जेन जी पैरेंट्स पर इतना ज्यादा निर्भर हो गए हैं कि पैरेंट्स की मदद बिना इनका कुछ कर पाना असंभव सा लग रहा है. जो काम एक व्यक्ति को खुद से करने चाहिए, वो काम भी जेन जी घर वालों से करा रहे हैं.
फॉर्च्यून मैगजीन की एक रिपोर्ट के अनुसार 77% जेन जी अपनी जॉब पाने के लिए हायरिंग प्रोसेस में अपने पैरेंट्स को लेकर जा रहे हैं. कई तो ऐसे भी थे, जिन्हें इंटरव्यू में और यहां तक कि सैलरी की बात करने के लिए भी पैरेंट्स की मदद लेनी पड़ रही है.
जॉब इंटरव्यू में पैरेंट्स शामिल
जब जॉब ऑफर की जाती है तो कैंडिडेट की काबिलियत देखी जाती है, लेकिन अगर जॉब इंटरव्यू में भी किसी कैंडिडेट को पैरेंट्स को लेकर जाना पड़े तो आप समझ सकते है ये अपने पैरेंट्स पर कितना निर्भर होते जा रहे हैं.
रिपोर्ट बताती है कि करीब 40% पैरेंट्स अपने जेन जी बच्चों के इंटरव्यू में न केवल गए बल्कि बच्चे की जगह उन्होंने सवाल-जवाब भी किए हैं. लगभग 27% पैरेंट्स ने तो कंपनसेशन के लिए खुद ही नेगोशिएट तक कर रहे हैं.
जॉब रिज्यूम और जॉब अप्लाई करने में तक आफत
लगभग 55% जेन जी ऐसे भी हैं, जिन्हें टेस्ट असाइनमेंट के लिए भी अपने पैरेंट्स से कहना पड़ रहा है. वहीं 33% तो ऐसे भी है जो अपना जॉब रिज्यूम भी पैरेंट्स से ही बनवा रहे हैं.
जेन जी को केवल सिलेक्शन प्रोसेस में मदद नहीं चाहिए बल्कि कुछ को तो अप्लाई करने में भी पैरेंट्स की जरूरत पड़ रही है. करीब 90% जेन जी जॉब पाने के ले अपने घर वालों से मदद मांग रहे हैं, तो वहीं लगभग 70% पैरेंट्स को अपने बच्चों के नाम से खुद ही आवेदन करना पड़ रहा है.
HR से भी पैरेंट्स ही कर रहे बात
जेन जी के लिए जॉब पाने में मदद करने के लिए कई पैरेंट्स उनके लिए ई मेल तक लिख रहे हैं और यहां तक की HR से भी बात करने के लिए पैरेंट्स को आगे कर रहे हैं. जेन जी का ऐसा हाल उनके इतने ज्यादा निर्भर होने पर सवाल उठा रहा है. जेन जी का पैरेंट्स पर इस कदर निर्भर हो जाना, भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हो सकता हैं.
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