कंडोम प्रेग्नेंसी, यौन संचारित रोगों (STIs) और एचआईवी से बचाव में प्रभावी माने जाते हैं. कई स्टडीज़ बताती हैं कि एचआईवी का संक्रमण रोकने में मेल कंडोम 98.5% और फीमेल कंडोम 94% तक असरदार हैं. अगर कंडोम का सही इस्तेमाल किया जाए, तो ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) से भी बचा जा सकता है. कंडोम का इस्तेमाल न करने का सबसे ज़्यादा जोखिम कॉलेज स्टूडेंट्स में है, क्योंकि वे अक्सर अपना पार्टनर बदलते रहते हैं.
दक्षिण-पश्चिम में नए छात्रों के लिए विश्वविद्यालय जाने वाले छात्रों से खुद को और दूसरों को यौन संचारित संक्रमणों (STIs) से बचाने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करने का आग्रह किया जा रहा है. स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी की तरफ से छात्रों को यह सलाह फ्रेशर्स वीक में दी गई है. हाल ही में जिन बच्चों मे कॉलेज की दुनिया में कदम रखा है वे कंडोम का महत्व को समझ पाएं. यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (UKHSA) के ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि इंग्लैंड में गोनोरिया और सिफलिस जैसे यौन संचारित संक्रमण के मामले अभी भी बहुत ज़्यादा हैं.
यह डेटा डेवोन, कॉर्नवाल, समरसेट, विल्टशायर, ब्रिस्टल, ग्लूस्टरशायर और डोरसेट जैसे शहरों से लिया गया है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि 2024 में 15-24 वर्ष की आयु के लोगों में यह संक्रमण पहले से कम हुआ है, लेकिन इस गिरावट के बावजूद, STIs की संख्या अभी भी ज़्यादा है. एजेंसी ने छात्रों और युवाओं से लापरवाही न बरतने का आग्रह किया है.
24 साल तक के युवाओं को ज्यादा खतरा
एजेंसी ने कहा कि ये संक्रमण आसानी से फैल सकते हैं और 15 से 24 वर्ष की आयु के लोग विशेष रूप से जोखिम में हैं. कॉलेज लाइफ सभी के लिए रोमांचक होती है. इस समय को कंडोम का इस्तेमाल न करके ख़राब न करें, साथ ही अपने भविष्य को भी बचाएं. उन्होंने आगे कहा, "जब सही तरीके से और लगातार इस्तेमाल किया जाता है, तो कंडोम कई तरह के यौन संचारित संक्रमणों और अनियोजित गर्भधारण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है."
झिझकना बंद करना होगा
ब्रुक में नर्सिंग प्रमुख, लॉरा डोमेगन ने बताया कि लोग अक्सर अपने पार्टनर से यह कह नहीं पाते कि उन्हें यौन संबंध बनाने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना है. डोमेगन ने आगे बताया कि युवा उनसे अक्सर पूछते हैं कि कंडोम के विषय में पार्टनर से कैसे बात की जाए, खासकर उन लोगों के साथ जिनके लिए यह एकदम नया है या जो पहली बार यौन संबंध बना रहे हैं. डोमेगन ने कहा, "किसी को भी इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह दोनों पार्टनर के लिए ही ज़रूरी है. हम चाहते हैं कि नए विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्र उन लोगों के साथ कंडोम के बारे में बात करने में आत्मविश्वास महसूस करें जिनके साथ वे यौन संबंध बना रहे हैं."
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