बीएसएफ से ट्रेनिंग, सूंघने की खूबी और दस साल की सर्विस... रिटायर हुए ट्रैकर डॉग 'तूफान' की कहानी

झांसी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जांबाज ट्रैकर डॉग 'तूफान' को 10 वर्षों की सराहनीय सेवा के बाद भावभीनी विदाई दी गई. जर्मन शेफर्ड नस्ल के इस प्रशिक्षित स्वान ने कई चोरी और सुरक्षा से जुड़े मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई. रिटायरमेंट समारोह में अधिकारियों और जवानों ने उसे सम्मानित किया और बेहतर देखभाल के लिए संस्था के सुपुर्द किया.

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दस साल की सेवा के बाद रिटायर हुआ ट्रैकर डॉग. (Photo: ITG) दस साल की सेवा के बाद रिटायर हुआ ट्रैकर डॉग. (Photo: ITG)

अजय झा

  • झांसी,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:01 AM IST

झांसी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के लिए यह एक भावुक और गर्व भरा पल था, जब फोर्स के जांबाज ट्रैकर डॉग 'तूफान' को 10 साल की सर्विस के बाद सम्मानपूर्वक सेवामुक्त किया गया. डॉग स्क्वॉड के इस अहम सदस्य ने अपने पूरे कार्यकाल में कई आपराधिक मामलों की जांच में निर्णायक भूमिका निभाई. चोरी व अन्य वारदातों के खुलासे में पुलिस की मदद की. रिटायरमेंट के मौके पर आरपीएफ परिसर में विशेष फेयरवेल समारोह आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और जवानों ने तूफान को माला पहनाकर सम्मानित किया.

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जर्मन शेफर्ड नस्ल का प्रशिक्षित ट्रैकर डॉग तूफान साल 2016 में आरपीएफ झांसी से जुड़ा था. कड़ी ट्रेनिंग और तेज सूंघने की क्षमता के चलते वह जल्द ही डॉग स्क्वॉड का भरोसेमंद हिस्सा बन गया. वर्ष 2026 में अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बाद उसे विधिवत सेवानिवृत्त किया गया. समारोह के दौरान मौजूद अधिकारियों ने उसके योगदान को याद करते हुए कहा कि तूफान ने कई जटिल मामलों में जांच को सही दिशा देने का काम किया.

आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त कृष्णानंद तिवारी ने बताया कि तूफान को बीएसएफ टेकनपुर से विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया था. उसकी पृष्ठभूमि भी मजबूत रही. उसकी माता का नाम सायरा और पिता का नाम रुस्तम था, जो प्रशिक्षित डॉग यूनिट का हिस्सा रहे. टेकनपुर में हाई-लेवल ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उसे झांसी आरपीएफ में ट्रैकर डॉग के रूप में तैनात किया गया. यहां उसने लगातार सक्रिय ड्यूटी निभाई.

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तूफान की सबसे बड़ी खासियत उसकी ट्रैकिंग क्षमता रही. वह गंध के आधार पर अपराधियों के मूवमेंट को ट्रैक करने और चोरी हुए सामान तक पहुंचने में बेहद सक्षम था. अधिकारियों के मुताबिक, वह यह पहचानने में भी मदद करता था कि किसी वस्तु को किन-किन लोगों ने छुआ है. कई मामलों में उसकी यह दक्षता केस सुलझाने में निर्णायक साबित हुई.

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करीब चार-पांच साल पहले ललितपुर में बैटरी चोरी का एक मामला सामने आया था, जिसमें तूफान की भूमिका खास रही. घटना के बाद मौके पर पहुंची टीम के साथ तूफान ने गंध के आधार पर दिशा पकड़ी और जांच टीम को संदिग्ध स्थान तक पहुंचाया. नतीजतन चोरी गया सामान बरामद हुआ और आरोपियों तक पहुंचने में भी सफलता मिली. इसी तरह सिग्नल उपकरण से जुड़े एक अन्य केस में भी उसकी सूंघने और पहचानने की क्षमता ने जांच को नई दिशा दी.

दस वर्षों तक लगातार ड्यूटी के दौरान तूफान ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान दिया. आरपीएफ के जवानों का कहना है कि डॉग स्क्वॉड सिर्फ एक यूनिट नहीं, बल्कि टीम का भावनात्मक हिस्सा होता है. लंबे समय तक साथ काम करने से तूफान से सभी का गहरा जुड़ाव हो गया था. ऑपरेशन, सर्च और ट्रैकिंग के दौरान उसकी सक्रियता और अनुशासन काबिले तारीफ रहा.

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रिटायरमेंट समारोह को खास बनाने के लिए आरपीएफ परिसर में छोटा, लेकिन गरिमापूर्ण कार्यक्रम रखा गया. इस दौरान अधिकारियों ने उसे फूल-माला पहनाकर सम्मान दिया. डॉग कैनल के अन्य स्वान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. सभी के लिए विशेष भोज का इंतजाम किया गया. माहौल भावुक जरूर था, लेकिन उसमें गर्व की भावना भी थी.

अब आगरा की संस्था करेगी 'तूफान' की देखरेख

अधिकारियों ने बताया कि सेवामुक्ति के बाद तूफान की देखभाल और बेहतर जीवन के लिए उसे आगरा स्थित एक संस्था को सुपुर्द किया गया है, जहां उसकी नियमित स्वास्थ्य जांच और देखरेख की व्यवस्था रहेगी. आरपीएफ झांसी की टीम ने उसके स्वस्थ और लंबी उम्र की कामना करते हुए विदाई दी.

आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि ट्रैकर डॉग्स रेलवे सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा हैं. उनकी मदद से कई बार ऐसे सुराग मिल जाते हैं, जो सामान्य जांच में संभव नहीं होते. तूफान जैसे प्रशिक्षित और समर्पित स्वान यह साबित करते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. झांसी आरपीएफ के इतिहास में तूफान का नाम एक बहादुर और भरोसेमंद ट्रैकर डॉग के रूप में याद रखा जाएगा.

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