अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. एक तरफ जहां सीमा पर जंग थमने का नाम नहीं ले रही, वहीं दूसरी तरफ इस वार की वजह से भारत में एलपीजी (LPG) संकट का दौर शुरू हो गया है. आलम यह है कि अब दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे बड़े शहरों में काम करने वाले यूपी-बिहार के लोग गैस की किल्लत और महंगाई के चलते अपने घरों को वापस लौट रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर जब 'आज तक' की टीम ने दिल्ली, मुंबई और गुजरात से बिहार की तरफ जा रहे लोगों से बातचीत की, तो उन्होंने एलपीजी क्राइसिस की जो कहानी बयां की, वह चौंकाने वाली है.
500 का सिलेंडर 1500 में, होटलों में खाना हुआ दूभर
दिल्ली-हावड़ा रेल रूट के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर जब 'पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस' रुकी, तो हमारी मुलाकात बिहार के पूर्णिया के रहने वाले मिथुन कुमार से हुई. मिथुन गुजरात के हजीरा में एक प्लांट के अंदर सरिया शटरिंग का काम करते हैं.
मिथुन ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया, 'मैं गुजरात से लौट रहा हूं, वहां गैस का भारी संकट है. जो गैस पहले 500 रुपये में मिल जाती थी, अब उसके लिए सीधे 1500 रुपये मांगे जा रहे हैं. हालात ये हैं कि लगभग सभी लोग चूल्हे पर खाना पका रहे हैं. गैस की इसी किल्लत और खाना बनाने में हो रही दिक्कतों की वजह से हम लोग घर वापस जा रहे हैं.' मिथुन ने यह भी साफ किया कि जब हालात सुधरेंगे और गैस मिलने लगेगी, तभी वे काम पर लौटेंगे. उनके मुताबिक, होटलों में भी महंगाई का असर है, जो खाना पहले 60 रुपये में मिलता था, अब उसकी कीमत 150 रुपये तक पहुंच गई है और कई होटल तो बंद भी हो चुके हैं.
दिल्ली में 450 रुपये किलो बिक रही गैस
इसी ट्रेन में हमारी मुलाकात मोतिहारी के रहने वाले छात्र शाहिद आलम से हुई, जो दिल्ली के न्यू अशोक नगर में रहकर पढ़ाई करते हैं. शाहिद ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि 'गैस न मिलने की वजह से हम लोग खाना नहीं बना पा रहे थे. पहले होटलों पर निर्भर थे, लेकिन गैस संकट की वजह से अब होटल भी बंद होने लगे हैं. जहां हम रहते हैं, वहां 1 किलो गैस की कीमत 450 रुपये तक पहुंच गई है. सरकारी स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है और बाजार में जबरदस्त ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. यही वजह है कि मेरे बहुत से साथी पढ़ाई छोड़ वापस गांव लौट रहे हैं.'
वहीं, दिल्ली के नरेला में मजदूरी करने वाले सुपौल के सत्यनारायण ने बताया कि 1 किलो गैस के 350 रुपये देने को तैयार होने के बावजूद गैस नहीं मिल रही थी. उनके साथ करीब 50-60 लोग काम छोड़कर अपने गांव वापस जा रहे हैं. सत्यनारायण के मुताबिक, शहरों में अब जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिल रही और जो मिल रही है, उसकी कीमत आसमान छू रही है. बेगूसराय के रहने वाले प्रवीण ने भी अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि गैस की किल्लत और इस महंगाई की वजह से अब परदेस में मजदूरी करना बस के बाहर हो गया है.
मुंबई में मकान मालिक ने लकड़ी जलाने से किया मना, 20 साथियों के साथ लौटे मुन्ना
इसके बाद हमने जब मुंबई से आसनसोल जाने वाली ट्रेन में यात्रियों से बात की. भागलपुर के मुन्ना मंडल ने बताया कि गैस नहीं मिलने की वजह से वे अपने 20 साथियों के साथ वापस जा रहे हैं. मुन्ना ने दर्द साझा करते हुए कहा कि 'हम लोग किराए के मकान में रहते हैं. जब गैस नहीं मिली तो लकड़ी पर खाना बनाने की सोची, लेकिन मकान मालिक ने मना कर दिया कि मकान खराब हो जाएगा. अब बिना खाने के काम कैसे करें? जब वहां सहूलियत मिलेगी, तभी वापस जाएंगे.'
इसी ट्रेन में मुंबई की एक कंपनी में बेलदार का काम करने वाले विकास कुमार (कटिहार) और गाड़ी चलाने वाले मुन्ना कुमार ने भी बताया कि गैस की प्रॉब्लम की वजह से ड्यूटी जाना और खाना बनाना मुमकिन नहीं रह गया है. सरकार वहां कोई व्यवस्था नहीं कर पा रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें वापस जाने का फैसला करना पड़ा.
कोलकाता में 1100 का सिलेंडर 3000 के पार
जब 'ब्रह्मपुत्र मेल' जंक्शन पर आई, तो दिल्ली में मिस्त्री का काम करने वाले हसन (कोलकाता) ने बताया कि हालात बेकाबू हैं. हसन के मुताबिक, 'सब कुछ महंगा हो गया है. जो गैस 1100 रुपये में मिलती थी, वह अब 3000 रुपये के ऊपर मिल रही है. हम हीटर पर खाना बना रहे थे, लेकिन यह कब तक चलेगा? जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, हम वापस नहीं जाएंगे.' हसन के साथ भी करीब 20 लोग वापस लौट रहे हैं.
उदय गुप्ता