छोटे-छोटे बच्चों से इतना परेशान हो गई मां... फोन कर बुलाई पुलिस

चार बच्चों की एक थकी हुई मां के साथ अजीब घटना घटी. महीनों से ठीक ढंग से नहीं सो पाने और हमेशा बच्चों की देखभाल लगे रहने की वजह से एक महिला इतनी टूट गई थी कि परेशान होकर उसने पुलिस को फोन लगा दिया और रोने लगी.

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अपने बच्चों से परेशान होकर महिला ने बुला ली पुलिस (Photo - Pexels) अपने बच्चों से परेशान होकर महिला ने बुला ली पुलिस (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

अमेरिका के यूटा में महिला ने 911 डायल किया, तो यह किसी क्राइम या मेडिकल इमरजेंसी में मदद मांगने के लिए नहीं था. वह घर पर अपने चार छोटे-छोटे बच्चों के साथ अकेली थी. उसका पति काम पर था. तभी उसके साथ कुछ ऐसी अजीब स्थिति बन गई कि उसे पुलिस बुलानी पड़ी. 

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कहानी काइली ग्राइम्स नाम की महिला की है. उनके पति काइल देर रात तक अपने ऑफिस में थे और वह अपने चार छोटे बच्चों की देखभाल अकेले कर रही थीं. कई हफ्तों तक लगातार दो घंटे से भी कम देर तक सोने के कारण काइली पूरी तरह से थक चुकी थी. घड़ी में रात के 10 बजने वाले थे. बच्चों को खाना अभी तक परोसा नहीं गया था. तभी काइली का सबसे छोटा बेटा घर में एक गमले में लगा पौधा कुतरने लगा और उसकी मिट्टी भी खाने लगा.  

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कई महीनों से ठीक से सो नहीं पाई थी महिला
काइली ने बताया कि ऐसा लगा जैसे सब कुछ एक साथ हो गया हो.महीनों तक बहुत कम नींद के साथ काम करने के बाद मैं पूरी तरह से थक चुकी थी. मेरे पति देर तक काम कर रहे थे और घर पर नहीं थे. मैं  शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से थकी हुई थी. हाल ही में उसके दो बच्चों में टाइप 1 डाइबिटीज का पता चला था. इससे चार बच्चों की परवरिश के साथ आने वाले तनाव में और इजाफा हुआ.

अचानक, उसके दिन-रात अलार्म बजने से वह लगातार डर में जीने लगी. हमेशा ब्लड शुगर की जांच करने की चिंता- यह एक ऐसी जिम्मेदारी थी जो कभी नहीं रुकती थी. काइली, जिन्होंने टिकटॉक पर भी बहादुरी से अपनी कहानी साझा की है. उन्होंने  याद किया कि कैसे वह उस समय टूट गईं जब उनका 15 महीने का बेटा एक गमले में लगे पौधे में घुस गया और मिट्टी खाने लगा. इससे उसका दम घुटने लगा.

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काइली ने मदद के लिए जहर नियंत्रण केंद्र को फोन किया. काइली ने बताया कि फोन की दूसरी तरफ मौजूद बेचारे व्यक्ति का सामना एक ऐसी मां से हुआ जो महीनों से सोई नहीं थी. पहले से ही डाइबिटीज  से पीड़ित बच्चे के बोझ तले दबी हुई थी और अब दूसरे बच्चे को भी एक और बीमारी होने का खतरा मंडरा रहा था. 

मैं बार-बार यही कहती रही कि मैं उसे जीवित नहीं रख सकती. फिर भी काइली ने तात्कालिक स्थिति को संभालने में कामयाबी हासिल की. जब स्थिति शांत हो गई, तो काइली को एहसास हुआ कि वह ठीक नहीं है. काइली ने बताया कि फोन रखने के बाद मैं पूरी तरह से टूट गई थी.  सब कुछ एक साथ मुझ पर हावी हो गया था. मैं हर स्तर पर चूक रही थी. 

महिला ने खुद को बताया समस्या और रो पड़ी
उस पल मुझे एहसास हुआ कि मैं किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं हूं. मैंने काइल को फोन किया. वह 30 मिनट की दूरी पर था. जब आप उस मानसिक स्थिति में होते हैं, तो 30 मिनट अनंत काल के समान लगते हैं. इसलिए मैंने 911 पर कॉल किया. जब डिस्पैचर ने पूछा कि समस्या क्या है, तो काइली रो पड़ी और उसने उनसे कहा कि वह खुद समस्या है.

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मैं बरामदे में अपने बच्चे को गोद में लेकर बैठी रो रही थी. पहला बचावकर्मी पहुंचा और उसने पैरामेडिक्स के आने तक मुझसे बात करने की कोशिश की. काइल आ गया. अचानक, मैं लोगों से घिर गई जो घुटनों के बल बैठे थे. मुझे अपनी बात कहने दे रहे थे. मुझे अपना गुस्सा निकालने दे रहे थे, रोने दे रहे थे और एक पल के लिए मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ने दे रहे थे.

एक आपातकालीन कर्मचारी ने चार बच्चों की मां को रोते समय अपना सिर उसके कंधे पर रखने दिया. वे सभी काइली के साथ बैठे थे और उसकी सारी चिंताओं और निराशाओं को सुन रहे थे. जब वह शांत हो गई, तो पुलिस ने उसके साथ आगे की बातचीत के लिए एक काउंसलर की व्यवस्था की.

उनके जाने के बाद, काइली ने अपनी रात हमेशा की तरह जारी रखी. खाना खाया और बच्चों को सुला दिया. लेकिन सच्चाई यह है - क्या मैं आत्महत्या करने की कोशिश कर रही थी? नहीं. क्या मैं अपने बच्चों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही थी? बिलकुल नहीं. मैं बस इस स्थिति से बाहर निकलना चाहती थी.

मैं एक ऐसी रात चाहती थी जब मुझे इन बच्चों को ज़िंदा रखने की चिंता न करनी पड़े. मैं रात भर चैन से सोना चाहती थी. मैं लगातार बजते मॉनिटरों से शांति चाहती थी. मैं हर सुई और मेडिकल डिवाइस को दीवार पर फेंक देना चाहती थी. मैं भाग जाना चाहती थी.यह भले ही मामूली लगे, लेकिन पुलिस को किए गए उस साधारण फोन कॉल ने उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी.

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दंपति को एहसास हुआ कि वे सब कुछ खुद से नहीं संभाल सकते और उन्होंने रोजमर्रा के कामों में लोगों की मदद लेना शुरू कर दिया, जैसे कि बच्चों को स्कूल से लाना-ले जाना. उन्होंने कहा कि अन्य प्रकार की सहायता अधिक जटिल रही है. खासकर जब परिवार के सदस्य अपने सबसे छोटे बच्चे की देखभाल करना सीखते हैं, जिसकी चिकित्सा संबंधी जरूरतें पेशेवरों के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं.

काइली ने अपनी इस कहानी को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट के जरिए लोगों तक पहुंचाया है.  टिकटॉक पर ये वीडियो डालने के बाद वो वायरल हो गई हैं. इस पर लोगों ने तरह-तरह से रिएक्ट कर रहे हैं. एक शख्स ने लिखा कि 911 पर कॉल करके बहुत अच्छा काम किया! आपको पता था कि आपको मदद की ज़रूरत है और आपको वह मिल गई! एक अन्य यूजर ने लिखा कि इसे पढ़कर मेरी आंखों में आंसू आ रहे हैं, क्योंकि मैं इस समय इसी स्थिति से जूझ रही हूं. 

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