पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा पूरे देश में निकाली जा रही है. ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि विसर्जन के दौरान की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
यह तस्वीर दिल्ली की है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि विसर्जन को यहां मनोज तिवारी ने अंजाम दिया. इस तस्वीर में बीजेपी नेता व दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी कुछ लोगों के साथ नाव पर अटलजी की अस्थियां विसर्जित करते दिख रहे हैं.
इस तस्वीर के वायरल होने के पीछे वजह वह हाथ है, जिसे मनोज तिवारी ने 'दैवीय शक्तियों का कमाल' बताया. हालांकि सच्चाई कुछ और है.
आपको बता दें कि मनोज तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि विसर्जन कार्यक्रम की 4 तस्वीरें शेयर की थी. इसमें तस्वीर नंबर 4 में कुछ ऐसा था जो अजीब था. इस तस्वीर में नाव से एक रहस्यमयी हाथ पानी की ओर निकला हुआ नजर आ रहा है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
इसी तस्वीर को लेकर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष तिवारी ने कहा कि वह भी इस फोटो को लेकर अचंभित हैं. उनका कहना है कि मैं दैवीय शक्तियों को मानता हूं और यह फोटो भी इशारा कर रहा है कि यमुना को साफ रखना है.
यही वजह है कि हमने इस तस्वीर का वायरल टेस्ट किया. आपको बता दें कि यह तस्वीर मैं दैवीय शक्ति का कमाल नहीं बल्कि फोटोशॉप है. इस बात को उसी शख्स के करीबी ने स्वीकार किया, जिसका यह हाथ इस फोटो में नजर आ रहा है. यह हाथ अरुण सिंह के हैं. अरुण सिंह भाजपा के नेशनल जरनल सेकेट्री हैं. आजतक के सहयोगी वेबसाइट लल्लनटॉप ने इस मामले में अरुण सिंह को कॉल लगाया तो उनके पीए पारस ने उत्तर दिया कि तस्वीर फोटोशॉप्ड है. हालांकि इसके आगे कुछ नहीं बताया गया. आपको बता दें कि इससे पहले रिपोर्ट में हमने भी तस्वीर के फोटोशॉप होने या प्रोसेस होने में गलती की ओर इशारा किया था.
वहीं आपको बता दें कि भले ही पीए ने इसे फोटोशॉप्ड तस्वीर बता दिया हो, लेकिन इस तरह का कमाल जानबूझकर या गलती से भी हो सकता है. इस कमाल को करता है कैमरे का एचडीआर (हाई डायनेमिक रेंज) फीचर जो अब कई फ्लैगशिप फोन में भी मौजूद है. आपको बता दें कि कैमरे से ली जानी वाली तस्वीर में असल खेल एपेचर, शटर स्पीड और आईएसओ का होता है. यह सभी फैक्टर लाइट और एक्सपोजर को कंट्रोल करते हैं और उसी से फोटो की क्वॉलिटी और उसमें होने वाले ज्यादातर एफेक्ट कंट्रोल होते हैं. ज्यादा डिटेल में न जाकर बताते हैं कि असली खेल कहां हुआ है. इसमें ज्यादातर खेल शटर स्पीड का है, जिसमें स्लो शटर स्पीड की वजह से कोई तेज मोशन वाला ऑब्जेक्ट ब्लर या फिर उसकी डुप्लीकेसी हो जाती है, जो इस फोटो में हुई है. खासकर जब स्लो शटर स्पीड और एचडीआर का मिलन होता है तो डुप्लीकेसी एक तरह से रियल हो जाती है. क्योंकि एचडीआर में तीन (लो एक्सपोज़र, नॉर्मल एक्सपोज़र और हाई एक्सपोज़र) वाली फोटो खींचने के बाद कैमरा ऑटोमेटिकली (अपने आप) इन तीनों को जोड़कर एक फोटो बना देता है. एचडीआर रियल्टी और तस्वीरों के बीच के अंतर को खत्म कर देता है. ऐसे में यह हो सकता है कि एचडीआर तीन फोटो खींच रहा रहा था तब तक बीजेपी नेता का हाथ मुट्ठी बांधने से लेकर पानी को छूने तक का सफ़र तय कर लिया और इसी वजह से मोशन होने की वजह से उनका हाथ दो जगह दिखाई दे रहा है. यह इसलिए भी संभव लग रहा है क्योंकि बाकी लोग हाथ जोड़कर खड़े हैं और उनके द्वारा ज्यादा मुवमेंट नहीं हो रहा है.
सोशल मीडिया पर भी कई यूजर ने इस तस्वीर को फोटोशॉप बताते हुए कमेंट किए हैं. कुछ लोगों ने इसे फोटोशॉप बताते हुए सांसद मनोज तिवारी की आलोचना की. आलोचना करने वालों के अनुसार मनोज तिवारी को अस्थि विसर्जन कार्यक्रम की गंभीरता समझते हुए ऐसी तस्वीर नहीं डालनी चाहिए थी. साथ ही इसके बाद 'दैवीय शक्तियों का कमाल' वाला बयान देकर मनोज तिवारी ने इसके फोटोशॉप को भी नकारने की कोशिश की.
आपको बता दें कि इससे पहले पार्टी ने अस्थि कलश यात्रा निकाली जो दिल्ली के सभी सात लोकसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी. भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी, सांसद मीनाक्षी लेखी, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के साथ मंगलवार सुबह करीब 11 बजे गुरुद्वारा नानकसर से अस्थि कलश यात्रा निकाली गयी. इसके बाद अस्थि विसर्जन के लिए बीजेपी के कई नेता बोट में सवार होकर यमुना नदी में गए थे.