सरकारी खाते पर साइबर हमला! सीडीओ के अकाउंट से करोड़ों उड़ाने की साजिश नाकाम

बांदा में साइबर ठगों ने सीडीओ के सरकारी खाते से 1.68 करोड़ रुपये निकालने की बड़ी साजिश रची, लेकिन बैंक अधिकारियों की सतर्कता से यह प्रयास नाकाम हो गया. ठग फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी स्टाम्प लगाकर खुद को विकास भवन का कर्मचारी बताते हुए बैंक पहुंचे और इंटरनेट बैंकिंग सुविधा शुरू करने के लिए आवेदन दिया.

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CCTV खंगाल रही पुलिस.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG) CCTV खंगाल रही पुलिस.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)

सिद्धार्थ गुप्ता

  • बांदा,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:36 PM IST

उत्तर प्रदेश के बांदा में साइबर ठगों ने सरकारी खाते पर बड़ा हाथ साफ करने की साजिश रची, लेकिन बैंक अधिकारियों की सतर्कता और पुलिस की सक्रियता से यह कोशिश नाकाम हो गई. ठगों ने सीडीओ के सरकारी खाते से एक करोड़ 68 लाख रुपये निकालने की कोशिश की. इसके लिए फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी स्टाम्प का इस्तेमाल कर बैंक पहुंचकर आवेदन भी दिया गया.

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जानकारी के अनुसार, ठग खुद को विकास भवन का अधिकारी बताकर बैंक पहुंचे और जल्द इंटरनेट बैंकिंग सुविधा शुरू करने की बात कही. बैंक मैनेजर को जब दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया पर शक हुआ तो उन्होंने तुरंत पुलिस और अधिकारियों को सूचना दे दी. पुलिस की तत्परता के चलते बड़ी ठगी होने से बच गई.

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इस मामले में पुलिस ने साइबर थाना में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है. 

फर्जी दस्तावेजों के सहारे खाते से पैसे निकालने की कोशिश

विकास भवन में तैनात पीडी परियोजना निदेशक डीआरडीए ने पुलिस को बताया कि 27 मार्च को सीडीओ के खाते से रुपये निकालने का प्रयास किया गया था. कुछ लोग बैंक पहुंचकर खुद को विकास भवन का कर्मचारी बताने लगे और खाते में नेट बैंकिंग सुविधा शुरू करने के लिए आवेदन दिया.

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जांच में सामने आया कि आवेदन में लगाए गए हस्ताक्षर और स्टाम्प पूरी तरह फर्जी थे. इतना ही नहीं, ठगों ने कर्मचारी बनकर बैंक मैनेजर को फोन भी किया और काम जल्द करने का दबाव बनाया.

बैंक मैनेजर को संदेह होने पर उन्होंने तुरंत सीडीओ और पुलिस को सूचना दी. इसके बाद दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें सभी अभिलेख फर्जी पाए गए.

पुलिस जांच में जुटी, जल्द गिरफ्तारी का दावा

एसपी के आदेश पर साइबर क्राइम थाना बांदा में मामला दर्ज किया गया है. एएसपी शिवराज ने बताया कि पीडी डीआरडीए से मिली तहरीर के आधार पर साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया गया है.

जांच में सामने आया कि फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए इंटरनेट बैंकिंग से खाते का पैसा निकालने की कोशिश की गई थी. बैंक अधिकारियों और साइबर पुलिस के सहयोग से करीब 1.68 करोड़ रुपये सुरक्षित बचा लिए गए. पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर विवेचना पूरी की जाएगी.

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