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जब स्कूल में छात्राओं पर चढ़ा 'भूत', टीचर्स के उड़ गए होश

aajtak.in
  • 21 जून 2019,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक सरकारी स्कूल में अचानक कुछ छात्र-छात्राएं अजीबोगरीब हरकत करने लगे, जिससे पूरे स्कूल में कोहराम मच गया. दरअसल कठुआ के बनी में सित्ती हाई स्कूल में प्रेयर (प्रार्थना) खत्म होने के बाद खासतौर पर छात्राएं क्लास में जाते ही अजीब हरकत करने लगीं और जोर जोर से रोने लगीं. इतना ही नहीं वो फर्श पर छटपटाने लगीं और बचा लो बचा लो कहकर चिल्लाने लगीं. ऐसा लग रहा था कि उन्हें  कोई दर्द हो रहा था.

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छात्राओं की इस तरह बिगड़ती मानसिक हालत को देखकर कर शिक्षकों के हाथ पांव फूल गए. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इन छात्राओं को हुआ क्या और इसे कैसे नियंत्रित किया जाए.लेकिन फिर भी वो छात्राओं को संभालने की कोशिश में लगे रहे और उनसे पूछते रहे कि उन्हें क्या तकलीफ हो रही है. लेकिन जिन छात्राओं की मानसिक स्थिति खराब हो गई थी वो कोई जवाब नहीं दे सकीं और सिर्फ रोती रहीं.

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वहां जो लोग मौजूद थे उन्होंने बताया कि छात्राएं ऐसा व्यवहार कर रही थीं, जैसे लग रहा हो वो तड़प रही हैं. वो जमीन पर लोटते और कांपते हुए नजर आ रही थीं. स्कूल के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना मुख्य शिक्षा अधिकारी को दी जिसके बाद वो मेडिकल टीम को लेकर स्कूल पहुंचे.

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हालांकि मेडिकल टीम ने जब पीड़ित छात्राओं की जांच की तो उन्हें कुछ भी असामान्य नहीं मिला और सभी स्वस्थ्य पाए गए. इसके साथ ही वहां पीड़ित बच्चों की काउंसिलिंग भी की गई.

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बनी के एसडीएम जोगिंद्र सिंह जसरोटिया ने कहा कि पहली नजर में यह मास हिस्टीरिया का मामला लग रहा है लेकिन जांच में सभी स्वस्थ्य पाए गए हैं. बताया जा रहा है कि स्कूल में कुल 40-50 ऐसी छात्राएं थीं जिनका व्यवहार अजीब हो गया था.

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वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक सप्ताह से बच्चे खासकर छात्राएं अजीब व्यवहार कर रही थीं और ऐसे कई मामले सामने आ रहे थे. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी दो-तीन छात्राओं को ऐसी ही दिक्कत हुई थी. लेकिन शुक्रवार को मामला काफी बिगड़ गया.

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मामला बिगड़ने के बाद स्कूल प्रशासन ने छात्राओं के परिजनों को इसकी सूचना दी और उन्हें घर वालों के साथ स्कूल से भेज दिया. ऐसे परिजन अपनी बेटियों का इलाज करवाने के लिए उन्हें पठानकोट ले गए जहां किसी बीमारी का पता नहीं चला.

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खासतौर पर 9वीं क्लास की छात्राओं को यह दिक्कत सबसे ज्यादा हुई और उन्हें देखकर दूसरी छात्राएं भी इसी तरह का व्यवहार करने लगीं. कुछ छात्राएं नाचती रहीं तो कुछ जमीन पर लोट कर दहाड़े मार-मार कर रोने लगीं.

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