उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मकान के भीतर रखे नीले ड्रम से वर्धमान पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह का अधकटा शव बरामद हुआ. मानवेंद्र 20 फरवरी से लापता थे और उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट खुद उनके बेटे अक्षत ने दर्ज कराई थी. शुरुआती तौर पर मामला रहस्यमय गुमशुदगी का लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी ने चौंकाने वाला रूप ले लिया. दरअसल अक्षत ही अपने पिता का कातिल निकला. उसने पहले पिता की ही राइफल से उनकी हत्या की और फिर शव के टुकड़े कर घर में रखे ड्रम में भर दिए.
'रोज आती है, लगा ही नहीं कि उसके घर में लाश है'
सारे खुलासे के बाद अपनी आंखों के सामने पिता के मर्डर देखने के बावजूद भाई के डर से चुप्पी साधे बेबस बताई जा रही अक्षत की बहन को लेकर नई जानकारी सामने आयी है.दरअसल, मानवेंद्र के घर के पास रहने वाले उदयवीर सिंह की पोती मानवेंद्र की 11वीं में पढ़ रही बेटी की बहुत अच्छी दोस्त है.अजीब बात है कि घटना के बाद मानवेंद्र की बेटी हमेशा की तरह अपनी दोस्त के घर ही पढ़ाई करने जाती रही. उदयवीर के परिवार के मुताबिक, लड़की बेहद नॉर्मल दिखाई पड़ रही थी, ऐसा नहीं लग रहा था कि उसके सामने पिता की हत्या हुई है या फिर पिता के लाश के टुकड़े घर के एक ड्रम पड़े हैं. वह चुपचाप घर में आती पढ़ाई करती खाना खाती और वापस अपने घर चली जाती. उसने अपनी सहेली तक को भनक नहीं लगने दी थी.
व्हाट्सएप ग्रुप में अपडेट देता था अक्षत
इसके अलावा मानवेंद्र के पड़ोसी धर्मेंद्र सिंह ने आज तक को बताया कि जब मानवेंद्र कुछ दिन नहीं दिखाई पड़े तो उन लोगों ने व्हाट्सएप पर मानवेंद्र मिसिंग अपडेट कर एक ग्रुप बनाया. इसमें अक्षत समेत मोहल्ले वालों को ऐड किया गया. अक्षत के द्वारा ही अपने पिता के मिसिंग की सारी चीज ग्रुप में साझा की जा रही थी और मोहल्ले वाले खुद उसके साथ पुलिस थाने रिपोर्ट लिखाने गए थे. लेकिन बाद में मोहल्ले वालों ने सीसीटीवी के जरिए पता चला कि मानवेंद्र घर तो गए लेकिन वापस नहीं निकले.
पापा ने कहा था एक दिन बाद लौटेंगे
बता दें कि शुरुआत में अक्षत ने पुलिस को बताया था कि 20 फरवरी की सुबह उसके पिता ने उसे जगाकर कहा कि वे दिल्ली जा रहे हैं और अगले दिन दोपहर तक लौट आएंगे. इसके बाद उनके तीनों मोबाइल फोन बंद हो गए. पुलिस को आखिरी लोकेशन काकोरी क्षेत्र में मिली, लेकिन वहां से कोई ठोस सुराग नहीं मिला. लगातार बदलते हालात और मोबाइल बंद होने से संदेह गहराया तो पुलिस ने अक्षत से कड़ी पूछताछ शुरू की.
पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
शुरुआत में अक्षत ने दावा किया कि उसके पिता ने आत्महत्या कर ली. हालांकि, पूछताछ के दौरान उसके बयान बदलते रहे. सख्ती बढ़ने पर उसने स्वीकार किया कि 20 फरवरी की सुबह करीब साढ़े चार बजे पिता से हुए विवाद के बाद उसने लाइसेंसी बंदूक से उनके सिर पर गोली चला दी. गोली लगते ही मानवेंद्र की मौके पर ही मृत्यु हो गई. इस पूरी घटना की गवाह अक्षत की नाबालिग बहन भी थी. मालूम हुआ कि उसने अपने सामने पिता को गिरते देखा, लेकिन भाई के आक्रामक व्यवहार और जान से मारने की धमकी के कारण वह डर गई और किसी को कुछ बताने की हिम्मत नहीं जुटा सकी.
खुद किए पिता की लाश के टुकड़े
वारदात को अंजाम देने के बाद अक्षत ने मामले को छिपाने की कोशिश की. वह शव को तीसरी मंजिल से नीचे लाया और उसे काटकर अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया. कुछ अंग कार में रखकर सदरौना क्षेत्र में फेंक आया, जबकि शेष हिस्सों को नीले ड्रम में डालकर घर के अंदर ही छिपा दिया. धड़ को भी कहीं और ठिकाने लगाने की योजना थी, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने घर पहुंचकर सारा राज खोल दिया. सोमवार शाम पुलिस टीम आरोपी को साथ लेकर मकान पर पहुंची. जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला गया, अंदर फैले खून के निशान, एक ओर लुढ़का पड़ा ड्रम और उसके भीतर रखा अधकटा शव देखकर मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए.
समर्थ श्रीवास्तव