मां को राजनीति में नहीं लाना चाहिए, अनिल राजभर का ओमप्रकाश राजभर पर पलटवार

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने ओमप्रकाश राजभर के बयान पर कहा कि राजनीति में मां को नहीं लाना चाहिए. उन्होंने सुहेलदेव जयंती विवाद, व्यापारी वर्ग के सम्मान, एससी एसटी एक्ट, शंकराचार्य के बयान और यूजीसी रेगुलेशन पर भी अपनी बात रखी. उनका कहना है कि राजनीति में संयम और संविधान का सम्मान जरूरी है.

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कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर (Photo: Screengrab) कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर (Photo: Screengrab)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी ,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:35 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. वाराणसी में उनके कार्यलय में मीडिया से खास बातचीत के दौरान अनिल राजभर ने कहा कि राजनीति और सियासत में मां को नहीं लाना चाहिए. चाहे हमारी मां हो या फिर ओमप्रकाश राजभर की मां हो. हम सभी अपनी मां का दूध पीकर ही बड़े हुए हैं.

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दरअसल, ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत करते हुए अनिल राजभर पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि अगर अनिल राजभर ने अपनी मां का दूध पिया है तो यह बताएं कि देश में किस दुकान पर वोट बेचा जाता है. इससे पहले सुहेलदेव जयंती के मौके पर वाराणसी के सारनाथ में आयोजित कार्यक्रम में अनिल राजभर ने भरे मंच से ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधते हुए समाज को बेचने का आरोप लगाया था और उन्हें चोर कहा था.

अनिल राजभर का ओमप्रकाश राजभर पर जवाब

इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए अनिल राजभर ने कहा कि उन्होंने अपने भाषण में न तो किसी नेता का नाम लिया और न ही किसी पार्टी का नाम लिया. उन्होंने सवाल किया कि अगर नाम नहीं लिया गया तो लोग अपने ऊपर क्यों ले लेते हैं. उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल से उनका सुहेलदेव जयंती का कार्यक्रम लगातार बड़े स्तर पर होता रहा है, लेकिन जैसे ही वह मंच पर बोलने खड़े होते हैं, कुछ लोग 10 से 15 लोगों को शराब पिलाकर भेज देते हैं, जो कार्यक्रम और संबोधन को बाधित करने का प्रयास करते हैं.

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अनिल राजभर ने अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पिता दो बार विधायक रहे हैं और नेवी में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने एक बार चीन और दूसरी बार पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें मेडल से सम्मानित भी किया गया था. सेना से रिटायर होने के बाद रोजी रोजगार के लिए व्यापार करना कोई गलत बात नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि देश का हर व्यापारी सम्मान का पात्र है और किसी भी व्यापारी का अपमान नहीं किया जाना चाहिए. समाज के बुलावे पर उनके पिता ने व्यापार छोड़कर राजनीति में कदम रखा और दो बार विधायक बने.

अलंकार अग्निहोत्री और एससी एसटी एक्ट पर टिप्पणी

बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा पद से इस्तीफा देने और एससी एसटी एक्ट को काला कानून बताते हुए दिल्ली कूच के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि दिल्ली जाएं या दौलताबाद जाएं, इससे फर्क नहीं पड़ता. कुछ लोगों को नेता बनने का नशा सवार है और सस्ती बातें कहकर नेता बनने की सोच रखते हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार और इससे पहले की सरकारों ने भी एससी एसटी समाज के हित में काम किया है. समाज को बांटने वाली राजनीति ठीक नहीं है.

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिए गए अल्टीमेटम पर अनिल राजभर ने कहा कि उनका लखनऊ आना स्वागत योग्य है, लेकिन बात दायरे में रहकर करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले खुलेआम बूचड़खाने चलते थे, लेकिन अब कहीं दिखाई नहीं पड़ते. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि कौन असली हिंदू है और कौन नकली हिंदू, यह संविधान तय करेगा, जिसे बाबा भीमराव अंबेडकर ने बनाया है.

संविधान और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान जरूरी
 

यूजीसी रेगुलेशन को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी पर अनिल राजभर ने कहा कि जब किसी मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ जाता है, तो उस पर टिप्पणी से बचना चाहिए. आगे कमेटी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी.

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