'साहब... 3 साल से राशन कार्ड के लिए भटक रहा हूं', दिव्यांग की फरियाद सुन ADM ने अफसरों को लगाई फटकार

बांदा में 100 फीसदी दिव्यांग बच्चा सिंह पिछले तीन सालों से राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा था. थक हारकर वह डीएम ऑफिस पहुंचा, जहां एडीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई. अधिकारियों को तत्काल जांच कर पात्रता के अनुसार राशन कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए हैं.

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दफ्तर-दफ्तर भटकता रहा दिव्यांग.(Photo: Screengrab) दफ्तर-दफ्तर भटकता रहा दिव्यांग.(Photo: Screengrab)

सिद्धार्थ गुप्ता

  • बांदा,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

उत्तर प्रदेश के बांदा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दोनों पैरों से शत-प्रतिशत दिव्यांग एक व्यक्ति पिछले तीन वर्षों से राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई. थक-हारकर पीड़ित आखिरकार नए डीएम के आने के बाद अपनी अंतिम फरियाद लेकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचा, जहां उसकी हालत देखकर मौजूद लोग भी सिस्टम को कोसने लगे.

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पीड़ित की गुहार सुनने के बाद डीएम ऑफिस में मौजूद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया. जानकारी मिलने पर एडीएम वित्त एवं राजस्व कुमार धर्मेंद्र ने आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद विभाग हरकत में आया और राशन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई.

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दरअसल, पूरा मामला नरैनी तहसील के बरुआ स्योढ़ा गांव का है. यहां रहने वाले बच्चा सिंह दोनों पैरों से पूरी तरह दिव्यांग हैं. मेडिकल विभाग ने उनका 100 प्रतिशत हैंडीकैप सर्टिफिकेट भी जारी किया हुआ है. बच्चा सिंह का कहना है कि वह पिछले तीन सालों से राशन कार्ड बनवाने के लिए तहसील, ब्लॉक और अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हुई.

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'कोई मरेगा तब बनेगा राशन कार्ड'

पीड़ित के मुताबिक, अधिकारियों ने उनसे कहा कि जब किसी का नाम राशन कार्ड सूची से हटेगा, तभी उनका कार्ड बनाया जाएगा. शारीरिक रूप से चलने-फिरने में अक्षम होने के बावजूद बच्चा सिंह ने हार नहीं मानी और नए डीएम के आने पर सीधे कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर गरीबी रेखा से नीचे यानी लाल राशन कार्ड बनवाने की मांग की.

जब इस मामले में जिला पूर्ति अधिकारी कयामुद्दीन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्चा सिंह का नाम पहले परिवार के पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में जुड़ा हुआ था. बाद में उन्होंने अलग राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया, जिसके बाद वर्ष 2025 में उनका नाम परिवार के कार्ड से हटा दिया गया.

डीएसओ के अनुसार इसके बाद बच्चा सिंह ने नया राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया है, जिसकी जांच कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

ADM ने मांगी जवाबदेही

एडीएम वित्त एवं राजस्व कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने डीएसओ से बात की और राशन कार्ड न बनने का कारण पूछा. उन्होंने कहा कि बच्चा सिंह अब अंत्योदय राशन कार्ड की मांग कर रहे हैं और विभाग को पात्रता की जांच कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

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एडीएम ने यह भी कहा कि आखिर तीन साल तक राशन कार्ड क्यों नहीं बना, इसकी भी जांच कराई जा रही है. जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. यह मामला एक बार फिर सरकारी व्यवस्था और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है.

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