ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. थाना बिसरख पुलिस ने इस कार्रवाई में तीन पुरुष और पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक यह गिरोह लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए उनकी गाढ़ी कमाई हड़प रहा था.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी बैंक दस्तावेज, पासबुक, डेबिट कार्ड, प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर से जुड़ा सामान, क्यूआर कोड और नकदी बरामद की है. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह ‘मजाबुक मजे से जीतो’ नाम के ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए ठगी करता था.
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कैसे फंसाते थे लोगों को जाल में
डीसीपी सेंट्रल नोएडा के शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रूलेट और नंबरिंग गेम जैसे खेल खिलवाते थे. शुरुआत में ग्राहकों को छोटी रकम जिताकर उनका भरोसा जीता जाता था और धीरे-धीरे उन्हें ज्यादा पैसे लगाने के लिए उकसाया जाता था.
जैसे ही कोई ग्राहक बड़ी रकम लगाता, खेल का पूरा नियंत्रण आरोपी अपने हाथ में ले लेते थे और ग्राहक को लगातार हरवाया जाता था. अगर कोई जीतकर पैसा निकालने की बात करता, तो उसे तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर टाल दिया जाता या बड़ी शर्त लगाकर भुगतान रोक दिया जाता था. ज्यादा दबाव बनाने पर ग्राहक को ब्लॉक कर दिया जाता और उसकी पूरी रकम हड़प ली जाती थी.
फर्जी सिम और बैंक खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड खरीदता था. इन्हीं सिम कार्डों के जरिए अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे. ग्राहकों से पैसे इन्हीं खातों और क्यूआर कोड के जरिए ट्रांसफर कराए जाते थे.
बरामद सिम कार्ड पहले से एक्टिव थे और इन्हें अलग-अलग राज्यों के पते दिखाकर लिया गया था. पुलिस को इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक समेत कई बैंकों के खातों की जानकारी मिली है, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों के लेनदेन में किया जा रहा था.
गौड़ सिटी में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गौड़ सिटी क्षेत्र में एक ऑफिस से ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं. सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बुधवार को गौड़ सिटी सेंटर के चौथे तल पर छापा मारा. मौके पर कई लोग मोबाइल और लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन दांव लगाते मिले.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 18 एंड्रॉयड मोबाइल, 4 लैपटॉप, 155 फर्जी सिम कार्ड, 50 से ज्यादा क्यूआर कोड, 2 कंप्यूटर मॉनिटर, 4 वाई-फाई मॉडेम, 10 डाटा शीट, 10 कॉलिंग हेडफोन और 45 हजार रुपये नकद बरामद किए.
कौन-कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में गर्व (21), अजय सिंह (25) और सोनल उर्फ अनिरुद्ध (32) शामिल हैं. वहीं गिरफ्तार महिलाओं में रुचि (20), कोमल (20), सुषमा (21), तनीषा (20) और सानिया सिंह (23) हैं. सभी आरोपी अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं और पिछले कई महीनों से इस नेटवर्क से जुड़े थे.
मुख्य आरोपी सोनल उर्फ अनिरुद्ध ने पूछताछ में बताया कि वह कॉलिंग और डाटा मैनेजमेंट संभालता था. वह ऐसे लोगों का डाटा इकट्ठा करता था जिन्होंने पहले ऑनलाइन गेम खेले हों या ऐसे विज्ञापनों में रुचि दिखाई हो. इसके बाद कॉलिंग स्टाफ उन्हें फोन कर ज्यादा कमाई का लालच देता था.
बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे थे नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक गिरोह पिछले छह महीनों से ‘ट्रेंट्रैक इनोवेटिव सॉल्यूशंस’ नाम से यह गतिविधि चला रहा था, जो न तो कहीं रजिस्टर्ड थी और न ही उसका कोई जीएसटी नंबर था. कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाकर इन्हें गेमिंग ऐप और कॉलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं, जुआ अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और खातों की भी जांच की जा रही है. प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के लेनदेन की आशंका जताई गई है. पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन गेमिंग या निवेश के नाम पर मिलने वाले लालच से बचें और ठगी होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें.
अरुण त्यागी