मैथेमेटिक्स की दुनिया में कई सवाल ऐसे होते हैं, जो सालों तक दिमाग घुमाते रहते हैं. ऐसा ही एक सवाल पिछले करीब 60 सालों से मैथेमेटिशियन के लिए चुनौती बनी हुई थी. यह सवाल देखने में बेहद साधारण था, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं था. अब आखिरकार इस मुश्किल पहेली का जवाब मिल गया है. कोरिया के 31 साल के मैथमेटिशिय बेक जिन-ईऑन ने इसका हल खोज निकाला है. उनकी इस उपलब्धि की दुनियाभर में तारीफ हो रही है और इसे साल 2025 की बड़ी गणितीय सफलताओं (Mathematical Breakthroughs) में गिना जा रहा है.
बड़े-बड़े एक्सपर्ट भी नहीं सॉल्व कर पाएं प्रॉबल्म
गणित की दुनिया में पिछले करीब 60 साल से एक पहेली ऐसी थी, जिसने बड़े-बड़े एक्सपर्ट का भी दिमाग उलझा रखा था. अब आखिरकार इस मुश्किल समस्या का हल मिल गया है. उनकी इस रिसर्च को दुनियाभर में सराहा जा रहा है. मशहूर पत्रिका साइंटिफिक अमेरिकन ने उनके काम को साल 2025 की शीर्ष 10 गणितीय उपलब्धियों में शामिल किया है.
क्या थी यह पहेली?
इस पहेली को Moving Sofa Problem कहा जाता है. इसे 1966 में मैथेमेटिशियन लियो मोसर ने पेश किया था. सवाल सुनने में बहुत आसान लगता है- एक मीटर चौड़े गलियारे में, जहां 90 डिग्री का मोड़ हो, सबसे बड़ा कौन-सा आकार है जिसे घुमाते हुए वहां से निकाला जा सकता है? यह सवाल इतना आसान है कि स्कूल के छात्र भी इसे समझ सकते हैं, लेकिन इसका सही जवाब ढूंढना बेहद मुश्किल साबित हुआ.
पहले क्या कोशिशें हुईं?
पिछले कई दशकों में गणितज्ञों ने इसके कई जवाब सुझाए—
बेक जिन-ईऑन ने क्या किया?
बेक जिन-ईऑन ने इस समस्या पर करीब 7 साल तक काम किया. उन्होंने 2024 के अंत में इस पर 119 पन्नों का रिसर्च पेपर पब्लिश किया. इसमें उन्होंने साबित किया कि गेरवर का आकार ही सबसे बड़ा संभव आकार है, और उससे बड़ा कोई भी आकार उस मोड़ से नहीं गुजर सकता. खास बात यह रही कि बेक ने कंप्यूटर पर ज्यादा भरोसा नहीं किया. उन्होंने लॉजिक और मैथेमेटिकल थिंकिंग के जरिए यह रिजल्ट निकाला. उन्होंने खुद कहा कि यह सफर ऐसा था 'जैसे टूटे हुए विचारों में से सही सोच को चुनना.'
कौन हैं बेक जिन-ईऑन?
बेक कोरिया के कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी (KIAS) में रिसर्च फेलो हैं. उन्होंने अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है और कई बड़े संस्थानों में काम कर चुके हैं. उनका रिसर्च पेपर इस समय दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित गणितीय पत्रिकाओं में से एक एनल्स ऑफ मैथमेटिक्स में समीक्षा के लिए भेजा गया है.
अगर यह प्रकाशित होता है, तो यह गणित के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाएगी. बेक का कहना है कि किसी भी मुश्किल समस्या को समझने में समय लगता है. उन्होंने कहा- 'मुझे लगता है कि मैंने बस एक छोटा-सा बीज बोया है, जिससे आगे और काम निकल सकता है.'
करीब 60 साल से अनसुलझी इस पहेली का हल मिलना गणित की दुनिया के लिए एक दुर्लभ और ऐतिहासिक पल है.
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