उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में जिम की आड़ में चल रहे कथित धर्मांतरण रैकेट का खुलासा उस वक्त हुआ, जब एक महिला ने महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें शुरुआती तौर पर कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया. लेकिन पूछताछ के दौरान एक मोबाइल फोन ने पूरे मामले की परतें खोल दीं.
शिकायत के बाद पुलिस ने मोहम्मद शेख अली को पूछताछ के लिए बुलाया. शुरुआत में उसने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए महिला की शिकायत को झूठा करार दिया. लेकिन जब पुलिस ने उसका मोबाइल फोन चेक किया, तो उसमें एक पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर मिला, जिसने जांच की दिशा ही बदल दी.
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पासवर्ड फोल्डर में 50 से ज्यादा महिलाओं की तस्वीरें
पुलिस के अनुसार जब आरोपी से मोबाइल का पासवर्ड मांगा गया तो वह घबरा गया. जैसे ही फोल्डर खोला गया, उसमें 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले। इनमें घूमने-फिरने, यात्राओं और निकाह से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं. कई तस्वीरों में महिलाएं बुर्का पहने दिखाई दीं और अलग-अलग जिमों से जुड़े आरोपियों के साथ मौजूद थीं.
डिजिटल सबूत सामने आने के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की. इसके बाद मिर्जापुर के कई जिमों पर छापेमारी की गई और एक के बाद एक गिरफ्तारियां हुईं. इसी दौरान कई अन्य महिलाएं भी सामने आईं और बिना अपनी पहचान उजागर किए पुलिस को अपनी आपबीती बताई.
कई जिमों के जरिए चल रहा था कथित नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक यह कथित रैकेट KGN 1, KGN 2.0, KGN 3, आयरन फायर और फिटनेस क्लब जैसे जिमों के जरिए संचालित किया जा रहा था. अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है. दो आरोपी इमरान और लकी अभी फरार हैं, जिन पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है और लुकआउट नोटिस जारी किया गया है.
शुरुआत में दो महिलाओं ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि 25 से 30 महिलाओं ने अप्रत्यक्ष रूप से अपनी शिकायतें पुलिस तक पहुंचाईं. जांच में सामने आया कि आरोपी अमीर घरों की महिलाओं को निशाना बनाते थे और एक बहु-स्तरीय तरीके से उन्हें जाल में फंसाया जाता था.
फ्री जिम ट्रेनिंग से शुरू होता था संपर्क
पुलिस का कहना है कि आरोपी महिलाओं को मुफ्त जिम ट्रेनिंग का लालच देते थे. ट्रेनिंग के दौरान उनकी कई तस्वीरें ली जाती थीं और फिर नंबर एक्सचेंज किया जाता था. शुरुआत में बातचीत जिम और फिटनेस तक सीमित रहती थी, लेकिन धीरे-धीरे निजी बातचीत शुरू हो जाती थी.
अगर महिला रुचि दिखाती थी तो दोस्ती गहरी की जाती और घूमने-फिरने के बहाने बाहर ले जाया जाता. जांच में यह भी सामने आया कि महिलाओं को बुर्का पहनाकर बाजारों, मंदिरों, मजारों और अन्य जगहों पर ले जाया जाता था और धीरे-धीरे उन्हें इस्लाम की ओर प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी.
धमकी, पैसे और धर्मांतरण का दबाव
पुलिस का आरोप है कि कथित तौर पर यौन शोषण के बाद महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो सुरक्षित रखे जाते थे. बाद में इन्हीं के जरिए उनसे पैसे की मांग की जाती थी. पैसे न देने पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था. डर के कारण कुछ महिलाओं ने पैसे दिए, जबकि कुछ का धर्मांतरण कराया गया.
एसएसपी सोमेन वर्मा के मुताबिक मोबाइल फोल्डर मिलने के बाद पूरे सबूत सामने आ गए. महिलाओं को घुमाने-फिराने में इस्तेमाल की गई गाड़ियां भी बरामद की गई हैं. स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने भी जिमों की गतिविधियों पर पहले से सवाल उठाने की बात कही है. पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है.
आशीष श्रीवास्तव