यूपी की योगी सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई अफवाह फैलाकर जमाखोरी या कालाबाजारी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. लेकिन जमीन पर कई शहरों से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे इस दावे से बिल्कुल अलग कहानी कहती दिखाई दे रही हैं.
कहीं गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लगी हैं, तो कहीं लोग सर्वर डाउन होने के कारण सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं. कुछ जगहों पर छोटे सिलेंडर लेने के लिए छात्र-छात्राएं भटक रहे हैं, तो कहीं घरेलू उद्योग चलाने वाली महिलाएं काम बंद होने की कगार पर हैं. सरकार की अपील है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन आम लोगों की परेशानियां यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि आखिर सिलेंडर के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों करनी पड़ रही है.
सरकार का दावा: स्टॉक पर्याप्त, अफवाहों से बचें
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सभी जिलों में आपूर्ति सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जाए. सरकार ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से गैस की कमी या कालाबाजारी की जो खबरें सामने आ रही हैं, उनमें से कई भ्रामक हो सकती हैं. प्रशासन को ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है. इसके लिए जिलों में पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों का निरीक्षण भी कराया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
लखनऊ में लाइनें, सर्वर डाउन की समस्या
राजधानी लखनऊ में कई गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ देखी गई. हालांकि पिछले दो दिनों की तुलना में कतार थोड़ी कम जरूर दिखाई दी, लेकिन लोगों की परेशानी खत्म नहीं हुई है. उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलेंडर लेने के लिए सबसे पहले DAC यानी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड की जरूरत होती है, लेकिन कई बार यह कोड ही नहीं मिल पा रहा है. एक ग्राहक ने बताया, हम सुबह से लाइन में लगे हैं, लेकिन अभी तक DAC नंबर नहीं आया. एजेंसी वाले कह रहे हैं कि सर्वर डाउन है. जब एजेंसी से इस बारे में पूछा गया तो वहां के कर्मचारियों ने बताया कि एक साथ बहुत ज्यादा बुकिंग होने के कारण सिस्टम पर लोड बढ़ गया है. उनका कहना है कि उपभोक्ता रात के समय ऑनलाइन बुकिंग करने की कोशिश करें, क्योंकि उस समय सर्वर पर दबाव कम रहता है और DAC नंबर मिलने की संभावना ज्यादा होती है.
प्रयागराज में छात्रों की मुश्किलें
प्रयागराज के सालोरी इलाके में गैस सिलेंडर को लेकर अलग तरह की परेशानी सामने आई है. यह इलाका प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए जाना जाता है. यहां हजारों छात्र-छात्राएं किराए के कमरों या पीजी में रहकर पढ़ाई करते हैं. इनमें से कई छात्र छोटे 3 से 5 किलो वाले गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं ताकि खुद खाना बनाकर खर्च बचा सकें. लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की उपलब्धता को लेकर दिक्कतें बढ़ गई हैं. एक छात्रा ने बताया, हम सुबह से एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं. कभी कहा जाता है कि सिलेंडर खत्म हो गया, तो कभी कहा जाता है कि सिस्टम काम नहीं कर रहा. पढ़ाई का समय भी इसी में निकल जा रहा है. छात्रों का कहना है कि उनकी परीक्षाएं नजदीक हैं और ऐसे में रोजमर्रा की चीजों के लिए घंटों लाइन में लगना उनकी तैयारी को प्रभावित कर रहा है.
उन्नाव में खुद एजेंसी पहुंच रहे लोग
उन्नाव में भी कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिला. यहां कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने कई दिन पहले सिलेंडर बुक किया था, लेकिन अभी तक डिलीवरी नहीं हुई. ऐसे में लोग खुद गैस एजेंसी पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन वहां भी उन्हें जवाब मिल रहा है कि सर्वर स्लो है और DAC नंबर आने के बाद ही सिलेंडर दिया जाएगा. एक व्यक्ति ने कहा, हमने चार दिन पहले बुकिंग की थी, लेकिन अभी तक सिलेंडर नहीं आया. घर में गैस खत्म हो गई, इसलिए मजबूरी में एजेंसी आना पड़ा.
