यहां टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं सैटेलाइट... बढ़ रहा है आसमान के इस 'बरमूडा ट्रायंगल' का आकार

आसमान में भी एक 'बरमूडा ट्रायंगल' है. यानी इन स्पेस का ऐसा इलाका, जिसके नजदीक आते ही सैटेलाइट के टुकड़े हो जाते हैं. वहां ऐसा क्यों होता है, वैज्ञानिक अब तक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं.

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SAA को आकाश का 'बरमूडा ट्रायंगल' कहते हैं, क्योंकि इसके पास आते ही सैटेलाइट नष्ट हो जाते हैं (Photo - Pexels) SAA को आकाश का 'बरमूडा ट्रायंगल' कहते हैं, क्योंकि इसके पास आते ही सैटेलाइट नष्ट हो जाते हैं (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:39 PM IST

पृथ्वी के इनर स्पेस में दक्षिण अटलांटिक के ऊपर एक ऐसा पॉइंट है, जिसके नजदीक जैसे ही कोई सैटेलाइट जाता है वो नष्ट हो जाता है. यहां पृथ्वी की चुंबकीय ढाल कमजोर हो जाती है. इस वजह से उपग्रह निष्क्रिय हो जाते हैं. ये दक्षिण अटलांटिक एनोमली (विसंगति) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में एक कमजोर बिंदु है जो सैटेलाइट तकनीक में बाधा उत्पन्न करता है और बड़ी खराबी का कारण बनता है.

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 वैज्ञानिकों ने पाया है कि ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही है.  2014 से, इसका क्षेत्रफल महाद्वीपीय यूरोप के आधे आकार के बराबर हो गया है. चौंकाने वाले शोध ने हमारे ग्रह के सुरक्षा कवच में लगातार बढ़ते हुए खालीपन को उजागर किया है और यह उपग्रहों को टुकड़े-टुकड़े कर रहा है.

दक्षिण अटलांटिक विसंगति (एसएए) की खोज सर्वप्रथम 1800 के दशक में हुई थी. आज भी यह अराजकता का स्रोत बना हुआ है. मार्च 2016 में जापान की हितोमी (एस्ट्रो-एच) एक्स-रे वेधशाला अनियंत्रित रूप से घूमने के कारण नष्ट हो गया था. इस कारण लगभग 273 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. एक दशक बाद भी, एसएए अंतरिक्ष में बस्ती बसाने के प्रयासों में बाधा डालना जारी रखे हुए है. आसान शब्दों में कहें तो, एसएए हमारे ग्रह के मैग्नेटिक शील्ड में एक कमजोर कड़ी है.

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इससे सैटेलाइट प्रणालियां बाधित होती हैं और गंभीर खराबी उत्पन्न होती है. मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, हमारे ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड हमारे लिए और पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह हमें ब्रह्मांडीय विकिरण और सूर्य से आने वाले विद्युत आवेशित कणों से बचाता है.

इस इलाके का आकार बढ़ता जा रहा है
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के स्वार्म सैटेलाइट नेटवर्क से प्राप्त 10 वर्षों से अधिक के चुंबकीय क्षेत्र डेटा का इस्तेमाल करते हुए, शोधकर्ताओं ने चिंताजनक रूप से पाया है कि यह घटना बढ़ रही है. 2014 से, इस क्षेत्र का क्षेत्रफल बढ़कर लगभग महाद्वीपीय यूरोप के आधे के बराबर हो गया है.हमारी पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड पिघले हुए लोहे से बना है, जो सतह से लगभग 3000 किलोमीटर नीचे पृथ्वी के बाहरी कोर के रूप में कार्य करता है. यह पिघला हुआ लोहा विद्युत धाराएं उत्पन्न करता है, जो बदले में एक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड का निर्माण करती हैं.

ईएसए के स्वार्म में एक जैसे सैटेलाइट शामिल हैं जो पृथ्वी के चुंबकीय संकेतों को मापते हैं. स्वार्म मिशन ने खुलासा किया है कि एसएए के विस्तार के अलावा, अफ्रीका के दक्षिण-पश्चिम में अटलांटिक महासागर के एक क्षेत्र में 2020 के बाद से पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड में और भी तेजी से कमजोरी देखी गई है.

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अध्ययन के प्रमुख लेखक क्रिस फिनले ने समझाया कि दक्षिण अटलांटिक एनोमलाय केवल एक पॉइंट  नहीं है. यह अफ्रीका की ओर दक्षिण अमेरिका के पास की तुलना में अलग तरह से बदल रही है.इस क्षेत्र में कुछ विशेष घटित हो रहा है जिसके कारण यह क्षेत्र अधिक तेजी से कमजोर हो रहा है.

वापस कोर में जा रहे हैं मैग्नेटिक फील्ड
सामान्यतः हम दक्षिणी हेमीस्फीयर में कोर से निकलने वाली मैग्नेटिक फील्ड रेखाओं को देखने की उम्मीद करते हैं. लेकिन दक्षिण अटलांटिक एनामोलाय(SAA)  के नीचे हमें अप्रत्याशित इलाका दिखाई देते हैं जहां मैग्नेटिक फील्ड, कोर से बाहर आने के बजाय, कोर में वापस चला जाता है.स्वार्म डेटा की बदौलत हम देख सकते हैं कि इनमें से एक क्षेत्र अफ्रीका के ऊपर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, जो इस क्षेत्र में SAA के कमजोर होने में योगदान देता है.

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