बुलडोजर एक्शन के बीच दिखा मणिकर्णिका का भविष्य... तस्वीरों में देखिए कैसा होगा काशी का 'महाश्मशान'

काशी के मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों कायाकल्प का काम चल रहा है, जिसको लेकर तोड़फोड़ और मूर्तियों के नुकसान के आरोपों पर सियासी घमासान मचा हुआ है. सरकार का कहना है कि घाट को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ नए सिरे से विकसित किया जा रहा है. इसके लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और बड़ा प्लेटफार्म बनाया जाएगा ताकि एक साथ अंतिम संस्कार की बेहतर व्यवस्था हो सके.

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मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण के लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. (Photo: Getty Images) मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण के लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. (Photo: Getty Images)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:07 PM IST

काशी में इन दिनों मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प का काम चल रहा है. निर्माण कार्य में हो रही तोड़फोड़ को लेकर हंगामा भी बरपा हुआ है. कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है. इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे. उन्होंने कहा कि 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे हैं'. इस बीच यूपी सरकार ने मणिकर्णिका के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें जारी की हैं जिनमें इस 'महाश्मशान' के भविष्य के स्वरूप को देखा जा सकता है.

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मणिकर्णिका घाट का प्लेटफार्म काफी बड़ा बनाया जाएगा ताकि एक साथ किए जाने वाले अंतिम संस्कार को लेकर विश्व स्तरीय सुविधाएं वहां मिल सकें. सरकार ने मणिकर्णिका घाट को नए सिरे से बनाने की तैयारी की है. इस प्रोजेक्ट की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अंतिम संस्कार के लिए बना यह घाट कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा. 

35 करोड़ की राशि आवंटित

फिलहाल मणिकर्णिका घाट पहुंचने के लिए तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है. यहां दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं बेहद जर्जर और गंदगी से भरी पड़ी थीं. लेकिन पीएम मोदी ने कुछ समय पहले काशी कॉरिडोर से सटे मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की परियोजना को अपने विजन काशी में शामिल किया था. पहले ही प्रथम चरण के लिए 35 करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी है और जल्द ही मणिकर्णिका घाट नए तरीके से बनकर सामने आएगा. 

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मणिकर्णिका पर कभी नहीं बुझती चिता की आग

मणिकर्णिका घाट के बारे में यह कहा जाता है कि यहां 24 घंटे 365 दिन कभी चिता की आग नहीं बुझती. यहां जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म कॉरिडोर तक आती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में अब जब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है, इसके कायाकल्प की जरूरत भी महसूस की जा रही थी. हालांकि यहां एक चबूतरे के विध्वंस के बाद हंगामा मच गया क्योंकि वहां कई मूर्तियां थीं. सरकार अब नए तरीके से इसे बना रही है.

'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे'

शनिवार को वाराणसी के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. जब काशी विश्वनाथ धाम परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब भी इसके खिलाफ साजिशें रची गई थीं. आज वही लोग टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, जबकि इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि काशी की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे देश और दुनिया के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इसी सोच के तहत बीते वर्षों में काशी में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं.

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कांग्रेस ने साधा निशाना

यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, 'देश, काशी और हिंदू धर्म की विरासत को मोदी-योगी सरकार ने ध्वस्त कर दिया है. कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया गया और काशी विश्वनाथ जी के कई मंदिर तोड़े गए. वट वृक्ष को खत्म कर दिया गया. कसौटी के पत्थर पर लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर को तोड़ दिया है. 2023 में मणिकर्णिका घाट का स्वनीकरण की जगह उसे विध्वंस कर दिया गया.'

'ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है'

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं. विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है. इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं. काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए.'

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