फिरोजाबाद में महिलाओं का काम ठप
फिरोजाबाद में गैस की कमी का असर केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. यहां चूड़ी उद्योग से जुड़ी हजारों महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. मोहल्ला करबला में रहने वाली रेशमा देवी और उनकी बहू घर पर चूड़ी की झलाई और जुड़ाई का काम करती हैं. इस काम से उन्हें रोज करीब 180 रुपये की आमदनी हो जाती है, जिससे उनका घर चल जाता है. लेकिन पिछले चार दिनों से गैस सिलेंडर न मिलने के कारण उनका काम पूरी तरह बंद हो गया है. रेशमा देवी बताती हैं, पहले सरकार ने मुफ्त गैस कनेक्शन दिया था, लेकिन अब सिलेंडर ही नहीं मिल रहा. मजबूरी में लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है. उनका कहना है कि अगर जल्दी गैस नहीं मिली तो उन्हें काम बंद करना पड़ेगा. रेशमा देवी के मुताबिक, फिरोजाबाद में हजारों महिलाएं घरों में बैठकर चूड़ी से जुड़ा काम करती हैं और गैस की कमी से उनका रोजगार प्रभावित हो सकता है.
बस्ती में सुबह 4 बजे से लाइन
बस्ती जिले में एक वीडियो वायरल होने के बाद गैस सिलेंडर की किल्लत की चर्चा और तेज हो गई. बताया जा रहा है कि बनकटी ब्लॉक के महादेवा चौराहे पर स्थित एक गैस एजेंसी के बाहर सुबह करीब 4 बजे से ही लोग लाइन में लग गए थे.
जब सुबह लगभग 7 बजे एजेंसी का गेट खुला तो लोग सिलेंडर लेने के लिए तेजी से अंदर जाने लगे. कई लोग सिलेंडर सिर और कंधे पर रखकर दौड़ते हुए नजर आए. मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बन गई.
श्रावस्ती में धक्का-मुक्की, महिला घायल
श्रावस्ती जिले के भिनगा, इकौना और गिलौला क्षेत्रों में भी गैस एजेंसियों के बाहर भारी भीड़ देखी गई. इकौना स्थित एक गैस एजेंसी पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई. इस दौरान एक महिला गिरकर घायल हो गईं. स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिलाया. घटना के बाद कुछ समय तक एजेंसी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.
धार्मिक स्थलों पर भी असर
गैस की समस्या का असर धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है. वाराणसी के प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी अन्नक्षेत्र सेवा में रोजाना करीब हजार श्रद्धालुओं को निशुल्क प्रसाद के रूप में भोजन कराया जाता है. लेकिन एलपीजी की बचत के लिए यहां प्रसाद के मेन्यू से एक सब्जी और सेवई को फिलहाल हटा दिया गया है. मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक ऐसी ही रही तो भोजन व्यवस्था पर और असर पड़ सकता है.
बेटी की शादी, पिता गैस के लिए लाइन में
प्रयागराज से एक और भावुक तस्वीर भी सामने आई है. यहां रविंद्र नाथ तिवारी नाम के व्यक्ति अपनी बेटी की शादी की तैयारी में जुटे हैं. अगले दिन बारात आने वाली है, लेकिन घर में खाना और मिठाई बनाने के लिए गैस सिलेंडर की जरूरत है. ऐसे में वह सुबह से गैस एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े हैं. उन्होंने कहा, शादी का घर है, लेकिन गैस नहीं मिल रही. मजबूरी में खुद आकर लाइन लगानी पड़ रही है.
स्कूलों तक पहुंची समस्या
देवरिया जिले के एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी गैस की कमी की वजह से दिक्कतें सामने आईं. स्कूल के प्रधानाचार्य नंदलाल ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से गैस खत्म हो गई है. उन्होंने कहा कि जब भी गोदाम पर सिलेंडर लेने जाते हैं तो वहां से लौटा दिया जाता है. ऑनलाइन बुकिंग भी नहीं हो पा रही. एजेंसी की ओर से उन्हें सलाह दी गई कि जिला पूर्ति अधिकारी से आवेदन लिखवाकर लाएं, तभी सिलेंडर मिल सकेगा.
अफवाह या वास्तविक समस्या?
सरकार का कहना है कि प्रदेश में गैस और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए. लेकिन कई जिलों से आ रही तस्वीरें यह संकेत जरूर देती हैं कि कहीं न कहीं वितरण व्यवस्था में दिक्कतें हैं. संभव है कि कुछ जगहों पर तकनीकी कारणों या अचानक बढ़ी मांग की वजह से समस्या पैदा हुई हो. लेकिन जब लोग घंटों लाइन में खड़े होने को मजबूर हों, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.
(प्रयागराज से पंकज श्रीवास्तव, वाराणसी से रोशन जयसवाल, देवरिया से राम प्रताप सिंह, बस्ती से संतोष सिंह, फिरोजाबाद से सुधीर शर्मा, गोरखपुर से गजेंद्र त्रिपाटी और उन्नाव से सूरज सिंह का इनपुट)
समर्थ श्रीवास्तव