इस दुनिया में हर इंसान कभी न कभी कुछ बेहतर की तलाश में भटकता है. रास्ते डगमगाते हों या हालात मुश्किल, इंसान नई राह निकाल ही लेता है. ब्रिटेन के स्टैफर्डशायर की 33 वर्षीय मॉली पॉलार्ड की कहानी भी ऐसी ही है.एक ऐसी कहानी जो बताती है कि हिम्मत से लिया गया एक फैसला पूरी जिंदगी बदल सकता है।
हममें से कई लोग रोज वही काम करते हैं, कम कमाई का दुख झेलते हैं, लेकिन बदलाव का जोखिम नहीं लेते. हम शिकायत तो करते हैं, लेकिन कोशिश नहीं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मानते हैं कि अगर मौजूदा राह साथ नहीं दे रही, तो दूसरी दिशा में कदम रखना ही सही फैसला है.मॉली भी उन्हीं में से एक हैं.
कोर्टरूम से दूर, नई दुनिया की तरफ पहला कदम
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉली पॉलार्ड ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वह कोर्टरूम की फाइलों को छोड़कर स्कैफोल्डिंग प्लेटफॉर्म पर खड़ी होंगी.लेकिन जिस तरह जिंदगी उन्हें धकेल रही थी, बदलाव उनके लिए जरूरत बन चुका था.स्कैफोल्डिंग यानी कंस्ट्रक्शन साइट पर बनाया जाने वाला मजबूत अस्थायी ढांचा, जिस पर खड़े होकर मजदूर, इंजीनियर और पेंटर ऊंचाई पर काम करते हैं.
मॉली के ऊपर करीब पैंतालीस हजार पौंड यानी लगभग छप्पन लाख रुपये का स्टूडेंट लोन था.सात साल लीगल इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद उनकी सैलरी बत्तीस हजार पौंड (करीब चालीस लाख रुपये) से बढ़कर मुश्किल से बयालिस हजार पौंड (करीब तिरपन लाख रुपये) तक पहुंच पाई. वह द सन को बताती हैं कि इन पैसों में न घर चल रहा था, न भविष्य सुरक्षित दिख रहा था.मॉली कहती हैं कि अगर मेरे पति टॉम की मदद न होती, तो मैं आज भी अपने पैरेंट्स के घर से बाहर न निकल पाती. मेहनत बहुत थी, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिल रहा था.
यह भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया में कैब चलाकर कितनी कमाई? भारतीय ने 10 घंटे टैक्सी चलाकर बताए असली आंकड़े
जब जिंदगी में कुछ नहीं बदल रहा था, तो मॉली ने खुद को बदलना शुरू किया.पिछले साल जनवरी में उन्होंने अपने पति टॉम के साथ एक लोकल स्कैफोल्डिंग कंपनी जॉइन कर ली.लोगों ने ये भी कहा कि एक वकील कंस्ट्रक्शन साइट पर कैसे काम करेगी? कई लोगों ने मजाक उड़ाया, कई ने ताने मारे,लेकिन मॉली ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया.
मॉली अब क्या काम करती हैं?
मॉली अब स्कैफोल्डर हैं.यानी वह कंस्ट्रक्शन साइट पर ऊंचाई पर काम करने के लिए स्टील पाइप और प्लेटफॉर्म की मजबूत संरचना बनाती हैं, ताकि मजदूर और इंजीनियर सुरक्षित तरीके से काम कर सकें.यह एक ब्लू-कॉलर जॉब है, लेकिन कमाई अच्छी और काम स्थिर है.
कमाई बढ़ी, जिंदगी में आया सुकून
स्कैफोल्डिंग जॉब शुरू करने के बाद मॉली की इनकम में लगभग पचहत्तर प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई. जहां पहले वह मुश्किल से गुजारा कर पाती थीं, अब उनकी जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा आरामदायक हो गई है.
मॉली कहती हैं कि मैं अब पहले से कहीं ज्यादा खुश हूं. कमाई बढ़ गई है, काम में लचीलापन है और मेरे पास अपने लिए वक्त भी है. स्कैफोल्डिंग ने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी है.आज मॉली की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल है.लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, क्योंकि समाज अक्सर व्हाइट-कॉलर जॉब को बहुत बड़ा बना देता है,लेकिन असली खुशी हमेशा उसी काम में मिलती है, जो सम्मान, संतुलन और स्थिरता दे सके.मॉली का संदेश बहुत साफ है कि करियर बदलने से मत डरिए. आपकी खुशी किसी भी जॉब टाइटल से कहीं ज्यादा बड़ी होती है.
aajtak.in