आने वाले समय में इस एक वजह से 50 लाख लोगों की जाएगी जान, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

यूरोप में आने वाले समय में 50 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा सकती है. इसकी वजह बनेगी तेजी से हो रहा जलवायु परिवर्तन. वैज्ञानिकों ने अपने एक अध्ययन में लोगों को सतर्क किया है.

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इस वजह से यूरोप में चली जाएगी 50 लाख लोगों की जान इस वजह से यूरोप में चली जाएगी 50 लाख लोगों की जान

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

एक चौंकाने वाले अध्ययन में खुलासा हुआ है कि 2099 तक यूरोप में जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी से 58 लाख लोगों की जान जा सकती है. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध में यह अनुमान लगाया गया है.

इस अध्ययन में केवल गर्मी के कारण होने वाली मौतों को शामिल किया गया है, जबकि जंगलों में आग, उष्णकटिबंधीय तूफान और अन्य आपदाओं के कारण होने वाली मौतें इसमें शामिल नहीं हैं. इसके चलते वास्तविक मृत्यु दर और भी अधिक हो सकती है।

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गर्मी का खतरा बढ़ा, ठंड से होने वाली मौतें घटीं
वैज्ञानिकों ने पाया कि ठंड से होने वाली मौतों में कमी के बावजूद गर्मी से होने वाली मौतों में भारी वृद्धि होगी. प्रमुख लेखक डॉ. पियरे मासेलॉट ने कहा कि हमारे निष्कर्ष जलवायु परिवर्तन को कम करने और बढ़ती गर्मी के अनुकूल उपाय करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं.

विशेष रूप से भूमध्य सागर क्षेत्र में, यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं. अध्ययन के मुताबिक, यदि अधिक टिकाऊ नीतियों का पालन किया जाए, तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है.

दक्षिणी यूरोप सबसे ज्यादा प्रभावित होगा
अध्ययन में 2015 से 2099 तक के तापमान और मृत्यु दर के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इसमें 854 यूरोपीय शहरों को शामिल किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी वृद्धि होती है और गर्मी से बचाव के लिए कोई उपाय नहीं किए जाते हैं, तो यूरोप में 58,25,746 मौतें होंगी.

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हालांकि, ठंड से होने वाली 34,80,336 मौतों को टाला जा सकता है, जिससे कुल मिलाकर  मृत्यु दर 23,45,410 तक पहुंच जाएगी. दक्षिणी यूरोप, विशेष रूप से भूमध्य सागरीय क्षेत्र और बाल्कन देश, अत्यधिक गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.

गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर
अध्ययन के अनुसार, बार्सिलोना सबसे ज्यादा गर्मी से प्रभावित शहर होगा. इसके बाद रोम, नेपल्स और मैड्रिड का स्थान होगा. नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन के बारे में यह धारणा खारिज कर दी है कि इससे ठंड से होने वाली मौतों में कमी के कारण कुल मिलाकर फायदा होगा. डॉ. मासेलॉट और उनकी टीम का कहना है कि गर्मी से होने वाली मौतों में वृद्धि किसी भी ठंड से होने वाली मौतों में कमी को लगातार पार कर जाती है.

क्या करना होगा?
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और मानव जीवन को बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता है. यूरोपीय देशों को न केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करना होगा, बल्कि बढ़ती गर्मी के अनुकूल समाधान भी अपनाने होंगे.

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