हो गई.
इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासन और बिल्डरों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जांच में सामने आया है कि जिस प्लॉट में यह गड्ढा बना, वहां वर्षों से पानी भरा हुआ था. न तो बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड और न ही रोशनी की कोई व्यवस्था. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी यहां हादसे हो चुके थे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
यहां भी देखें युवराज का आखिरी वीडियो-
बिल्डरों पर दर्ज हो चुकी FIR
युवराज की मौत के बाद पुलिस ने कई बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. अब तक एमजेड विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार समेत कई बिल्डरों को गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए नोएडा अथॉरिटी से जवाब तलब किया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है. नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटाया गया है और एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया जा चुका है.
बिल्डर के ऑफिस हुए सील
नोएडा पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार और निर्मल कुमार के दफ्तर सील कर दिए हैं. पुलिस के अनुसार, अभियुक्त अभय कुमार पुत्र विक्रमलाल, जो एमजेड विश टाउन के डायरेक्टर एवं बेस्ट टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं, का कार्यालय नोएडा सेक्टर-62 स्थित बिल्डिंग टावर-ए, सातवीं मंजिल, 174-बी में पाया गया, जिसे सील कर दिया गया है. अभय कुमार का पता 29/401, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, दिल्ली बताया गया है. वहीं, लोटस ग्रीन टाउन के बिल्डर निर्मल कुमार (निर्मल सिंह) के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए उनका कॉरपोरेट ऑफिस प्लॉट नंबर-18, छठी मंजिल, सेक्टर-126, नोएडा को सील किया गया है.
चश्मदीद ने लगाए थे गंभीर आरोप
इस पूरी घटना के चश्मदीद मनिंदर ने शुरुआती दिनों में मीडिया के सामने दावा किया था कि हादसे के बाद करीब दो घंटे तक पुलिस, दमकल और SDRF की टीमें युवराज को बचाने के लिए पानी में नहीं उतरीं. मनिंदर ने अपने शुरुआती बयान में बताया था, "जब मैं पहुंचा, तो पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF सब मौजूद थे. लोग बहुत थे, लेकिन कोई अंदर जाने को तैयार नहीं था. एजेंसियों के पास संसाधनों की कमी नहीं थी. नाव थी, सेफ्टी जैकेट थी, सौ मीटर तक रस्सियां थीं. फिर भी कोई नाले में उतरने को तैयार नहीं था. फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों का कहना था कि नाले में सरिया है, अंदर गए तो फंस सकते हैं."
हालांकि चश्मदीद ने बाद में अपना बयान बदल दिया था.
अरविंद ओझा