उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गरीबी पर बात करते हुए भावुक हो गए और रोने लगे. मंच से भाषण के दौरान उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया और कहा कि बचपन में उनके पास साधनों की भारी कमी थी.
गरीबी पर बात करते हुए भावुक हुए डिप्टी CM बृजेश पाठक
यह कार्यक्रम मेरठ के बच्चा पार्क स्थित पीएल शर्मा स्मारक सभागार में सुभाष चंद्र बोस की जयंती के पूर्व दिवस पर आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान हुआ, जिसमें डिप्टी सीएम मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे. भाषण के दौरान उन्होंने कहा, 'चप्पल होता था तो जूता नहीं होता था, गर्मी में चप्पल और जाड़े में जूता मिलना मुश्किल था. जब सड़क पर किसी गरीब को दुखी देखता हूं, तो मैं भी दुखी हो जाता हूं.'
यह कहते हुए वे भावुक हो गए और मंच पर आंसू पोंछते नजर आए.
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें आज भी याद है कि कभी आटा गूंधते समय आटा ज्यादा हो जाता था, कभी पानी ज्यादा हो जाता था. स्टोव पर रोटी बनाकर खाने की बातें साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब लखनऊ आए थे तो उसी स्टोव पर रोटी बनाकर खाई.
डिप्टी सीएम ने यह भी कहा, 'मैं अपने आप को इस लायक नहीं समझता कि जहां मैं आज हूं, उस पद के योग्य हूं. मैं उस गरीब आदमी को अपना समझता हूं, जिस मुसीबत में मैं पला-बढ़ा हूं.'
‘मैं खुद को डिप्टी सीएम लायक नहीं समझता’
उन्होंने डॉक्टर हरिओम पवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें पिता और अभिभावक की तरह माना. साथ ही डॉक्टर पवार की ओर देखकर कहा कि उन्होंने मां भारती के तिरंगे को दुनिया में पहुंचाया है, इसलिए वो उनका सम्मान करते हैं.
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ने राजनीति से जुड़े सवालों पर भी जवाब दिए. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगते हैं और अगर वह ऐसा नहीं करें तो प्रधान का चुनाव भी नहीं जीत सकते.
उस्मान चौधरी