एक बैकएंड डेवलपर ने क्लाइंट विजिट के दौरान डांस और फैशन वॉक में हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर वर्कप्लेस बाउंड्री यानी दफ्तर की निजी सीमाओं को लेकर बहस छिड़ गई. मामला तब सामने आया जब कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट ने उनसे कहा कि क्लाइंट को 'इम्प्रेस' करने के लिए एक फन एंगेजमेंट सेगमेंट रखा जाएगा, जिसमें उन्हें सोलो डांस या कॉरपोरेट फैशन वॉक करना होगा.
डेवलपर ने रेडिट पर अपनी बात शेयर करते हुए लिखा कि डांस और फैशन वॉक से मना किया.क्या मैं गलत था? उन्होंने बताया कि क्लाइंट विजिट के दौरान प्रेजेंटेशन, प्रोडक्ट डेमो और नेटवर्किंग के अलावा एक एंटरटेनमेंट प्रोग्राम भी प्लान किया गया था. इसी के तहत कुछ कर्मचारियों से मंच पर परफॉर्म करने को कहा गया.
उन्होंने साफ कहा कि उन्हें डांस पसंद है और वे बॉलीवुड डांस करते हैं, लेकिन वह उनकी निजी पसंद है. मैं डांस इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे मजा आता है, क्लाइंट को एंटरटेन करने के लिए नहीं. जब उन्होंने सोलो डांस से इनकार किया तो उनसे कहा गया कि कम से कम फैशन वॉक में शामिल हो जाएं, लेकिन उन्होंने वह भी मना कर दिया.
उनका कहना था कि मैं एक बैकएंड डेवलपर हूं, इवेंट परफॉर्मर नहीं. क्लाइंट विजिट एक प्रोफेशनल कार्यक्रम होता है. ऑप्शनल का मतलब सच में ऑप्शनल होना चाहिए. मैं किसी को जज नहीं करता जो इसमें हिस्सा ले, लेकिन सिर्फ इम्प्रेशन बनाने के लिए परफॉर्म करना मुझे सही नहीं लगता.
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने खुलकर प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने डेवलपर का समर्थन किया. एक ने लिखा कि 16 साल के करियर में कभी ऐसा क्लाइंट एंगेजमेंट नहीं देखा. दूसरे ने कहा कि डांस और फैशन वॉक से क्लाइंट कैसे प्रभावित होंगे?
कई लोगों ने इसे प्रोफेशनल सीमाओं का मामला बताया और कहा कि दफ्तर में टीम स्पिरिट जरूरी है, लेकिन निजी पसंद का सम्मान भी उतना ही जरूरी है. कुछ ने यह भी लिखा कि अक्सर ऐसी गतिविधियों को ऑप्शनल कहा जाता है, लेकिन कर्मचारियों पर दबाव बना दिया जाता है.
अब सवाल यही है कि टीम भावना और निजी सीमाओं के बीच लाइन कहां खींची जाए. क्या क्लाइंट को खुश करने के नाम पर कर्मचारियों से मंच पर परफॉर्म करने की उम्मीद करना सही है? यही मुद्दा इस बहस के केंद्र में है.
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