न कोडिंग, न IIT- IIM... गूगल के एंप्लॉयी ने बताया ऐसे मिलती है नौकरी 

गूगल की कर्मचारी नेहा शर्मा ने एक वायरल वीडियो में कंपनी की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तीन बड़े मिथकों को बताया . उन्होंने बताया कि गूगल सिर्फ कोडर्स को ही नहीं, बल्कि नॉन-टेक रोल्स के लिए भी भर्ती करता है. साथ ही इंटरव्यू में परफेक्ट जवाब से ज्यादा समस्या सुलझाने की क्षमता और सोच को महत्व दिया जाता है.

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नेहा ने कहा कि अगर हर कोई सिर्फ कोडिंग ही करेगा, तो जो प्रोडक्ट बनेंगे उन्हें बेचेगा कौन? ( Photo: Insta/@Negasharma) नेहा ने कहा कि अगर हर कोई सिर्फ कोडिंग ही करेगा, तो जो प्रोडक्ट बनेंगे उन्हें बेचेगा कौन? ( Photo: Insta/@Negasharma)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:17 AM IST

आज के समय में गूगल में नौकरी करना लाखों युवाओं का सपना होता है. लोग इसे एक ऐसी कंपनी मानते हैं जहां काम करना न सिर्फ सम्मान की बात है, बल्कि करियर के लिए भी बहुत बड़ा मौका होता है. यही वजह है कि गूगल में नौकरी पाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं और गलतफहमियां भी बनी रहती हैं. इन्हीं गलतफहमियों को दूर करने के लिए गूगल की एक कर्मचारी नेहा ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कंपनी में नौकरी पाने से जुड़े कुछ आम मिथकों को बहुत आसान भाषा में समझाया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और खासकर नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को काफी मददगार लगा.

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क्या गूगल में सिर्फ कोडर्स को मिलती है नौकरी?
नेहा ने बताया कि सबसे पहला मिथक यह है कि गूगल में सिर्फ कोडिंग करने वाले लोगों को ही नौकरी मिलती है. नेहा बताती हैं कि जब भी लोग गूगल का नाम सुनते हैं, तो उनके दिमाग में तुरंत कोडिंग आती है. लेकिन सच यह है कि कंपनी में बहुत सारी नॉन-टेक (गैर-तकनीकी) नौकरियां भी होती हैं, जैसे मार्केटिंग, सेल्स, मैनेजमेंट और ऑपरेशन. उन्होंने मजाक में कहा कि अगर हर कोई सिर्फ कोडिंग ही करेगा, तो जो प्रोडक्ट बनेंगे उन्हें बेचेगा कौन? यानी गूगल को हर तरह के स्किल वाले लोगों की जरूरत होती है.

दूसरा बड़ा मिथक इंटरव्यू से जुड़ा है. बहुत से लोग सोचते हैं कि इंटरव्यू में हर जवाब बिल्कुल परफेक्ट होना चाहिए. लेकिन नेहा के मुताबिक, ऐसा जरूरी नहीं है. गूगल ऐसे लोगों को पसंद करता है जो मुश्किल परिस्थितियों में सही तरीके से सोच सकें और समस्याओं का हल निकाल सकें. यानी कंपनी इस बात पर ज्यादा ध्यान देती है कि आप कैसे सोचते हैं और कैसे फैसले लेते हैं, न कि आप हर सवाल का परफेक्ट जवाब दे पाते हैं या नहीं.

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नॉन-टेक रोल्स में भी हैं ढेरों मौके
तीसरा मिथक पढ़ाई और कॉलेज से जुड़ा है. अक्सर लोग मानते हैं कि गूगल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने के लिए IIT या IIM जैसे बड़े संस्थानों से पढ़ाई करना जरूरी है. लेकिन नेहा ने इस बात को गलत बताया. उन्होंने कहा कि उनकी टीम में कई लोग ऐसे हैं, जो इन बड़े कॉलेजों से नहीं हैं, फिर भी वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. गूगल के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है आपका काम, आपका अनुभव और आपकी स्किल न कि आपने किस कॉलेज से पढ़ाई की है. यह वीडियो लोगों को इसलिए भी पसंद आया क्योंकि इसमें सच्चाई और सरलता थी.

नॉन-टेक बैकग्राउंड वालों के लिए भी खुले हैं मौके
कई यूजर्स ने कहा कि इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला और गूगल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी को लेकर उनका डर कम हुआ. खासकर उन लोगों को राहत मिली जो नॉन-टेक बैकग्राउंड से हैं या बड़े कॉलेजों से नहीं पढ़े हैं. कुल मिलाकर, इस वीडियो का संदेश साफ है कि गूगल में नौकरी पाने के लिए जरूरी है आपकी सोच, आपकी मेहनत और आपकी स्किल. 

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