लौटकर इमरान मसूद फिर कांग्रेस में आ रहे... 'INDIA' गठबंधन में कैसे होंगे एडजस्ट?

इमरान मसूद लौटकर फिर से कांग्रेस में आ रहे हैं. पार्टी में इमरान की वापसी का मंच सज चुका है, तारीख निर्धारित हो गई है लेकिन सूबे की सियासत पिछले कुछ महीने में काफी बदल गई है. कांग्रेस और सपा एक साथ विपक्षी गठबंधन का हिस्सा हैं. ऐसे में सवाल ये भी है कि इमरान विपक्षी गठबंधन में कैसे एडजस्ट होंगे?

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इमरान मसूद (फाइल फोटो) इमरान मसूद (फाइल फोटो)

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

पूर्व विधायक इमरान मसूद को हाल ही में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. बसपा से निकाले जाने के बाद इमरान मसूद का सियासी सफर किस ओर बढ़ेगा, क्या वे वापस सपा में जाएंगे या फिर से पुरानी पार्टी यानी कांग्रेस में सियासी भविष्य की तलाश करेंगे? इसे लेकर कई दिन तक कयासों का दौर चला. अब सभी कयासों पर विराम लग चुका है. इमरान मसूद कांग्रेस में वापसी करने जा रहे हैं.

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बताया जाता है कि इमरान मसूद सात अक्टूबर को कांग्रेस में घर वापसी करेंगे. इमरान मसूद सहारनपुर के मेयर भी रहे हैं. वे रशीद काजी के परिवार से आते हैं जो सहारनपुर की सियासत में मजबूत दखल रखता है. कांग्रेस छोड़ने से पहले इमरान की गिनती प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के करीबियों में होती थी. अब, जब वे कांग्रेस में वापसी करने जा रहे हैं तो सवाल ये भी उठ रहे हैं कि पार्टी उनको कैसे एडजस्ट करेगी? इमरान मसूद विपक्षी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंडियन इंक्लूसिव अलायंस यानी I.N.D.I.A गठबंधन में कैसे एडजस्ट होंगे?

विधानसभा चुनाव में सपा ने नहीं दिया था टिकट

ये सवाल इसलिए गहरा हो जाता है क्योंकि इमरान मसूद ने 2022 के चुनाव से पहले जब कांग्रेस छोड़ी थी, समाजवादी पार्टी (सपा) ही उनका ठिकाना बनी थी. विधानसभा चुनाव में सपा ने इमरान को टिकट दिया नहीं. इमरान का जल्द ही सपा से भी मोह भंग हो गया और फिर वह साइकिल से उतर हाथी पर सवार हो गए. बसपा प्रमुख मायावती ने इमरान मसूद को बड़ा चेहरा बताया और उत्तराखंड का प्रभारी भी बना दिया.

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बसपा को उम्मीद थी कि इमरान के आने से उस शून्य की भरपाई हो जाएगी जो नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बाद उत्पन्न हो गया है लेकिन निकाय चुनाव में पार्टी को कुछ खास लाभ मिला नहीं. इमरान मसूद उस सहारनपुर में अपने परिवार के सदस्य को जिताने में भी विफल रहे जिस शहर के वह कभी मेयर हुआ करते थे.

बसपा ने भी इमरान को बैठकों में बुलाना बंद कर दिया

बसपा ये समझ गई कि मुस्लिम वोट आकर्षित करने के लिए इमरान के चेहरे में वैसा जादू नहीं है जैसा उसको लगा था. बसपा ने इमरान को पहले बैठकों में बुलाना बंद कर दिया और फिर पार्टी से भी निष्कासित कर दिया. बड़े बेआबरू होकर बसपा से निकाले गए इमरान ने आगे के सफर के लिए अपने पुराने घर को चुना है. इसके संकेत तभी मिलने लगे थे जब इमरान मसूद ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तारीफ में कसीदे पढ़ना शुरू कर दिया था.

