हाथरस में 'गैंगवार' जैसा मंजर: कार से खींचकर फौजी को खेतों में दौड़ाया, फिर गोलियों से छलनी कर उतारा मौत के घाट!

हाथरस के सादाबाद में पुरानी रंजिश के चलते सेना के जवान अखिलेश चौधरी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावरों ने कार रोककर जवान को घेरा और जान बचाने के लिए भागते समय उन्हें दौड़ाकर गोलियां मारीं.पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

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फायरिंग में जवान की कार के कांच टूटे (Photo- Screengrab) फायरिंग में जवान की कार के कांच टूटे (Photo- Screengrab)

राजेश सिंघल

  • हाथरस ,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:03 AM IST

उत्तर प्रदेश के हाथरस में सेना एक जवान की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जवान कार से जा रहा था तभी बाइक सवारों ने उन्हें रोक लिया फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया. इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया. शुरुआती दौर में घटना के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है. हलांकि, पुलिस हर एंगल से जंच कर रही है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, आज अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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आपको बता दें कि पूरा मामला थाना सादाबाद क्षेत्र के एनएच-93 पर स्थित एक कोल्ड स्टोरेज के पास का है. यहां बीती शाम भारतीय सेना के जवान अखिलेश चौधरी की हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी गई. सरेआम कार और बाइक पर सवार हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया. परिजनों की मानें तो जवान को घेरकर मारा गया है. हमले के दौरान जवान जान बचाने के लिए कार छोड़कर भागा लेकिन वह हमलावरों की गोलियों से न बच सका. उसे दौड़ाकर गोली मारी गई.

सूचना पर पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. फॉरेंसिंक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की है. फिलहाल, पुलिस हमला करने वालों की तलाश में जुट गई है. मृतक फौजी की पहचान आगरा के आर्मी बेस वर्कशॉप में तैनात अखिलेश चौधरी के रूप में हुई है. अखिलेश समदपुर, थाना सादाबाद का निवासी था. परिजनों का कहना है कि मारपीट की पुरानी रंजिश के चलते यह वारदात हुई है.

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मृतक के परिवार वालों के मुताबिक, बाइक सवार 4 युवकों ने अखिलेश की कार के टायर में गोली मारकर गाड़ी रुकवाई. अखिलेश कार से उतरकर भागा तो पैर में गोली मारी, फिर कई गोलियां शरीर में आरपार कर दीं. अखिलेश कोर्ट में एक तारीख करके लौट रहे थे, तब घेरकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया. क्राइम सीन के देखकर लग रहा है कि हमलावर किसी भी हालत में जवान को जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे.

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