सवा करोड़ थी सैलरी, फिर भी इस वजह से था परेशान... 10 साल में US से भारत लौटा शख्स!

अमेरिका में 10 साल रहे एक शख्स की कहानी चर्चा में है, जो अच्छी सैलरी होने के बाद भी भारत लौट आया. जानते हैं कि आखिर इस शख्स ने सवा करोड़ सैलरी होने के बाद भी ये फैसला क्यों लिया?

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अमेरिका में 10 साल रहने के बाद एक शख्स भारत लौट गया है. (Photo: Pexels) अमेरिका में 10 साल रहने के बाद एक शख्स भारत लौट गया है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

अक्सर लोग अमेरिका या दूसरे देशों में पैसे कमाने के लिए जाते हैं और वहां बसने की कोशिश करते हैं. लेकिन, इन दिनों एक शख्स की चर्चा हो रही है, जिसने अमेरिका में मोटी सैलरी होने के बाद भी भारत आने का फैसला किया है. इस शख्स ने एक पॉडकास्ट में बताया है कि आखिर ज्यादा सैलरी होने के बाद उन्होंने भारत आने का फैसला क्यों किया. अब जानते हैं कि आखिर उस शख्स की सैलरी कितनी थी और अब उनके अमेरिका छोड़ने के पीछे क्या कारण था...
 
दरअसल, भारत लौटे रवि 10 साल अमेरिका में रहे थे. यहां लौटने के बाद उन्होंने देसी रिटर्न यूट्यूब चैनल पर बताया कि जब वो 2016 में अमेरिका में थे, उस वक्त उनकी सैलरी 90 हजार डॉलर थी और धीरे-धीरे वो बढ़कर 1 लाख 40 हजार डॉलर हो गई यानी भारत के सवा करोड़ रुपये. अपनी सैलरी पर बात करते हुए उन्होंने ये भी बताया कि सैलरी भले ही ज्यादा थी, लेकिन महंगाई इतनी थी कि उनका रियल प्रॉफिट काफी कम था और उनके घर,राशन के खर्चे भी लगातार बढ़ गए थे. इसके साथ ही घर में वो अकेले कमाने वाले थे, इसके बाद उन्होंने अमेरिका में रहना समझदारी वाला फैसला नहीं लगा. 

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क्यों लौटे भारत?

ऐसा नहीं है कि अपने खर्चे की वजह से बल्कि कई और कारण भी थे, जिन्होंने उन्होंने भारत आने पर मजबूर किया. उन्होंने बताया कि प्रोफेशनल कारणों के अलावा, अकेलापन, पारिवारिक परिस्थितिया और वीजा-इमिग्रेशन से जुड़ी दिक्कतों से भी वो काफी परेशान थे. 

उन्होंने अपने पॉडकास्ट में बताया, 'कोविड से पहले, मेरे कई दोस्त मेरे काम करने के इलाके के आसपास रहते थे. कोविड आने के बाद, उनमें से कई लोगों की शादी हो गई या वे दूसरी जगहों पर चले गए. कुछ समय बाद, मुझे अकेलापन महसूस होने लगा. यह दौर शुरू में अस्थायी था, लेकिन धीरे-धीरे एक ये अहम दिक्कत हो गई. हम हमेशा बहुत अकेलापन महसूस करते थे, और यही भारत वापस लौटने का एक बड़ा कारण बना.'

रवि ने ये भी बताया कि वे अमेरिका में मानसिक रूप से कभी पूरी तरह से स्थिर नहीं हो पाए और शादी और बच्चों के बाद यह दिक्क ज्यादा लगने लगी. बूढ़े माता-पिता से दूरी और दादा-दादी व नाती-पोतों के बीच बढ़ता अलगाव उन पर भारी पड़ रहा था. उन्होंने कहा, 'माता-पिता जल्दी बूढ़े हो जाते हैं, बच्चे जल्दी बड़े हो जाते हैं, और यह अलगाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है."

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वीजा भी थी दिक्कत

इमिग्रेशन से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ती जा रही थी. एच-1बी वीजा पर रह रहे रवि ने भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड के लंबे बैकलॉग की ओर इशारा किया. उन्होंने बताया, 'अगर आपका लक्ष्य ग्रीन कार्ड पाना है, तो अभी वेटिंग टाइम करीब 150 से 190 साल है.' उन्होंने यह भी कहा कि अगर आपका लक्ष्य स्थायी रूप से बसना है तो वे अमेरिका जाने की सलाह नहीं देंगे. रवि ने बताया कि वीजा नियमों के कारण करियर में लचीलापन सीमित है और आपका अनुभव भी आपके लिए मुश्किल खड़ी कर देता है. 

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