कानपुर की वीआईपी रोड पर हुई एक तेज रफ्तार टक्कर ने सिर्फ ट्रैफिक हादसे की खबर नहीं बनाई, बल्कि रसूख, रफ्तार और विरोधाभासी दावों के बीच उलझी एक ऐसी कहानी सामने लाई, जिसने पूरे शहर को हिला दिया. 12 करोड़ रुपये कीमत वाली लैंबॉर्गिनी, हाई-प्रोफाइल कारोबारी परिवार, वायरल वीडियो, नंबर प्लेट हटाने की कोशिश और 'कौन चला रहा था कार?' जैसे सवालों के बीच आखिरकार पुलिस ने मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा को पकड़ लिया.
इसके बाद पुलिस ने शिवम को कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने ज्यूडिशियल रिमांड के लिए पुलिस की अर्जी खारिज कर दी. शिवम मिश्रा को कोर्ट में पेश किया गया, जहां शिवम ने खुद अपना केस लड़ा. कोर्ट ने शिवम को पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कोर्टरूम में पुलिस जांच नोटिस पर भी सवाल उठाए. अब शिवम को 20000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा किया जाएगा.
दरअसल, घटना रविवार को कानपुर के पॉश ग्वालटोली इलाके की वीआईपी रोड पर हुई थी. एक लैंबॉर्गिनी सुपरकार तेज रफ्तार में बेकाबू हो गई. कार ने पहले एक ई-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर एक बाइक सवार और एक राहगीर को अपनी चपेट में लिया. इसके बाद कार सड़क किनारे खंभे से जा टकराई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास अफरा-तफरी मच गई.
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हादसे में कई लोग घायल हुए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. मौके पर पहुंची पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. शुरू में इसे एक हाई-स्पीड एक्सीडेंट माना जा रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में मामला पेचीदा होता चला गया.
12 करोड़ की कार और बड़ा कारोबारी कनेक्शन
जांच में सामने आया कि हादसे में शामिल लैंबॉर्गिनी एक बड़े कारोबारी परिवार से जुड़ी है. यह सुपरकार बंशीधर टोबैको ग्रुप से जुड़े उद्योगपति परिवार की बताई गई. पुलिस का कहना था कि कार शिवम मिश्रा चला रहा था, जो कारोबारी केके मिश्रा का बेटा और ग्रुप से जुड़ी कंपनी में डायरेक्टर है.
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हाई-प्रोफाइल कनेक्शन सामने आते ही मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया. सोशल मीडिया पर कार, परिवार और ड्राइवर की पहचान को लेकर बहस शुरू हो गई.
वीडियो ने बदली केस की दिशा
हादसे के बाद सामने आए वीडियो ने जांच की दिशा बदल दी. वीडियो में दिखा कि दुर्घटना के तुरंत बाद कुछ बाउंसर कार के आसपास मौजूद हैं. एक व्यक्ति नंबर प्लेट हटाने की कोशिश कर रहा है. लोगों का कहना था कि वाहन की पहचान छिपाने के लिए ऐसा किया जा रहा था. एक अन्य वीडियो में कार के अंदर ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा को देखा गया.
ड्राइवर या शिवम? बयानों में विरोधाभास
मामले में नया मोड़ तब आया, जब शिवम मिश्रा के पिता और वकील की ओर से दावा किया गया कि कार शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर चला रहा था. कोर्ट में मोहन नाम के व्यक्ति का हलफनामा भी पेश किया गया, जिसमें उसने खुद को ड्राइवर बताया.
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वहीं इसके बाद मोहन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वही कार चला रहा था और हादसे के समय शिवम बगल की सीट पर थे. उसका दावा था कि अचानक तबीयत बिगड़ने से शिवम उसकी तरफ गिर पड़े, जिससे बैलेंस बिगड़ा और हादसा हो गया. हालांकि पुलिस का कहना था कि शुरुआती साक्ष्य और वीडियो फुटेज शिवम मिश्रा के ड्राइविंग सीट पर होने की ओर इशारा करते हैं.
पुलिस एक्शन और दबिश
मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने जांच तेज कर दी. इस हादसे के बाद संबंधित थाना क्षेत्र के प्रभारी इंस्पेक्टर को लापरवाही के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया गया था. इस मामले में केस दर्ज कर पुलिस ने छानबीन शुरू की.
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इस केस में जब शिवम मिश्रा का नाम जुड़ा तो पुलिस शिवम मिश्रा के घर भी पहुंची, लेकिन उस समय घर का दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस को वापस लौटना पड़ा. एक तरफ बचाव पक्ष के दावे हैं, दूसरी तरफ पुलिस के सबूत और डिजिटल फुटेज. अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर है.
कौन है शिवम मिश्रा?
कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसे का आरोपी शिवम मिश्रा अरबपति फैमिली से ताल्लुक रखता है. उसकी करीब 90 साल पुरानी इंडस्ट्रियल विरासत है. शिवम, शहर के चर्चित उद्योगपति केके मिश्रा का बेटा है और बंशीधर टोबैको ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में डायरेक्टर पद पर जिम्मेदारी निभाता है. यह ग्रुप पान मसाला और तंबाकू उद्योग की सप्लाई चेन से जुड़ा है, जिसका कारोबारी नेटवर्क कई राज्यों तक फैला है.
कॉर्पोरेट प्रोफाइल के साथ-साथ शिवम मिश्रा अपनी हाई-एंड लाइफस्टाइल और सुपरकार कलेक्शन को लेकर भी चर्चा में रहा है. उसके पास लैंबॉर्गिनी समेत कई लग्जरी कारें और प्रीमियम घड़ियों का कलेक्शन होने की बात पहले भी सामने आ चुकी है.
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