एक स्कूल की केजी (छोटे बच्चों) की फीस को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है. दरअसल साक्षी नाम की एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने एक्स पर स्कूल की फीस का डिटेल शेयर किया. उन्होंने मजाक में लिखा- ट्विंकल-ट्विंकल सीखने के लिए 2.5 लाख रुपये. पोस्ट के मुताबिक इस स्कूल में सालभर की फीस करीब 2.25 लाख रुपये है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं. केजी के बच्चों की फीस को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है. आमतौर पर इतनी फीस बड़े कॉलेज या प्रोफेशनल कोर्स के लिए ली जाती है, लेकिन छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई के लिए इतनी भारी रकम वसूलना लोगों को समझ से बाहर लग रहा है. यही वजह है कि यह मामला इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और लोग इस पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं.
यह मामला तब सामने आया जब साक्षी नाम की एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने X पर स्कूल की फीस की डिटेल शेयर की. उन्होंने अपने पोस्ट के साथ मजाकिया अंदाज में लिखा- ट्विंकल-ट्विंकल सीखने के लिए 2.5 लाख रुपये, जो सीधे तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि इतनी छोटी कक्षा के लिए इतनी बड़ी फीस लेना कितना अजीब है. उनकी यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और लाखों लोगों ने इसे देखा और इस पर प्रतिक्रिया दी.
जूते, मोजे, कैंटीन का खर्च भी शामिल नहीं
शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, यह फीस शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए है. स्कूल ने एडमिशन के समय 15,000 रुपये की फीस ली, जबकि 33,000 रुपये सिक्योरिटी के नाम पर लिए गए, जो वापस नहीं किए जाएंगे. इसके अलावा ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी फीस और जिमखाना जैसे अन्य चार्ज मिलाकर कुल फीस करीब 2.25 लाख रुपये हो जाती है. चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस भारी-भरकम फीस में स्कूल के जूते, मोजे और कैंटीन के खाने का खर्च भी शामिल नहीं है, यानी पेरेंट्स को इन चीजों के लिए अलग से पैसे देने होंगे.
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने कहा कि शिक्षा अब पूरी तरह से एक बिजनेस बन चुकी है और स्कूल सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए इतनी फीस वसूल रहे हैं. कुछ लोगों ने सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी बढ़ती फीस पर कोई नियंत्रण क्यों नहीं है. एक यूजर ने लिखा- यह पूरी तरह से कंट्रोल से बाहर जा रहा है. सरकार क्या कर रही है?” वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह की फीस के कारण मिडिल क्लास परिवारों के लिए अच्छी शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है.
समाज के दबाव में आकर कई बार चुनते हैं ऐसे स्कूल
हालांकि, कुछ लोगों ने इस पर अलग राय भी रखी. उनका कहना है कि महंगे प्राइवेट स्कूल बेहतर सुविधाएं देते हैं, जैसे एसी क्लासरूम, स्विमिंग पूल, एक्टिविटी रूम, स्पोर्ट्स सुविधाएं और इंटरनेशनल लेवल का माहौल. एक यूजर ने बताया कि कुछ इंटरनेशनल स्कूलों में नर्सरी की फीस ही 3.5 लाख रुपये से शुरू होती है, जहां बच्चों को हर तरह की आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं. ऐसे स्कूलों का लुक और माहौल किसी पांच सितारा होटल जैसा होता है.
इसके बावजूद, बहस का बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि क्या इतनी कम उम्र में बच्चों की पढ़ाई के लिए इतनी ज्यादा फीस वाजिब है. कई लोगों का मानना है कि माता-पिता सामाजिक दबाव में आकर महंगे स्कूल चुनते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी छवि बेहतर बनेगी. वहीं कुछ लोग यह भी कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में मुफ्त या कम फीस में पढ़ाई का विकल्प मौजूद है, लेकिन फिर भी लोग प्राइवेट स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं. कुल मिलाकर, इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में शिक्षा धीरे-धीरे आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है. खासकर शुरुआती शिक्षा, जो हर बच्चे का अधिकार मानी जाती है, वह भी अब महंगी होती जा रही है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बनाया जाए, ताकि हर वर्ग के बच्चों को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिल सके.
aajtak.in