लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल को लेकर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद गहराता जा रहा है. पासी समाज के लोगों ने जुमे की नमाज के दिन किला परिसर में नमाज पढ़े जाने का कड़ा विरोध करते हुए प्रदर्शन का ऐलान किया है. उनका दावा है कि वर्तमान में मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में जानी जाने वाली यह संरचना दरअसल 11वीं सदी के नागवंशी शासक राजा कंस का किला है. आज बाहर से काफी तादात में लोगों के नमाज पढ़ने आने के इनपुट मिलने पर प्रशासन ने एहतियातन बैरिकेडिंग करके भारी पुलिस बल तैनात किया है.
पासी समाज का दावा और सीएम को पत्र
पासी समाज का कहना है कि यह स्थान 11वीं सदी का ऐतिहासिक किला है, जिसके भीतर प्राचीन काल से भगवान महादेव का मंदिर हुआ करता था और वहां पूजा होती थी. समाज का आरोप है कि उनकी इस ऐतिहासिक विरासत को गलत तरीके से बदलकर उस पर कब्जा कर लिया गया है. इस गंभीर मुद्दे को लेकर पासी समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है.
लखनऊ गजेटियर और सालार मसूद गाजी का इतिहास
अपने दावे को मजबूत करने के लिए पासी समाज ने लखनऊ के पुराने गजेटियर का हवाला दिया है. इसके अनुसार काकोरी और मलिहाबाद का इलाका 11वीं सदी में राजपासी राजा कंस के प्रभाव में था. जब विदेशी आक्रांता सालार मसूद गाजी इस क्षेत्र में आया, तब वीर योद्धा राजा कंस ने उसका कड़ा मुकाबला किया था और इसी इलाके में उसके दो सेनापतियों को मार गिराया था.
संभावित तनाव को देख अलर्ट पर प्रशासन
घटनास्थल को कब्रिस्तान और मस्जिद के रूप में प्रस्तुत किए जाने से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. संभावित टकराव और कानून व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. पुलिस बल लगातार इलाके की निगरानी कर रहा है. संवेदनशील मामला होने के कारण स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक और कानूनी जांच की मांग भी उठ रही है.
आशीष श्रीवास्तव