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क्या है NRC? पढ़ें आधी रात जारी हुए इस ड्राफ्ट से जुड़ी 10 बड़ी बातें

आदित्य बिड़वई
  • 02 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 12:54 PM IST
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असम में सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) का पहला ड्राफ़्ट जारी किया है. इसमें 3.29 करोड़ लोगों में से केवल 1.9 करोड़ को ही भारत का वैध नागरिक माना गया है. इस ड्राफ्ट के आते ही असम में लोगों के बीच डर का माहौल है. इस विवाद के बीच aajtak.in आपको एनआरसी ड्राफ्ट से जुड़ी 10 बड़ी बातें बता रहा है.

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1. असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों को निकालने के लिए सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) अभियान चलाया है. दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में गिने जाने वाला यह कार्यक्रम डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट आधार पर है. यानी कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहले पहचान की जाएगी फिर उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा. बता दें कि असम में करीब 50 लाख बांग्लादेशी गैर-कानूनी तरीके से रह रहे हैं. जिसकी वजह से यहां सामजिक और आर्थिक समस्याएं कई दशकों से बनी हुई है.

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2. असम में घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए यह अभियान करीब 37 सालों से चल रहा है. 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान वहां से पलायन कर लोग भारत भाग आए और यहीं बस गए. इस कारण स्थानीय लोगों और घुसपैठियों में कई बार हिंसक वारदातें हुई. 1980 के दशक से ही यहां घुसपैठियों को वापस भेजने के आंदोलन हो रहे हैं.

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3. सबसे पहले घुसपैठियों को बाहर निकालने का आंदोलन 1979 में ऑल असम स्टूडेंट यूनियन और असम गण परिषद ने शुरू किया. यह आंदोलन हिंसक हुआ और करीब 6 साल तक चला. हिंसा में हजारों लोगों की मौत हुई.

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4. हिंसा को रोकने 1985 में केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ. उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और स्टूडेंट यूनियन और असम गण परिषद के नेताओं में मुलाकात हुई. तय हुआ कि 1951-71 से बीच आए लोगों को नागरिकता दी जाएगी और 1971 के बाद आए लोगों को वापस भेजा जाएगा. आखिरकार सरकार और आंदोलनकारियों में बात नहीं बनी और समझौता फेल हो गया.

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5. बाद में असम में सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ता चला गया. 2005 में राज्य और केंद्र सरकार में एनआरसी लिस्ट अपडेट करने के लिए समझौता किया. धीमी रफ्तार की वजह से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

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6. इस मुद्दे पर कांग्रेस जहां सुस्त दिखी. वहीं, बीजेपी ने इस पर दांव खेल दिया. 2014 में भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया. मोदी ने चुनावी प्रचार में बांग्लादेशियों को वापस भेजने की बातें कहीं. इसके बाद 2015 में कोर्ट ने एनआरसी लिस्ट अपडेट करने का भी आदेश दे दिया. 2016 में राज्य में भाजपा की पहली सरकार बनी और अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेजने की प्रक्रिया फिर तेज हो गई.

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7. 3 साल में राज्य के 3.29 करोड़ लोगों ने नागरिकता साबित करने के 6.5 करोड़ दस्तावेज भेजे. नागरिकता साबित करने के लिए लोगों से 14 तरह के प्रमाणपत्र यह साबित करने के लिए लगवाए गए कि उनका परिवार 1971 से पहले राज्य का मूल निवासी है.

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8. इसके बाद हजारों राज्य सरकार के कर्मचारियों-अधिकारियों ने घर-घर जाकर रिकार्ड्स चैक किये. वंशावली को आधार बनाकर जांच की गई.

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9. आखिरकार 2017 सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही आधी रात राज्य सरकार ने एनआरसी की पहली लिस्ट जारी की. लिस्ट जारी होते ही एनआरसी सेंटर पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. अधिकतर लोग निराश दिखे. आने वाले कुछ दिनों में एनआरसी की दूसरी लिस्ट जारी होने वाली है.

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10. राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो बीजेपी के लिए अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा सबसे बड़ा रहा. मोदी ने चुनाव में हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात कही थी. इसलिए सरकार नागरिकता संशोधन बिल पास कराना चाहती है. यदि सरकार मुस्लिम घुसपैठियों पर सख्ती हुई तो सामाजिक खाई बढ़ने के भी आसार हैं. बता दें कि घुसपैठियों में मुस्लिमों के अलावा बड़ी तादाद में बांग्ला-हिंदू भी हैं.

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