लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में आरोपी डॉक्टर रमीज की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ पुलिस और जांच एजेंसियों को अहम सुराग हाथ लगे हैं. पुलिस के मुताबिक, रमीज की गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक नया मोबाइल फोन बरामद किया गया है. इस मोबाइल में कई ऐसी जानकारियां मिली हैं, जो जांच के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं.
इसके अलावा रमीज का पुराना मोबाइल फोन भी पुलिस के हाथ लगा है. जांच में सामने आया है कि पुराने फोन से डेटा डिलीट किया गया था. अब उस डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कराने के लिए फॉरेंसिक जांच में भेजा गया है, ताकि पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें.
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फरारी के दौरान PFI से संपर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरारी के दौरान रमीज का संपर्क प्रतिबंधित संगठन PFI के कई पदाधिकारियों से लगातार बना हुआ था. मोबाइल डेटा से यह भी पता चला है कि रमीज ने PFI से कानूनी मदद लेने की कोशिश की थी. इस संबंध में चैट और कॉल रिकॉर्ड जैसे सबूत भी बरामद हुए हैं.
जांच में यह भी सामने आया है कि रमीज के पिता सलीमुद्दीन के PFI से पुराने और गहरे संबंध रहे हैं. बताया जा रहा है कि PFI के कई पदाधिकारी सलीमुद्दीन के करीबी दोस्त हैं और संगठन की ओर से सलीमुद्दीन को दो बार सम्मानित भी किया जा चुका है.
KGMU में मुलाकातों का दावा
पूछताछ के दौरान रमीज ने बताया कि PFI से जुड़े कई लोग KGMU परिसर में उससे कई बार मुलाकात कर चुके थे. जांच एजेंसियों का मानना है कि पुराने मोबाइल का डेटा रिकवर होने के बाद PFI से जुड़े पूरे नेटवर्क और आपसी संबंधों की परतें खुल सकती हैं.
इसी बीच आरोपी की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ पुलिस ने KGMU से जुड़ी एक सीक्रेट रिपोर्ट जांच एजेंसियों को भेजी है. सूत्रों के मुताबिक, जांच में दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर को रडार पर रखा गया है.
महिला स्टाफ और डॉक्टर पर गंभीर आरोप
आरोप है कि ये दोनों महिला स्टाफ और एक डॉक्टर मिलकर धर्मांतरण का रैकेट चला रहे थे. बताया जा रहा है कि इसको लेकर KGMU प्रशासन से महिलाओं द्वारा कई बार शिकायतें भी की गई थीं, लेकिन आरोप है कि KGMU प्रशासन ने इन शिकायतों को अनसुना कर दिया.
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित लव जिहाद नेटवर्क का सरगना कौन है और इन्हें किसका संरक्षण मिल रहा था. इस पूरे मामले में KGMU के जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं.
सरकार बड़े एक्शन की तैयारी में
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट अभी आना बाकी है, लेकिन जांच एजेंसी की इन्वेस्टिगेशन में KGMU के कई विभागाध्यक्षों (HOD) की संलिप्तता सामने आने की बात कही जा रही है.
KGMU धर्मांतरण केस में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामला और गंभीर होता जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस पूरे प्रकरण को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है.
आशीष श्रीवास्तव