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अस्पताल की खुली पोल, यहां कोरोना मरीजों का खुले में हो रहा इलाज

राजेश कुमार झा
  • 23 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 8:16 PM IST
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पटना के पीएमसीएच अस्पताल के एक डॉक्टर ने बिहार सरकार की पोल खोलकर रख दी. उनका कहना है कोरोना वायरस के मामले में सरकार लापहरवाही कर रही है इसके कारण मरीज दूसरे अस्पताल में पलायन करने पर मजबूर है. डॉक्टर ने कहा कि हम अपने आप को सुरक्षित नहीं समझ रहे हैं इसलिए खुले मैदान में मरीजों को देखकर उन्हें इलाज के लिए भेज रहे हैं.

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साथ ही पटना के पीएमसीएच के रेजिडेंट डॉक्टर का कहना है, 'बिहार सरकार हमें जब स्टरलाइज रूम (जीवाणुरहित) रूम नहीं दे पा रही है तो मरीजों के साथ क्या हो रहा होगा इसका आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं. हम लोग इसी कारण खुले स्थान पर सस्पेक्टेड मरीज (संदिग्ध मरीज) का इलाज करने पर मजबूर हो गए हैं.'


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सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच के डॉक्टर ने बताया कि अभी तक कोरोना मरीजों के लिए पीएमसीएच में 20 बेड ही हैं जो पूरी तरह से फुल हैं. इसलिए यहां के कई मरीज इस जानकारी के बाद दूसरे अस्पताल में पलायन करने को मजबूर हैं.


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उन्होंने आगे बताया कि अभी तक जितने मरीजों के कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आये हैं वो सभी इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच आये थे, लेकिन यहां बेड नहीं मिलने के कारण दो मरीज एम्स चले गए और तीसरा नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिसमें एक की मौत एम्स में हो गई है, जबकि दो मरीजों का इलाज जारी है.

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डॉक्टर ने चिंता जताते हुए कहा कि हम लोगों ने अपने सुपरिटेंडेंट के पास अपनी मांग रखी है वो आश्वासन तो दे रहे हैं, लेकिन हम लोगों को सुविधा की कमी साफ दिख रही है.

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एक कोरोना वायरस रोगी के मोहल्ले में रहने वाले पवन ने बताया, 'हम लोग अपने इलाके से महिला मरीज को लेकर आए हैं, जो दिल्ली से जब से आई है तब से काफी खांस रही थी. लेकिन पीएमसीएच आने के बाद काफी देर तक हमें इधर से उधर टहलाया गया. जब डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा की आप दूसरे अस्पताल चले जाएं. यहां मरीज का इलाज नहीं हो सकता है क्योकि बेड खाली नहीं हैं, पीएमसीएच में कुछ नहीं हो रहा है.'

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पीएमसीएच पटना के दूसरे डॉक्टर का कहना है कि इमरजेंसी ओपीडी में हम लोगों ने मांग की थी कि पूरी जगह को सेनेटाइज  किया जाए लेकिन वो हो नहीं रहा है. इस कारण हम लोग खुले स्थान पर मरीजों को देख रहे हैं. अभी तक जितने भी कोरोना के मरीज पॉजिटिव हुए हैं वे सभी यहां आये थे लेकिन इलाज के लिए बेड नहीं होने के कारण यहां से वे मरीज एम्स या दूसरे अस्पताल में चले गए. यहां तक कि हम लोगों को बचाव के सभी सामान नहीं मिल रहे हैं जिससे हम वायरस से अपना बचाव कर सकें.

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