बीयर तो कांच की बोतल और मेटल के कैन दोनों में बिकते हैं. व्हिस्की कभी एल्युमिनियम के बोतल में बिकती नहीं मिलती है. अब जब एक स्कॉटिश डिस्टिलरी ने अपनी व्हिस्की को एल्युमिनियम की बोतलों में स्टोर करने की घोषणा की है तो बवाल मच गया है. क्योंकि, एल्युमिनियम की बोतल में व्हिस्की के नहीं बेचने के पीछे विशेषज्ञों ने कई तर्क दिए. वहीं कंपनी का कहना है कि धातु की बोतलें पारंपरिक कांच की बोतलों की तुलना में पर्यावरण के लिए बेहतर हैं.
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हेरियट-वाट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करते हुए , डिस्टिलरी ने इस बात की जांच की है कि व्हिस्की एल्यूमीनियम कंटेनरों के प्रति कैसा व्यवहार करती है और कैसी प्रतिक्रिया देती है.
उनके अध्ययन में पाया गया कि स्टडी में हिस्सा लेने वाले लोगों को एल्यूमीनियम में संग्रहित सिंगल माल्ट व्हिस्की और पारंपरिक बोतल में संग्रहित व्हिस्की के स्वाद में कोई अंतर महसूस नहीं हुआ. हालांकि, दुकानों की अलमारियों पर धातु की बनी व्हिस्की की बोतलें देखने में अभी कुछ समय के लिए अजीब लग सकती है, लेकिन एल्युमिनियम की बोतलों में व्हिस्की उपलब्द होने लगी है.
क्या शराब में बढ़ जाएगा एल्युमिनियम का स्तर
वैज्ञानिकों ने पाया कि एल्युमिनियम व्हिस्की के साथ रिएक्शन करता है, जिससे उसका रासायनिक स्वरूप बदल जाता है और समय के साथ वह व्हिस्की में घुल जाता है. इन व्हिस्की के नमूनों में एल्युमीनियम का स्तर पीने के पानी के लिए स्वीकार्य स्तर से काफी अधिक पाया गया.
हेरियट-वाट विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एनी हिल कहती हैं कि इस शोध का अगला चरण एक ऐसी लाइनर ढूंढना होगा जो लंबे समय तक उच्च अल्कोहल स्तर को बिना खराब हुए सहन कर सके. हालांकि, भारी कांच की बोतल में व्हिस्की ही अब तक सर्वमान्य रहा है, लेकिन यह पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं है.
कांच को क्यों रिप्लेस किया जा रहा
कांच के उत्पादन के लिए रेत को अत्यधिक उच्च तापमान पर गर्म करना पड़ता है, जिसमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग होता है और उच्च कार्बन फुटप्रिंट उत्पन्न होता है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, विश्व भर में कंटेनर और फ्लैट-ग्लास उद्योग प्रति वर्ष 60 मेगाटन से अधिक CO2 का उत्सर्जन करते हैं.
ब्रिटेन में प्रतिवर्ष 23 लाख टन कांच का कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 7 लाख टन का उपयोग नए कंटेनर बनाने में किया जाता है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कांच की बोतलें एल्यूमीनियम की बोतलों की तुलना में काफी भारी और बड़ी होती हैं.
हालांकि, इससे आपकी बोतल का वजन संतोषजनक लग सकता है, लेकिन इससे दुनिया भर में व्हिस्की भेजने की लागत में भारी वृद्धि होती है. ब्रिटिश की एक और जिन निर्माता कंपनी ने पाया कि एल्युमिनियम की बोतलों का उपयोग करने से कंपनी समान मात्रा में दोगुनी से अधिक बोतलें भेज सकती है.
इस दूसरी कंपनी के अनुसार, एल्युमीनियम का इस्तेमाल शुरू करने से कार्बन उत्सर्जन में 91 प्रतिशत की कमी आई. वहीं स्कॉटिश डिस्टिलरी कंपनी कैथरीन होल्म का कहना है कि इन्हीं पर्यावरणीय चिंताओं ने टीम को व्हिस्की के लिए एक विकल्प के रूप में एल्यूमीनियम की जांच करने के लिए प्रेरित किया.उन्होंने बताया कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि कांच कल ही गायब हो जाएगा. लेकिन ग्राहकों को प्रीमियम उत्पाद के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाला विकल्प देना एक ऐसा मुद्दा है जिस पर विचार करना चाहिए.
एल्युमिनियम की बोतल को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट
इधर, वैज्ञानिक जांचों की एक श्रृंखला में, शोधकर्ताओं ने एल्युमिनियम के बोतल में शराब बेचने वाली डिस्टिलरी की व्हिस्की के नमूनों को कांच और एल्यूमीनियम के कंटेनरों में रखा.इसके बाद इन नमूनों की तुलना स्वाद टेस्ट करने वालों के एक पैनल द्वारा और विभिन्न प्रकार के केमिकल टेस्ट के माध्यम से की गई.
स्वाद टेस्ट में, प्रतिभागियों को दोनों बोतलों के बीच कुछ बहुत मामूली बदलाव के अलावा कोई अंतर नहीं दिखा. हेरियट-वाट विश्वविद्यालय के डॉ. डेव एलिस कहते हैं कि हम जानते हैं कि मेच्योर व्हिस्की में स्वाभाविक रूप से मौजूद कुछ कार्बनिक अम्ल एल्यूमीनियम के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे एल्यूमीनियम तरल में प्रवेश कर सकता है.
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