कांग्रेस ने भी कभी पश्चिमी यूपी की सियासत में अपने बड़े चेहरे रहे इमरान को निराश नहीं किया और अब पार्टी में उनकी वापसी का दिन-समय सब तय हो चुका है. इमरान की कांग्रेस में वापसी का स्टेज सज चुका है लेकिन साथ ही शुरू हो गया है बदले हालात में उनके कद-पद को लेकर चर्चाएं भी. पार्टी छोड़ने से पहले इमरान बड़ा मुस्लिम चेहरा हुआ करते थे लेकिन उनके जाने के बाद इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस में तेजी से आगे बढ़े. इमरान कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा भी भेजा. ऐसे में इमरान के कद और पद को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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इमरान पर कांग्रेस के दिल में क्या?

सवाल कांग्रेस और सपा के एकसाथ इंडिया गठबंधन में होने की वजह से भी उठ रहे हैं. दोनों दल विपक्षी गठबंधन में शामिल हैं. कहा तो ये भी जा रहा है कि इमरान को लेकर कांग्रेस में भी भरोसे का संकट है. हालांकि, यूपी कांग्रेस इसे पार्टी के विस्तार और बढ़ते आधार से जोड़कर देख रही है. यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि इमरान मसूद पार्टी में वापसी कर रहे हैं. हम उनका स्वागत करेंगे. उन्होंने कहा कि लोगों का, नेताओं का भरोसा कांग्रेस पार्टी पर बढ़ रहा है.

इमरान मसूद को लेकर भरोसे के संकट से जुड़े सवाल पर यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा नहीं है. वे पश्चिमी यूपी का बड़ा चेहरा हैं और उनके आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी. इमरान मसूद को कांग्रेस किस तरह से एडजस्ट करेगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी ने इसे लेकर अभी कुछ तय नहीं किया है. 

क्या कहते हैं सियासी पंडित?

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर नागेंद्र पाठक ने कहा कि इंडिया गठबंधन में सपा की मौजूदगी के कारण कांग्रेस के लिए इमरान मसूद को एडजस्ट कर पाना बड़ी चुनौती होगी. इमरान निकाय चुनाव में भले ही असरदार नहीं रहे लेकिन कांग्रेस की कोशिश इमरान और इमरान (इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद) के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की होगी जिससे सबसे अधिक परेशानी सपा को ही होने वाली है. सपा इसे किस तरह लेती है और गठबंधन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, ये भी देखने वाली बात होगी. 

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देखना ये भी होगा कि सपा और अखिलेश के मुखर विरोध की सियासी राह पर दूर तक निकल चुके इमरान की कांग्रेस में वापसी के बाद इंडिया गठबंधन के दोनों अहम दल किस तरह संतुलन बनाते हैं. चर्चा ये भी है कि इमरान की सियासत का मिजाज है, उसके हिसाब से बसपा के बाद सपा और कांग्रेस, इन्हीं दो में से किसी एक पार्टी में शामिल होने का विकल्प बचा था. बीजेपी उनकी सियासत को सूट नहीं करती. सपा में वापसी की राह आसान नहीं थी.

क्या 2024 लोकसभा चुनाव में मिलेगा टिकट?

अब कहा ये भी जा रहा है कि इमरान मसूद को तलाश ऐसी पार्टी की थी जहां टिकट की गारंटी हो. बसपा ने इमरान को पार्टी से निष्कासित करते समय ये भी कहा था कि वो 2024 के चुनाव का टिकट चाहते थे. बसपा के मुताबिक निकाय चुनाव में इमरान मसूद की मांग पर जब टिकट दिया गया, तभी ये साफ कर दिया गया था कि जीत की स्थिति में ही 2024 चुनाव में टिकट के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा, हार पर नहीं.

साल 2022 के यूपी चुनाव में सपा ने इमरान को चुनाव मैदान में नहीं उतारा था. अब इमरान कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं तो क्या कांग्रेस ने उन्हें 2024 के चुनाव में सहारनपुर सीट से टिकट का आश्वासन दिया है और अगर हां तो क्या गठबंधन की स्थिति में सपा वह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार होगी? यह भी देखने वाली बात होगी.

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