उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक सड़क दुर्घटना में युवराज नाम के शख्स की मौत हो गई है. यह मौत सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है. युवराज सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसायटी में रहते थे और गुरुग्राम के सेक्टर-54 में एक कंपनी में काम करते थे. जब वो अपने घर लौट रहे थे तो कोहरे बहुत था. घर के पास ही उनकी एक गाड़ी से टक्कर हो जाती है और कार पास के पानी से भरे गड्ढे (ड्रेनेज) में गिर जाती है. ड्रेनेज करीब 30 फुट गहरा था. ये हादसा 16 जनवरी की रात को क़रीब 12:30 बजे हुआ था.
अब इस मामले में जानकारी सामने आई है कि युवराज को बचाने के लिए डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने भरपूर कोशिश की थी. लेकिन, वो बचा नहीं सका.
डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बताए हादसे के दर्दनाक ब्रेकडाउन के पल
डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने दर्दनाक हादसे का जिक्र करते हुए बताया कि यह आधी रात के लगभग 1 बजे हुआ. खराब विजिबिलिटी के कारण एक कार ड्रेन में गिर गई. मोनिंदर ने बताया कि हादसे के बाद कार में फंसे युवराज की आवाज़ लगातार मदद के लिए सुनाई दे रही थी. करीब 1:45 मिनट तक युवराज पुकारता रहा, "भाई, किसी तरह बचा लो."
मोनिंदर की मानें तो मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीम मौजूद थी, लेकिन बारिश और ठंड के कारण किसी ने पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई. साथ ही पानी के नीचे लोहे की रॉड होने की भी बात कही गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन मुश्किल हो गया.
मोनिंदर लगभग 1:45 बजे मौके पर पहुंचे जब तक युवराज की मौत हो चुकी थी. उन्होंने SDRF के जवानों से खुद रेस्क्यू करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने मना कर दिया तो मोनिंदर ने खुद पानी में छलांग लगाने का फैसला किया. उन्होंने अपने कपड़े उतारे, कमर में रस्सी बांधी और करीब 50 मीटर तक तैरकर कार और युवराज की तलाश की.
हालांकि लगभग 30 मिनट तक खोजबीन करने पर भी अंधेरे और पानी की गहराई के कारण कोई सफलता नहीं मिली. मोनिंदर ने बताया कि वह आख़िरकार सुबह करीब 5:30 बजे वहां से वापस लौटे. उस वक्त तक कार बाहर नहीं निकाली गई थी और युवराज का शव भी बरामद नहीं हुआ था.
मोनिंदर ने कहा कि उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और देर के कारण एक युवा की जान चली गई.
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घटना के बारे में
ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-150 के टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के पास शुक्रवार देर रात हुए एक दर्दनाक हादसे ने इमरजेंसी सेवी की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान तब चली गई जब उनकी कार घने कोहरे के बीच नियंत्रण खो बैठी और पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई.
युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-54 में एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और शुक्रवार रात ऑफिस से घर लौट रहे थे. हादसे के बाद युवराज कार से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे और कार के ऊपर खड़े हो गए और उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को घटना की सूचना दी. पिता ने तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को खबर दी और मौके पर पहुंच गए. लेकिन आपातकालीन दलों के रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी देरी हुई.
युवराज लंबे समय तक पलटी हुई कार पर खड़े टॉर्च जलाते हुए मदद के लिए पुकारते रहे. अंधेरा, घना कोहरा और आधे अधूरे बेसमेंट की खतरनाक स्थिति ने रेस्क्यू में समस्या की बड़ी वजह बनी. पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन ठंडे पानी में उतरने से हिचकिचाईं. लगभग चार घंटे बाद, गाजियाबाद से आई NDRF टीम ने 30 फीट गहरे पानी से युवराज को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.
युवराज के परिवार और मौके पर लोगों ने सरकार और संबंधित विभागों पर समय पर मदद न पहुंचाने का आरोप लगाया है. उनका मानना है कि यदि तत्काल और बेहतर इमरजेंसी सेवा प्रबंधन होता, तो युवराज बच सकता था.
पुलिस की आई सफाई
इस मामले में जॉइंट पुलिस कमिश्नर (सीपी) राजीव नारायण मिश्रा के कहा कि जीरो विजिबिलिटी की गंभीर स्थिति में एक रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया था. इस ऑपरेशन के दौरान हुई कुछ अनियमितताओं के संबंध में पीड़ित परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच तेजी से जारी है.
जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने साफ किया कि पुलिस प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया है और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही की जा रही है.
मृत युवक की पिता के शिकायत पर पुलिस ने एक्शन लेते हुए दो बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
अरुण त्यागी / भूपेन्द्र चौधरी