एक के बाद दूसरे बेटे को भी खा गया जुआ, शराब और कर्ज...जान देने वाले युवक के पिता का दर्द

झांसी में जुआ, शराब और अवैध सूदखोरी की मार ने एक बार फिर एक परिवार को तबाह कर दिया. कर्ज के बोझ और सूदखोरों की प्रताड़ना से टूटे 27 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. दर्दनाक पहलू यह है कि इसी परिवार ने पांच साल पहले भी इसी वजह से अपना एक बेटा खो दिया था.

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एक- एक कर दो बेटों को खा गया कर्ज, जान देने वाले युवक के पिता का दर्द (Photo: ITG) एक- एक कर दो बेटों को खा गया कर्ज, जान देने वाले युवक के पिता का दर्द (Photo: ITG)

अजय झा

  • झांसी,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

उत्तर प्रदेश के झांसी में जुआ और अवैध सूदखोरी का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है. जुए में लगातार हार, ऊंचे ब्याज पर लिया गया कर्ज और सूदखोरों की प्रताड़ना से टूट चुके एक युवक ने आत्महत्या कर ली. यह त्रासदी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस सामाजिक बीमारी की कहानी है, जिसमें कर्ज, जुआ और शराब मिलकर पूरे परिवार को तबाह कर देते हैं. दर्दनाक बात यह है कि इसी परिवार ने पांच साल पहले भी अपना एक बेटा बिल्कुल इसी कारण खो दिया था.

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जनपद के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के करारी में बुधवार को एक 27 साल के युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतक की पहचान छोटूलाल उर्फ छोटू पुत्र रामदास अहिरवार के रूप में हुई है. घटना के बाद परिजनों ने उसे फंदे से उतारकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

सूदखोर लगातार मांग रहे थे पैसे  

मृतक के पिता रामदास अहिरवार ने बताया कि छोटू मजदूरी करता था, लेकिन जुआ और शराब की लत में पड़कर उसने कई लोगों से कर्ज ले लिया था. जुआ खिलाने वाले और सूदखोर लगातार उससे पैसे की मांग कर रहे थे. कर्ज की रकम लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच गई थी, जिसे वह चुका पाने में असमर्थ था. रामदास के अनुसार, सूदखोर युवक पर मानसिक दबाव बनाते थे और कई बार मारपीट भी करते थे. उन्होंने कई बार हाथ जोड़कर लोगों से अपने बेटे को पैसे न देने की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद उसे कर्ज मिलता रहा. अत्यधिक ब्याज और रोजाना की वसूली ने छोटू को पूरी तरह तोड़ दिया.

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घर के अंदर लगा ली खुद को फांसी

पिता ने बताया कि छोटू पिछले दो-तीन दिनों से घर छोड़कर भाग जाने की बात कह रहा था. उसने पुलिस में शिकायत करने का सुझाव भी दिया, लेकिन उम्र और हालात के डर से वे थाने-कचहरी के चक्कर लगाने से बचते रहे. इसी मानसिक तनाव के बीच बुधवार को छोटू ने घर के अंदर फांसी लगाकर जान दे दी.

परिजनों के मुताबिक, जुआ खेलने के लिए पैसे देने वाले लोग 10 से 20 प्रतिशत मासिक ब्याज वसूलते थे, जो रोजाना करीब 500 रुपये तक बैठता था. इस तरह का ब्याज किसी भी मजदूर के लिए चुकाना लगभग असंभव होता है. रामदास ने इसे ऐसा ब्याज बताया, जिसमें आदमी की जान निकल जाए.

पहले भी छिन चुका है एक बेटा

इस परिवार पर दुखों का पहाड़ पहले भी टूट चुका है. रामदास के बड़े बेटे पातीराम की करीब पांच साल पहले लॉकडाउन के दौरान ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी. वह भी जुआ और शराब की लत में था और भारी कर्ज से परेशान था. बेटे की मौत के बाद सूदखोरों के दबाव में रामदास ने अपनी तीन एकड़ खेती की जमीन 15 लाख रुपये में बेचकर पूरा कर्ज चुकाया था. इसके बावजूद परिवार को चैन नसीब नहीं हुआ.

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पीछे रह गया रोता हुआ परिवार

छोटू की शादी हो चुकी थी. उसके तीन छोटे बच्चे हैं- चार साल की परी, तीन साल की चाहत और चार महीने का बेटा कृष्णा. पत्नी सविता का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के चार बेटों में अब दो ही जीवित बचे हैं. घटना की सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

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