एनसीआर की जाने-माने रियल स्टेट ग्रुप सुपरटेक के चेयरमैन आरके अरोड़ा को 10 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है. ईडी ने मंगलवार को आरके अरोड़ा को गिरफ्तार किया था. बुधवार को अरोड़ा को दिल्ली की कोर्ट में पेश किया गया था, जहां सेशन जज देवेंदर कुमार जंगाला ने ईडी की सिफारिश पर उन्हें 10 दिन तक की हिरासत में भेज दिया.
दरअसल, ईडी ने अरोड़ा की 14 दिन की हिरासत की मांग करते हुए अपने आवेदन में कोर्ट से कहा था कि मामले में बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ की आवश्यकता है. अरोड़ा को तीन दौर की पूछताछ के बाद मंगलवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए हमारी राय है कि आरोपी राम किशोर अरोड़ा (आरके अरोड़ा) की कस्टडी रिमांड आवश्यक है. आरोपी राम किशोर अरोड़ा को तदनुसार 10 जुलाई, 2023 तक ईडी की हिरासत में भेजा जाता है."
कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के मुताबिक, अरोड़ा से ऐसी जगह पर पूछताछ की जानी चाहिए जहां सीसीटीवी कवरेज हो और पूछताछ के फुटेज संरक्षित हों.
सुपरटेक के खिलाफ दर्ज हैं 26 केस
बता दें कि ईडी दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा सुपरटेक लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के लिए दर्ज 26 एफआईआर से संबंधित मामले की जांच कर रही है. अरोड़ा पर कम से कम 670 घर खरीदारों से 164 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है.
80 हजार फ्लैट दे चुका है बिल्डर
गौरतलब है कि सुपरटेक लिमिटेड की स्थापना 1988 में हुई थी. बिल्डर ने अब तक लगभग 80,000 अपार्टमेंट लोगों को दिए हैं. ये सभी फ्लैट मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हैं. कंपनी वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगभग 25 परियोजनाएं विकसित कर रही है. इसे अभी 20,000 से ज्यादा ग्राहकों को पजेशन देना बाकी है.
पिछले साल ट्विट टावर किए गए थे ध्वस्त
कंपनी पिछले साल से संकट से जूझ रही है, जब अगस्त में नोएडा एक्सप्रेसवे पर स्थित इसके लगभग 100 मीटर ऊंचे ट्विन टावरों को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया था, जिसमें पाया गया था कि उनका निर्माण एमराल्ड कोर्ट परिसर में नियमों का उल्लंघन करके किया गया था. दोनों टावरों को ध्वस्त करने के लिए 3,700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था.
मुनीष पांडे