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जानिए हेलसिंकी में ही क्यों बार-बार मिलते हैं अमेरिका-रूस के नेता?

अंकुर कुमार
  • 29 जून 2018,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 16 जुलाई को फिनलैंड के हेलसिंकी में पहली बैठक करेंगे. यह घोषणा आज वाइट हाउस की ओर से की गई. वाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने कहा कि वे 16 जुलाई को फिनलैंड के हेलसिंकी में मुलाकात करेंगे. आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जब अमेरिका और रूस के राष्‍ट्राध्‍यक्ष हेलसिंकी में मिल रहे हैं.

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दोनों देशों के रिश्‍तों में हेलसिंकी ने काफी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है. रूस जब यूएसएसआर यानी Union of Soviet Socialist Republics (सोवियत संघ) था, तब फिनलैंड का हेलसिंकी अमेरिका और रूस के बीच ऐतिहासिक बैठक का गवाह बना था.

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जुलाई 1975 में अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जेराल्‍ड फोर्ड ने सोवियत संघ के लीडर लियोनिड ब्रेजनेव से फिनलैंड के हेलसिंकी में ही मुलाकात की थी. उनके साथ यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के 33 देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्ष भी मौजूद थे. उनकी उपस्‍थ‍िति में ही ऐतिहासिक हेलसिंकी अकॉर्ड साइन हुआ था.

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शीत युद्ध के दौरान हुए हेलसिंकी अकॉर्ड में यह समझौता हुआ कि कम्‍यूनिस्‍ट और कैपिटल‍िस्‍ट देश अपने संबंध सुधारेंगे. भले ही इस समझौते से अमेरिका और रूस के बीच रिश्‍ते बहुत ज्‍यादा मजबूत नहीं हुए, लेकिन इस बैठक ने दोनों देशों के बीच चली आ रही लंबी दुश्‍मनी को थोड़ा कम करने का प्रयास किया और तनाव थोड़ा कम हुआ.

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1975 की  हेलसिंकी बैठक के पीछे फ‍िनलैंड के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति उरहो केककोनेन का दिमाग था. यह बैठक शीत युद्ध की समाप्‍त‍ि और दुनिया के दो परमाणु संपन्‍न देशों के बीच रिश्‍तों में तनाव कम करने के लिए महत्‍वपूर्ण रहा.

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वहीं अमेरिका के हेलसिंकी में पहली मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच दूसरी बैठक सितंबर 1990 में हुई. सोवियत संघ के विघटन से पूर्व हुई इस बैठक में अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति एडब्‍ल्‍यू बुश और सेवियत संघ के लीडर मिखाइल गोरबेसहेव ने भाग लिया .

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दोनों देशों ने पर्स‍ियन गल्‍फ में बढ़ रहे तनाव को लेकर बातचीत की थी.  अमेरिका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति एडब्‍ल्‍यू बुश और सेवियत संघ के लीडर मिखाइल गोरबेसहेव दोनों ने इराक के साथ तनाव को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की ओर कदम बढ़ाने पर हामी भरी थी. हालांकि इस बैठक के बाद पहली खाड़ी युद्ध की शुरुआत हो गई थी.

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वहीं तीसरी बार अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्‍ल‍िंटन और  रूस के राष्‍ट्रपति बोरिस याल्‍टसीन से 1997 में मुलाकात की थी. इस बैठक में NATO के विस्‍तार पर बात हुई थी.

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फ‍िनलैंड इसलिए भी अमेरिका और रूस दोनों की पसंद रहा है क्‍योंकि शीत युद्ध के समय से ही यह देश न्‍यूट्रल रहा है. साथ ही फ‍िनलैंड के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के दोनों देश से अच्‍छे संबंध रहे हैं. इसके साथ ही फिनलैंड  NATO का हिस्‍सा भी नहीं रहा है, इस वजह से रूस का उसपर विश्‍वास मौजूद है.

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इनके अलावा 2 और वजह है जिसके कारण यह बैठक हेलसिंकी में हो रही है. एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप उस दौरान नाटो की बैठक में भाग लेने और ब्र‍िटेन की यात्रा की वजह से यूरोप में ही होंगे.

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वहीं राष्‍ट्रपति पुतिन भी रूस में ही होंगे, क्‍योंकि 15 जुलाई को फुटबॉल विश्‍वकप का समापन है, और वह इस दौरान समापन कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं.

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आपको बता दें कि यह बैठक उस समय हो रही है जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति ने रूस पर आरोप लगाया है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव को रूस ने प्रभावित करने की कोश‍िश की थी. साथ ही सीरिया जैसे मुद्दों पर भी दोनों देश बंटे हुए हैं.

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भाषा के मुताबिक, सैंडर्स ने एक बयान में कहा, 'दोनों नेता अमेरिका और रूस के बीच संबंधों के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.' इससे पहले ट्रंप ने पुतिन को मार्च में दोबारा निर्वाचित होने पर बधाई दी थी, जिसके बाद पुतिन और ट्रंप ने बैठक करने पर चर्चा की थी.पुतिन के सलाहकार यूरी यूशाकोव ने कल मॉस्को में कहा था कि दोनों नेता किसी तीसरे देश में मुलाकात करेंगे और उसके बाद ही सम्मेलन के स्थान तथा तिथि की घोषणा की गई. यूशाकोव ने कहा कि इस सम्मेलन में राष्ट्रपतियों के बीच सीधी बातचीत होगी तथा इसकी समाप्ति संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के साथ होगी. दोनों नेता एक संयुक्त बयान भी जारी कर सकते हैं.

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पुतिन के सलाहकार की ओर से बैठक की घोषणा से घंटों पहले पुतिन ने अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन से मॉस्को में मुलाकात की थी. रूसी मीडिया के अनुसार पुतिन और बोल्टन ने विश्व में रणनीतिक स्थिरता, परमाणु हथियारों पर नियंत्रण तथा निरस्त्रीकरण डोजियर पर विचार विमर्श किया. इसके अलावा दोनों ने सीरिया और यूक्रेन में हिंसा तथा उत्तर कोरिया, ईरान परमाणु समझौते पर भी चर्चा की.

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