आखिरी सांस लेते वक्त अक्सर क्या कहते हैं लोग? डॉक्टर और नर्सों ने किया खुलासा

इंसान अपनी आखिरी सांस लेते वक्त इंसानों के मुंह से अंतिम शब्द क्या निकलते हैं, इस बार में कुछ डॉक्टरों और नर्सों ने अपने अनुभव बताते हुए, अजीबोगरीब खुलासा किया है.

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अपने अंतिम क्षणों में क्या कहते हैं लोग (फोटो - Meta AI) अपने अंतिम क्षणों में क्या कहते हैं लोग (फोटो - Meta AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

मृत्यु के वक्त इंसान के मुंह से निकले अंतिम शब्दों में जीवन की गहराइयां और अनकही भावनाओं का अक्स नजर आता है. इन घटनाओं का गवाह बनें डॉक्टर और नर्सों ने बताया कि ये शब्द दो प्रकार के होते हैं – कुछ दिल को सुकून देने वाले और कुछ दिल तोड़ने वाले.

कुछ लोग शांत मन से कहते हैं कि उन्हें जीवन में कोई पछतावा नहीं है, जबकि कुछ अपने जीवन को बेहतर ढंग से न जी पाने का दुःख प्रकट करते हैं. 'मुझे माफ करना', 'धन्यवाद' और 'मैं तुमसे प्यार करता हूं',  ये कुछ कॉमन शब्द होते हैं. लॉस एंजेलेस की हॉस्पिस नर्स जूली मैकफैडन ने बताया कि कई बार मरीज अपने प्रियजनों से 'मैं तुमसे प्यार करता हूं', 'मुझे माफ करना' या 'थैंक यू' जैसे शब्द कहकर विदा लेते हैं. 

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पछतावा और अनकही बातें
मैकफैडन, जो पिछले 15 वर्षों से नर्स हैं, उन्होंने बताया कि ये अंतिम शब्द आमतौर पर किसी फिल्मी दृश्य जैसे नाटकीय नहीं होते, बल्कि बहुत ही सरल और भावुक होते हैं. मरीज अक्सर इस बात पर अफसोस जताते हैं कि उन्होंने अपने स्वास्थ्य को महत्व नहीं दिया. वे कहते हैं कि काश उन्होंने अपने शरीर, परिवार और जीवन के पलों को अधिक सराहा होता.

जूली ने बताया कि कई महिलाएं इस बात का दुःख प्रकट करती हैं कि उन्होंने अपने शरीर की चिंता करते हुए जीवन भर खुद को कई चीजों से वंचित रखा. डायटिंग और अन्य चीजों की खातिर कई खाने-पीने की चीजों से दूर रहीं. इन सब चीजों का भी अंतिम समय में अफसोस होता है. 

'मुझे घर जाना है' और अतीत की बातें
कई बार मरीज मृत्यु के करीब अपने माता-पिता या पहले गुजरे हुए प्रियजनों को पुकारते हैं. जूली ने कहा कि 'घर जाने' की बात करना मौत के बाद किसी अन्य जगह जाने के प्रतीक के रूप में हो सकता है. इसके अलावा, मरीज अपनी मातृभाषा में बात करने लगते हैं, जो उन्होंने वर्षों से नहीं बोली होती. यह उनके अतीत और जड़ों की ओर लौटने का संकेत हो सकते हैं.

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युवाओं और बुजुर्गों के शब्दों का अंतर
डॉक्टर सिमरन मल्होत्रा ने बताया कि बुजुर्ग आमतौर पर 'मैं शांति में हूं' या 'मैंने अच्छा जीवन जिया है' जैसे शब्द कहते हैं, जबकि युवा मरीज कहते हैं, 'मैं अभी मरने के लिए तैयार नहीं हूं.'

दिल को छू लेने वाले अनुभव
जूली ने अपने एक मरीज का अनुभव साझा किया, जिसने उनसे पूछा कि क्या मैं अपनी आंखें बंद करूंगा और भगवान को देखूंगा? इस सवाल पर दोनों ने एक-दूसरे के साथ हंसते हुए कहा "शायद ऐसा ही होगा." एक और मरीज ने मरने से ठीक पहले जूली का हाथ पकड़कर कहा कि मैं मर रहा हूं, बेबी! और फिर शांतिपूर्वक चला गया.

मृत्यु और जीवन का संदेश
डॉक्टर और नर्सों का कहना है कि मृत्यु के समय व्यक्त की गई सच्ची भावनाएं हमें याद दिलाती हैं कि जीवन को सराहना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि हमें समय रहते अपने रिश्तों को सुधारने, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अपने प्रियजनों को प्यार और कृतज्ञता व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए. मृत्यु के समय के ये शब्द जीवन का सबसे बड़ा सबक देते हैं – प्रेम, क्षमा और कृतज्ञता.

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