'सेकंड-हैंड फ्राइड चिकन' क्या है? यहां इसे चाव से खाते हैं लोग

मार्केट में बहुत सी सेकंड-हैंड चीजें मिलती हैं. इनमें कपड़ा, कार, किताबें, मोबाइल फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान कई चीजें हैं जिनकी रीसेल वैल्यू होती है. लोग कई ऐसी उपयोगी चीजों को इस्तेमाल कर कम कीमत पर बेच देते हैं और दूसरे लोगों के काम आती है. लेकिन, खाने-पीने की चीजें भी सेकंड-हैंड हो सकती है, इस बारे में शायद ही कोई सोच सकता है.

Advertisement
एक वायरल वीडियो से सेकंड हैंड फ्राइड चिकन की चर्चा हो रही है(Representational Photo - Pixabay) एक वायरल वीडियो से सेकंड हैंड फ्राइड चिकन की चर्चा हो रही है(Representational Photo - Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली कई ऐसी चीजें हैं, जो सेकंड हैंड हो सकती है. बाजार में जरूरतमंद लोगों को काफी कम कीमत पर सेकंड-हैंड चीजें मिल जाती हैं. इनमें घर, गाड़ी, किताब से लेकर पहनने वाले कपड़े और कई रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं शामिल हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या खाने-पीने की चीजें भी सेकंड-हैंड हो सकती है. क्योंकि, एक ऐसी जगह है जहां सेकंड-हैंड फ्राइड चिकन मिलता है.

Advertisement

खाने की चीजें भी सेकंड-हैंड बिकती है. ऐसे में कोई भी सोचने पर मजबूर हो जाए कि आखिर खाने-पीने की चीजें सेकंड-हैंड कैसे हो सकती है, क्योंकि ये तो वन टाइम कंज्यूमिग प्रोडक्ट होता है. ऐसे में जानते हैं कि वो जगह कहां है जहां 'सेकंड-हैंड फ्राइड चिकन' मिलता है और ये कैसे संभव है.

यहां खूब बिकता है सेकंड हैंड फ्राइड चिकन
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस की मलिन बस्तियों में दशकों से एक व्यंजन फेमस है, जिसे 'पगपग' या "सेकंड-हैंड फ्राइड चिकन" के नाम से जाना जाता है. यह इन दिनों चर्चा में तब आया, जब एक चीनी इंफ्लुएंसर ने इसका स्वाद चखते हुए इसकी पूरी कहानी को फिल्माया और ये वीडियो वायरल हो गया.

इस पगपग का शाब्दिक अर्थ होता है -धूल झाड़ना. यह पगपैग या सेकंड-हैंड फ्राइड चिकेन फिलीपींस के गरीबी से ग्रस्त भागों में दशकों से खाया जाता रहा है. इसे फेंके गए बचे हुए खाद्य पदार्थों से बनाया जाता है.

Advertisement

फेंके गए बचे हुए चिकन से बनता है 'पगपग'
अमीर लोगों के खाने के बाद जो चिकेन बच जाता है, उसे साफ करके, फिर से मसाले में लपेटा जाता है और फिर उन्हें डीप फ्राई किया जाता है. इसके बाद उन्हें सेकंड हैंड फ्राइड चिकेन के तौर पर बेचा जाता है.

गरीबों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत
यह व्यंजन कुछ गरीब परिवारों के लिए प्रोटीन का एकमात्र किफायती स्रोत है. इसकी उत्पत्ति 1960 के दशक में अत्यधिक गरीबी से हुई थी, जब देश ऋण संकट और गंभीर बेरोजगारी से जूझ रहा था. इसके कारण अनेक लोग अवसरों की तलाश में शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए थे.

ये है पगपग की कहानी
इन समुदायों ने विभिन्न स्रोतों से प्रोटीन के बचे हुए टुकड़ों का उपयोग करना शुरू कर दिया, जो बाद में पगपग में बदल गया. इसे बनाने के लिए, गंदगी ढोने वाले लोग आमतौर पर सुबह से पहले अच्छी तरह से संरक्षित खाद्य अवशेषों को खोजने के लिए निकल पड़ते हैं, जिन्हें वे विक्रेताओं को बेच देते हैं.

विक्रेता सामग्री को काटकर, उसकी सफाई कर, उसमें मसाले डालकर और मिश्रण को तलकर सेकंड हैंड फ्राइड चिकेन तैयार कर लेते हैं. इसकी कीमत 20 से 30 पेसो (30 से 50 अमेरिकी सेंट) यानी 20 से 25 रुपये होती है.

Advertisement

सोशल मीडिया पर ट्रैवल इन्फ्लुएंसर बाओजो ब्रदर ने एक वीडियो में इस भोजन को प्रदर्शित किया गया और बड़े पैमाने पर लोगों का इस ओर ध्यान आकर्षित किया . उन्होंने बताया कि इसका स्वाद तो एक्सेप्टेबल है, लेकिन इसे निगलने में आने वाली मनोवैज्ञानिक बाधा से पार पाना कठिन था.

गरीबों के लिए जूठा खाना खजाने के बराबर
उन्होंने बताया कि इस सेकंड हैंड फ्राइड चिकन का एक निवाला लेने के बाद स्थानीय बच्चों का एक समूह उनके पास आ गया और वे जल्द ही इस भोजन को बांटने लगे. उन्होंने कहा कि यह दुनिया की असमानता है. अमीर लोग जो कुछ भी कचरे की तरह फेंक देते हैं, वह यहां खजाना है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement