20 साल बाद घर लौटा लापता बेटा... नेपाल में भटक रहा था, देखते ही फैमिली की भर आईं आंखें

जिस बेटे को परिवार ने 20 साल पहले खो दिया था और मृत मान लिया था, वह अचानक एक दिन जिंदा घर के दरवाजे पर खड़ा मिला. वर्षों पहले घर से लापता हुआ मानसिक रूप से कमजोर किशोर भटकते-भटकते नेपाल पहुंच गया था. अब एक सामाजिक संस्था की मदद से वह सकुशल अपने गांव लौट आया है. घरवालों की आंखों में आंसू थे- हैरानी के भी, और खुशी के भी.

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जिसे परिजनों ने मृत मान लिया था, वह 20 साल बाद घर लौटा. (Photo: Screengrab) जिसे परिजनों ने मृत मान लिया था, वह 20 साल बाद घर लौटा. (Photo: Screengrab)

अमित तिवारी

  • इटावा,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:23 AM IST

यह कहानी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के कुशगवां अहिरन नगला मोतीराम गांव की है. दौलत सिंह नाम का युवक करीब 20 साल पहले लापता हो गया था, अब अपने पैतृक घर लौट आया है. उस वक्त परिवार ने खोजबीन की, रिश्तेदारियों में पता किया, आसपास के जिलों में ढूंढा, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उम्मीद टूट गई. वक्त बीतता गया और दौलत सिंह यादों में सिमटकर रह गया. परिवार ने उसे मृत मान लिया था. 

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परिजनों के मुताबिक, दौलत सिंह जब करीब 7-8 साल का था, तभी उसके माता-पिता का निधन हो गया था. अनाथ होने के बाद उसका पालन-पोषण चाचा-चाची ने किया. इसी दौरान बचपन में लगी एक गंभीर चोट के बाद उसकी मानसिक स्थिति कमजोर रहने लगी.

घरवाले बताते हैं कि वह अक्सर चुप रहता था और कभी-कभी बिना बताए निकल जाता था. एक दिन वह गया तो फिर लौटकर नहीं आया. परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला. समय बीतने के साथ मान लिया गया कि अब वह इस दुनिया में नहीं है.

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भटकते-भटकते पहुंचा नेपाल

घर से निकलने के बाद दौलत सिंह भटकते हुए सीमा पार कर नेपाल पहुंच गया. वहां वह जनकपुर इलाके में बेसहारा हालत में मिला, जहां उसे आश्रय मिला मानव सेवा आश्रम में.

आश्रम के लोगों ने उसे सहारा दिया, खाना, कपड़ा और इलाज उपलब्ध कराया. धीरे-धीरे उसका मानसिक इलाज शुरू हुआ. लंबे समय तक देखभाल और उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार आने लगा.

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जब उसकी याददाश्त और बातचीत की स्थिति बेहतर हुई तो उसने बताया कि वह भारत के इटावा इलाके का रहने वाला है. बस यहीं से उसके घर वापसी की कहानी शुरू हुई.

संस्था ने उठाई जिम्मेदारी

नेपाल के आश्रम ने भारत की सामाजिक संस्था श्रद्धा फाउंडेशन से संपर्क किया. संस्था ने दौलत सिंह की पहचान और पते की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की.

काफी बातचीत और पड़ताल के बाद गांव और परिवार की जानकारी मिल सकी. इसके बाद संस्था के सहयोग से उसे नेपाल से भारत लाया गया और फिर इटावा स्थित उसके गांव पहुंचाया गया.

जब दौलत सिंह गांव पहुंचा तो पहले तो लोग उसे पहचान ही नहीं पाए. 20 साल का लंबा अंतराल, बदला हुआ चेहरा और उम्र का असर- सब कुछ अलग था. लेकिन जैसे-जैसे पहचान की कड़ियां जुड़ीं, परिवार को यकीन होने लगा कि यह वही खोया हुआ बेटा है.

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घर पर चचेरे भाइयों और रिश्तेदारों ने उसे गले लगा लिया. गांव में खबर फैलते ही लोग उसे देखने पहुंचने लगे. माहौल भावुक हो गया.

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बहन ने पहचानने से किया इनकार

परिवार के लोगों ने बताया कि दौलत सिंह की एक सगी बहन भी है, जिसकी शादी हो चुकी है. बहन ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया. इसकी वजह 20 साल का अंतर, बदला हुआ हुलिया और पुरानी यादों का धुंधला पड़ जाना कहा जा रहा है.

हालांकि चचेरे भाई गणेश कुमार और संतोष कुमार ने उसकी पहचान की पुष्टि की है. उनका कहना है कि बचपन की घटनाएं, परिवार के नाम और गांव की बारीक जानकारी वही बता सकता है, जो यहीं पला-बढ़ा हो.

'हमने मान लिया था कि वह नहीं रहा'

चचेरे भाई कहते हैं- हमने उसे बहुत ढूंढा था. जब सालों तक कोई खबर नहीं मिली तो मान लिया था कि अब वह जिंदा नहीं है. आज उसे अपने सामने देख रहे हैं, यह किसी चमत्कार से कम नहीं.

परिजनों के अनुसार दौलत सिंह के हिस्से में चार-पांच बीघा खेती भी है. अब उसकी देखभाल चाचा और चचेरे भाई मिलकर कर रहे हैं.

गांव में चर्चा, सोशल मीडिया पर कहानी

दौलत सिंह की वापसी की कहानी सोशल मीडिया तक पहुंच रही है. लोग इसे इंसानियत, धैर्य और सामाजिक सहयोग की मिसाल बता रहे हैं. परिवार के लिए यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि खोई हुई जिंदगी का फिर से मिल जाना है.

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