UP News: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मकर संक्रांति पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. आज गुरुवार को आधी रात से ही गंगा और संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया. प्रशासन के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक 36 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम और गंगा में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया. अधिकारियों का अनुमान है कि मकर संक्रांति पर शाम तक स्नान करने वालों की संख्या एक करोड़ के आंकड़े को पार कर सकती है.
एजेंसी के अनुसार, माघ मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि स्नान देर रात 12 बजे से ही शुरू हो गया था. सुबह होते-होते घाटों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के जयघोष के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए.
स्थानीय निवासी गौरी ओझा ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें हर साल संगम में स्नान का अवसर मिलता है. उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने से इस स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है. उन्होंने वाराणसी से विशेष पात्र में जल लाने और संगम का जल भगवान शिव को अर्पित करने की बात भी कही. साथ ही महिलाओं के लिए घाटों पर बदली सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि अब चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे पहले की तुलना में काफी सहूलियत हुई है.
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वहीं प्रयागराज की ही रहने वाली प्रीति ने संगम स्नान के अनुभव को अद्भुत बताते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाओं की प्रशंसा की. हैदराबाद से अपने परिवार के साथ आए एक श्रद्धालु ने साफ-सफाई, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सराहनीय बताया और कहा कि वह ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने आए हैं.
मकर संक्रांति के महत्व को बताते हुए स्थानीय पुजारी रविशंकर मिश्रा ने कहा कि यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है और इस दौरान सूर्य उपासना व गायत्री मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है.
प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जहां सात सेक्टर बनाए गए हैं. 25 हजार से अधिक टॉयलेट, 3,500 से ज्यादा सफाईकर्मी, टेंट सिटी, ध्यान-योग सुविधाएं, बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था की गई है. वहीं माघ मेला के एसपी नीरज पांडेय ने बताया कि 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में तैनात हैं. मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में आस्था, व्यवस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला.
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