उत्तर प्रदेश में लखनऊ के केजीएमयू महिला रेजीडेंट डॉक्टर धर्मांतरण मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. धर्मांतरण का गवाह बनने वाले शारिक खान को लेकर जांच में सामने आया है कि वो गवाह ही नहीं था, बल्कि धर्मांतरण के बाद महिलाओं के नए नाम पर जाली दस्तावेज भी तैयार करवाता था.
आरोपी डॉ. रमीज के बेहद करीबी और धर्मांतरण का गवाह बनने वाले शारिक खान की शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को कोर्ट में पेशी थी. इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
इस मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि धर्मांतरण कराने वाला काजी उम्र और बीमारी का हवाला देकर अब तक गिरफ्तार नहीं हो पाया है.
फर्जी कागजात बनवाता था शारिक खान
पुलिस जांच में पता चला है कि धर्मांतरण के बाद पीड़िताओं के नाम बदले जाते थे और उन्हीं नामों से फर्जी कागजात तैयार कराए जाते थे. हालांकि शारिक ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि अब तक कितनी महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया है.
फॉरेंसिक जांच से होंगे अहम खुलासे
शारिक के मोबाइल फोन से पुलिस को कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं. हालांकि आरोपी ने काफी डेटा डिलीट कर दिया था, जिसे अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस का मानना है कि डाटा रिकवरी के बाद पूरे गिरोह की परतें खुल सकती हैं.
यह भी पढ़ें: केजीएमयू धर्मांतरण मामले में कार्रवाई तेज, आरोपी डॉ. रमीज पर University लेगी ये एक्शन
विदेश भागने की फिराक में था शारिक
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के डर से शारिक दिल्ली, बरेली, पीलीभीत और उत्तराखंड जैसे कई ठिकानों पर छिपता फिर रहा था. शारिक विदेश भागने की फिराक में था और उसने पासपोर्ट भी बनवा लिया था. उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. पूछताछ के दौरान उसने डॉ. रमीज के कहने पर जाली निकाहनामे बनवाने का जुर्म कबूल किया.
आशीष श्रीवास्तव