यह कहानी एक ऐसी चीनी महिला की है, जिसने लोगों की नजर में “अशुभ” माने जाने वाले काम को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. कभी बच्चों को पढ़ाने वाली यह टीचर आज ताबूत बेचकर करोड़ों रुपये कमा रही है. नौकरी से परेशान होकर लिया गया उनका एक फैसला उनकी जिंदगी बदल गया और उन्होंने एक ऐसे बिजनेस में कदम रखा, जिसके बारे में ज्यादातर लोग सोचने से भी डरते हैं, लेकिन उसी काम ने उन्हें सालाना करीब 50 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है.
तनाव की वजह से छोड़ी नौकरी
यह कहानी एक चीनी महिला लीसा लियू की है, जिन्होंने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर ताबूत (कफन रखने का लकड़ी का बॉक्स) बेचने का काम शुरू किया और इससे करोड़ों रुपये कमाए. चीन में आमतौर पर मौत के बारे में बात करना अशुभ माना जाता है. लेकिन शेडोंग प्रांत के हेज़े शहर में यह सोच धीरे-धीरे बदल रही है और यहां ताबूत बनाने और बेचने का बड़ा कारोबार बन गया है. 29 साल की लीसा लियू पहले एक टीचर थीं. वह अपने काम से तनाव में थीं, इसलिए उन्होंने जुलाई 2023 में नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने ताबूत बेचने वाली एक कंपनी में काम शुरू किया और यूरोप, खासकर इटली, में ताबूत निर्यात करने पर ध्यान दिया.
यूरोप में है ताबूत की काफी डिमांड
शुरुआत में उन्हें ताबूत से डर लगता था, लेकिन जब उन्होंने फैक्ट्री में काम देखा तो समझ आया कि यह भी सिर्फ एक लकड़ी का सामान है. इससे उनका डर खत्म हो गया और उन्होंने इस काम को अपनाया. हेज़े में बनने वाले ताबूत यूरोप के हिसाब से बनाए जाते हैं. ये हल्के होते हैं और उन पर धार्मिक डिजाइन बने होते हैं. यहां पॉलोनिया नाम की लकड़ी बहुत मिलती है, जो हल्की और मजबूत होती है, इसलिए ताबूत बनाने के लिए अच्छी मानी जाती है. यहां बने ताबूत की कीमत 90 से 150 डॉलर (लगभग 7,000 से 12,000 रुपये) होती है, जबकि यूरोप में यही ताबूत 1,100 से 2,100 डॉलर तक बिकते हैं. इसलिए यूरोप में चीन के ताबूत की काफी मांग है.
इस बिजनेस में नहीं है बंद होने का डर
लीसा लियू की कंपनी हर साल करीब 40,000 ताबूत यूरोप भेजती है और इससे लगभग 40 मिलियन युआन (करीब 6 मिलियन डॉलर या लगभग 50 करोड़ रुपये) की कमाई होती है. हेज़े के अलावा चीन के कुछ और गांव भी अंतिम संस्कार से जुड़ी चीजें बनाकर विदेशों में बेच रहे हैं. इनमें अगरबत्ती, फूलों की मालाएं और अन्य सामान शामिल हैं. लीसा लियू का कहना है कि यह कारोबार हमेशा चलता रहेगा, क्योंकि दुनिया में हर दिन लोगों की मौत होती है और हर किसी को अंत में ताबूत की जरूरत पड़ती है.
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