'भोलेनाथ, मेरे पापा की दारू छुड़ा दो...' कांवड़ लेकर चली 9 साल की बच्ची, भावुक कर देगी ये कहानी

अलीगढ़ के गंभीरपुरा मोहल्ले से दिल छू लेने वाली तस्वीर सामने आई. महज 9 साल की बच्ची कांवड़ लेकर भगवान शिव के दरबार पहुंची. वह अपने पिता की शराब की लत से मुक्ति की दुआ मांगने निकली थी. मासूम आवाज में उसने प्रार्थना की- भोलेनाथ, मेरे पापा की दारू छुड़ा दो...

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कांवड़ लेकर प्रार्थना करने निकली बच्ची. (Photo: Screengrab) कांवड़ लेकर प्रार्थना करने निकली बच्ची. (Photo: Screengrab)

शिवम सारस्वत

  • अलीगढ़,
  • 14 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

अलीगढ़ के गंभीरपुरा मोहल्ले में एक मार्मिक तस्वीर सामने आई. महज 9 साल की बच्ची कांवड़ उठाकर भगवान शिव के दरबार में पहुंची. उसके मन में न खिलौनों की चाह थी, न नए कपड़ों की... वो सिर्फ एक दुआ लेकर आई थी.

दिल्ली से अपने नाना-नानी के घर आई इस नन्ही बच्ची ने भगवान शिव से प्रार्थना की- भोलेनाथ, मेरे पापा की दारू छुड़ा दो... वो दारू पीकर घर में झगड़ा करते हैं. उसकी मासूम आवाज और आंखों में छलकते आंसू वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गए.

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परिवार के मुताबिक, बच्ची अपने पिता की शराब की लत से बेहद परेशान है. घर में आए दिन होने वाले झगड़ों का असर उसके मन पर साफ दिखाई देता है. यही वजह रही कि उसने सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया.

बच्ची की मौसी कुमकुम ने बताया कि वह कई दिनों से कह रही थी कि वह भोलेनाथ से अपने पिता के लिए दुआ मांगेगी. वहीं, इस नन्ही कावड़िया ने कहा कि उसे विश्वास है कि भगवान भोलेनाथ उसकी बात जरूर सुनेंगे और उसके पापा शराब छोड़ देंगे.

यह भी पढ़ें: Video: बुर्के में कांवड़ लेकर हरिद्वार से निकली तमन्ना, गूंजे 'बोल भोले' के नारे

दिल्ली से अपने नाना-नानी के घर अलीगढ़ आई एक बच्ची के मन में कोई खिलौना, मोबाइल या नए कपड़ों की इच्छा नहीं थी. उसकी सबसे बड़ी ख्वाहिश थी- उसके घर में शांति लौट आए. पिता की शराब की आदत से परेशान यह मासूम कई बार घर में झगड़े देख चुकी है. हर बार उसका बचपन सहम जाता था.

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कांवड़ लेकर चलती बच्ची के चेहरे पर थकान कम और उम्मीद ज्यादा दिखी. मंदिर पहुंचकर उसने हाथ जोड़कर प्रार्थना की. उसे विश्वास है कि भगवान उसकी सच्ची पुकार जरूर सुनेंगे.

शराब की लत से टूटते परिवारों की कहानियां अक्सर आंकड़ों में सिमट जाती हैं, लेकिन यह बच्ची उस दर्द की जीती-जागती मिसाल बन गई. उसकी कांवड़ यात्रा ने यह संदेश दिया कि कभी-कभी सबसे सच्ची प्रार्थना वही होती है, जो एक मासूम दिल से निकलती है.

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