गोरखपुर में जन्मदिन की पार्टी से शुरू हुआ विवाद अब एक सनसनीखेज आपराधिक कहानी में बदल चुका है. जिस युवती पर गोलीकांड और रंगदारी का आरोप है, वह इस वक्त जेल की सलाखों के पीछे है. पुलिस की शुरुआती जांच में ऐसे-ऐसे खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे शहर को चौंका दिया है. हालांकि पुलिस अधिकारी फिलहाल कैमरे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं. पुलिस के अनुसार आरोपी युवती अंशिका सिंह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ दर्ज मामले की जांच की जा रही है.
Birthday Party बनी गोलीकांड की वजह
बताया जा रहा है कि 20 जनवरी को अंशिका अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन मना रही थी, इसी दौरान एक प्राइवेट हॉस्पिटल के मैनेजर से उसका विवाद हो गया. आरोप है कि अंशिका ने पिस्टल निकालकर उसे डराने की कोशिश की. छीना-झपटी के दौरान मैनेजर के दोस्त को पेट में गोली लग गई, जिसे गंभीर हालत में एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है.
घटना के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने अंशिका और उसके साथियों को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया. गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने अंशिका का मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाला, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोबाइल में ऐसे वीडियो और कॉल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि वीडियो कॉल के जरिए लोगों को ब्लैकमेल करने की कोशिश करती थी. हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी पीड़ित की लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है.
गोरखपुर में ‘बर्थडे गर्ल’ की खौफनाक साजिश
तहरीर देने वाले विशाल मिश्रा, जो द्विवेदी चाइल्ड केयर अस्पताल में मैनेजर हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि अंशिका और उसके साथी बंटी वर्मा ने उन्हें पिस्टल दिखाकर पहले 12 हजार रुपये और बाद में 50 हजार रुपये की मांग की थी. धमकी दी गई थी कि पैसे न देने पर झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाएगा.
एसपी सिटी अभिनव त्यागी के अनुसार, अंशिका का नाम पहले भी एक वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के मामले में सामने आ चुका है. जांच में यह भी पता चला कि दिल्ली से किराए पर ली गई गाड़ी को वापस न करने और उस पर अलग-अलग राज्यों की नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल करने के आरोप भी दर्ज हैं.
पुलिस अब मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल, लेनदेन और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई पीड़ितों की शिकायत और डिजिटल साक्ष्यों पर निर्भर करेगी.
गजेंद्र त्रिपाठी